भारतीय राजनीति में 2015 की अहम संभावनाएं

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। नूतन वर्ष यानी आज से शुरू हुआ 2015 राजनीतिक स्तर पर अहम रहने वाला कई दलों और कम से कम एक नेता के लिए तो। पर, पहले बात करेंगे नेता की। हम बात कर रहे हैं आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल की। उनके लिए 2015 करो या मरो साबित होने जा रहा है।

2015 likely to witness many big political upheavals

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे उनके और उनकी आम आदमी पार्टी का भविष्य तय कर देंगे। उन्हें बहुत सी चुनौतियां का सामना करना होगा। वे आगामी दिल्ली विधान सभाचुनाव में जीतने का दावा कर रहे हो लेकिन लोकसभा चुनाव में पंजाब को छोड़कर आम आदमी पार्टी देश में कहीं असर नहीं छोड़ पाई। अब दिल्ली पर सभी की निगाहें लगी हैं।

संकट आएगा

अगर दिल्ली के गढ़ में भी आम आदमी पार्टी फेल हुई तो उसकी साख पर जबरदस्त संकट आ जाएगा।उनके कार्यकर्ताओं में लोकसभा चुनावों के बाद निराशा भर गई थी। कार्यकर्ताओं के पस्त मनोबल को खुद केजरीवाल ने महसूस किया था। इसी के बाद पार्टी के अंदर मतभेद भी बढ़े। दिल्ली के चुनावों के लिए पूरे देश से कार्यकर्ताओँ को पूरे मनोबल से जुटाना आसान नहीं होगा। कुल मिलाकर नया साल उनके लिए बेहद अहम है।

अकाली-भाजपा में तनाव

पंजाब में अकाली दल और भाजपा के संबंध लगातार खराब हो रहे हैं। दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर वार कर रहे हैं। यह सिलसिला हरियाणा विधानसभा चुनाव से चालू है। जानकार मानते हैं कि इस साल गठबंधन टूट के कगार पर पहुंच सकता है। अकाली आजकल केन्द्र की भाजपा सरकार से खफा हैं क्योंकि नशाखोरी के कारोबार में शामिल होने का आरोप झेल रहे राज्य के राजस्व मंत्री विक्रमजीत सिंह मजीठिया से प्रवर्तन निदेशालय ने पूछताछ की। अब वही अकाली दल नशे की तस्करी को रोकने के लिये 5 जनवरी को 4 जगहों पर धरना देगा। जानकार मानते हैं कि पंजाब में अकाली दल और भाजपा के बीच तनातनी जिस तरह से चल रही है, उससे साफ है कि अब यह गठबंधन लंबे समय तक नहीं चलेगा।

जानकार कहते हैं कि अकाली दल ने धर्मांतरण के मुद्दे पर भी केन्द्र सरकार पर निशाना साधा था। इससे पहले भाजपा के प्रदेश नेता अकाली दल के नेताओं के नशाखोरी के कारोबार में शामिल होने का आरोप लगाते रहे हैं। सूत्रों का कहना नशे के खिलाफ धरने का ऐलान कर अकाली दल संदेश देना चाहता है कि केन्द्र की मोदी सरकार राज्य में ड्रग्स की तस्करी रोकने में नाकाम रही है। बहरहाल, एक बात साफ है कि दोनों सहयोगी अब सहयोगी धर्म का निर्वाह नहीं कर रहे।

जनता परिवार का विलय

उम्मीद है कि इस साल के शुरू में ही जनता दल परिवार की छह पार्टियों का का विलय हो जाएगा। जद (यू) के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा, झारखंड में आए चुनाव परिणाम के बाद भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के पहले छह पार्टियों का जनवरी में विलय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार तथा राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पार्टी का गठन होगा। राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा, बिहार विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा से मुकाबले के लिए पार्टियों का विलय समय की मांग है।

जानकारों का कहना है कि छह पार्टियां विलय के बाद संयुक्त अभियान की शुरूआत करेगी। वहीं राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि वह और नीतीश कुमार देशभर में गैर भाजपा दलों को एकजुट होने का मजबूत संदेश देना चाहते हैं, ताकि देश की "सर्वधर्म समभाव" वाली छवि कायम रह पाए। दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा सभी धर्मो को साथ लेकर चलने की है। मौजूदा समय में देश की छवि धर्मातरण और दंगों वाले देश के रूप में बन रही है, जो चिंता का विषय है। माना जा सकता है कि चालू साल की कम से कम ये तो बड़ी राजनीतिक घटनाएं रहने वाली हैं।

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