5 वजहें क्यों है दादा धोनी की तुलना में बेहतर कप्तान
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के सफलतम कप्तान सौरव गांगुली का आज जन्मदिन है। लेकिन आज भी क्रिकेट के चाहने वाले इस बात पर चर्चा जरूर करते हैं कि धोनी और गांगुली में से बेहतर कप्तान कौन है।
हालांकि धोनी ने दो विश्वकप देश को दिलाये हैं लेकिन जिन परिस्थितियों में दादा ने टीम की अगुवाई की है उसके लिए उनके प्रशंसक उन्हें कहीं बेहतर कप्तान मानते हैं। एक तरफ जहां धोनी के लिए एक बेहतरीन टीम थी तो वहीं गांगुली को ऐसे दौर में टीम की अगुवाई दी गयी थी जब टीम फिक्सिंग का दंश झेल रही थी।
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फिक्सिंग के दौर से टीम को उबारा
दादा ने 2000 के शुरुआत में फिक्सिंग दौर मे घिरी टीम की कमान संभाली। वहीं जब धोनी ने टीम की कमान संभाली उस वक्त टीम काफी मजबूत थी और किसी संकट में भी नहीं थी।

विदेशी जमीन पर धोनी से बेहतर दादा
विदेशी जमीन पर धोनी ने 30 में से सिर्फ सिर्फ 6 टेस्ट मैच जीते जबकि दादा की अगुवाई में टीम ने 28 में से 11 मैच जीते।

टीम इंडिया के लिए नयी विरासत खड़ी की
वीरेंद्र सेहवाग, हरभजन सिंह, युवराज सिंह, जहीर खान जैसे अहम खिलाड़ियों को टीम में लाने में दादा की अहम भूमिका थी जिन्होंने 2011 विश्वकप जीत में अहम भूमिका निभाई।

भारतीय क्रिकेट की तस्वीर को बदला
2000 से पहले टीम को इतनी इज्जत कभी नहीं मिली जितनी इसके बाद मिली और इसका श्रेय दादा को जाता है। दादा ने हर टीम को भारत को देखने का नजरिया बदला। यह वह दौर था जब भारत किसी भी टीम की छींटाकशी को बर्दाश्त करने के लिए तैयरा नहीं थी।

विदेशी जमीं पर दादा की बैटिंग धोनी से बेहतर
दादा ने 40.23 के औसत से रन बनाये हैं जबकि धोनी ने 31.85 के औसत पर ही रहे।












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