क्या है जाट आंदोलन? पढ़ें पूर्ण विवरण एवं इतिहास
हरिणाया जल रहा है, दिल्ली प्यासी हो गई, उत्तर प्रदेश ठहर गया और राजस्थान, पंजाब और हिमाचल की रफतार धीमी पड़ गई। यह सब जाट आंदोलन की देन है। सरकार के आश्वासन के बाद आंदोलन की गति धीमी हुई है, लेकिन कुछ जगहों पर प्रदर्शन जारी हैं और विरोध बरकरार है। इन सबके बीच चलिये जानते हैं, कि जाट आंदोलन है क्या?
जाट आंदोलन
इसका पूर्ण विवरण इस प्रकार है-
कौन हैं जाट?
जाट हरियाणा के किसानों की एक जाति है। इस जाति के तमाम लोग उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भी रहते हैं। हालांकि ज्यादातर जाट हरियाणा में ही रहते हैं। और हरियाणा की राजनीति में इनका असर हमेशा दिखाई देता है।
सर डैंजिल इब्बेटसन ने जाट की परिभाषा कुछ इस प्रकार दी थी- जाट वो किसान होते हैं, जो खुशी-खुशी अपने कर दें। दो बड़े जाट नेता सर छोटू राम और चौधरी चरण सिंह, जिनमें चरण सिंह आगे चलकर देश के प्रधानमंत्री भी बने।
क्या है जाटों की मांग?
जाट समुदाय की मांग है कि सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में उन्हें ओबीसी कैटेगरी के तहत आरक्षण प्रदान किया जाये। इसी मांग के चलते समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।
पहली बार कब उठी ये मांग?
1991 में गुरनाम सिंह कमीशन की एक रिपोर्ट आयी, जिसके तहत जाट समुदाय को पिछड़ी जाति में रखा गया। उनके साथ सात अन्य समुदायों के लोगों को भी पिछड़ा घोषित कर दिया गया। लेकिन भजन लाल सरकार ने उस अधिसूचना को वापस ले लिया, जिसके अंतर्गत जाटों को पिछड़ा वर्ग में रखा जाना था।
दो नई कमेटियां बनीं, लेकिन दोनों ने जाट समुदाय को पिछड़ी जाति में शामिल नहीं किया। साल 2004 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा सत्ता में आये और उन्होंने केंद्र से जाटों को आरक्षण देने की मांग कई बार की।
हरियाणा की राजनीति में जाटों की भूमिका
1966 में हरियाणा को पंजाब से काट कर अलग किया गया। तब से अब तक 10 में से 7 मुख्यमंत्री जाट समुदाय के रह चुके हैं। हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में 27 प्रतिशत वोटर जाट समुदाय के हैं। यही कारण है कि यह समुदाय राजनेताओं के लिये हमेशा अहम रहता है। हालांकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जाट समुदाय के नहीं हैं।
हरियाणा में जाट बेल्ट की बात करें तो रोहतक, झज्जर और भिवानी जाट बेल्ट के रूप में मानी जाती है। यहां पर आपको जाटों का वर्चस्व हमेशा दिखाई देगा।
कानूनी पेंच
साल 2015 मार्च में उच्चतम न्यायालय ने यूपीए सरकार के उस फैसले को खारिज कर दिया था, जिसमें केंद्र सरकार की नौकरियों में जाटों को ओबीसी कोटा के तहत आरक्षण दिया गया था। जाट आरक्षण हरियाणा और आठ अन्य राज्यों में लागू किया गया, लेकिन उसे भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
जाट आंदोलन की तस्वीरें
एनडीए सरकार ने इस पर रिव्यू पिटिशन फाइल की, जो इस वक्त विचाराधीन है। वहीं पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हुड्डा सरकार के फैसले पर स्टे लगा रखा है।
जाटों की सामजिक एवं आर्थिक स्थिति
केसी गुप्ता पैनल की रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में उच्च स्तर की सरकारी नौकरियों में 18 फीसदी जाट समुदाय के हैं। 40 से 50 फीसदी जाट निचले पदों पर हैं। शिक्षण संस्थानों में 10 फीसदी जाट हैं। इनका मुख्य व्यवसाय किसानी है। वहीं 10 फीसदी जाटों के पास तो खुद की जमीन भी नहीं।
10 साल पहले तक जाटों के पास जमीनों की भरमार थी। जैसे-जैसे परिवार सिमटते गये और शहरीकरण होता गया जाटों की जमीनें कम होती गईं।
कहां है खट्टर सरकार?
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार को कतई अंदाजा नहीं था, कि जाट इस कदर बवाल काटेंगे। लोकसभा चुनाव और उसके बाद हरियाणा विधानसभा चुनाव में बेहतरीन जीत के बावजूद खट्टर ने प्रमुख स्थानों व पदों पर जाट समुदाय के लोगों को अपने साथ नहीं जोड़ा और न ही जाटों के मुद्दों पर गौर किया। राज्य की करीब 100 खाप पंचायतें एक हुईं, तब भी सरकार सोती रही जाट समुदाय के नेता पूरी प्लानिंग करते रहे, लेकिन सरकार शांत बैठी रही। अब जब चिंगारी आग बन गई, तब सरकार के हाथ पैर फूल गये हैं।












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