Currency Notes: पहले भारत में चलता था ₹10,000 का नोट, दो बार हुई नोटबंदी, जानें कब?
रिजर्व बैंक ने ₹2000 के नोट को सामान्य चलन से बाहर कर दिया है। मगर यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि एक समय भारत में 10,000 रुपए के नोट भी प्रचलन में थे।

Currency Notes: भारतीय रिजर्व बैंक ने ₹2000 के नोटों को अब चलन से बाहर कर दिया है। फिलहाल लोग अपने बैंक खाते में 2000 के नोट जमा कर सकते हैं या किसी भी बैंक की शाखा में जाकर अपने नोट बदल सकते हैं। 23 मई 2023 से किसी भी बैंक में एक बार में ₹20,000 तक यानी 2000 रूपये के 10 नोट बदले जा सकते हैं। नोट बदली के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क, या कागजात नहीं देने होंगे। रिजर्व बैंक का कहना है कि 30 सितंबर 2023 तक ₹2000 के नोटों को जमा किया या बदला जा सकता है। गौरतलब है कि ₹2000 के नोट को साल 2016 में जारी किया गया था।
वैसे यह पहली या दूसरी बार नहीं है कि जब किसी बड़े नोट को चलन से बाहर कर दिया गया हो। इससे पहले भी कई दफा नोटों से जुड़े फैसले लिये गये थे। लेकिन, क्या आपको पता है कि एक समय ऐसा था जब आजादी के बाद भारत में ₹5,000 और ₹10,000 के नोट भी चला करते थे और उन्हें बाद में चलन से बाहर किया गया था।
कब आया 10 हजार रुपये का नोट
रिजर्व बैंक के अनुसार अब तक देश में सबसे उच्चतम मूल्यवर्ग के नोट जारी हुए, वे ₹10,000 और ₹5,000 के थे। रिपोर्ट के मुताबिक 10 हजार का नोट साल 1938 में छपा था। हालांकि, जनवरी 1946 में इसे विमुद्रीकृत (नोटबंदी) कर दिया गया। फिर 1954 में फिर से ₹1,000 और ₹5,000 के नोट छापे गये। इसके बाद 1978 में फिर से नोटबंदी की गयी।
आजादी से पहले नोटबंदी
आजादी के मात्र एक साल पहले यानि 1946 में ब्रिटिश सरकार ने देश में पहली नोटबंदी की थी। 12 जनवरी 1946 को ब्रिटिश इंडिया के तत्कालीन गवर्नर-जनरल वेवल ने बड़े नोटों को विमुद्रीकृत करने का अध्यादेश जारी किया था। जिसके अनुसार 12 जनवरी 1946 को 500, 1000 और 10000 रुपये के बड़े नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया। इस अध्यादेश के जरिये बताया गया कि इन सभी बड़े नोटों को बैंको से 100 रुपये के नोटों से बदला जायेगा।
उस दौरान भी इस पर काफी हंगामा मचा था। कराची से लेकर दिल्ली और मुंबई तक पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया जो 1000 के नोटों के बदले 800 से 850 रुपये दे रहे थे। हालात इतने खराब थे कि बॉम्बे हाई कोर्ट को यह फैसला देना पड़ा कि लोगों के बड़े नोटों को बिना किसी शर्त के उतनी ही वैल्यू पर बदला जाये।
इंदिरा ने नहीं मोरारजी देसाई ने की नोटबंदी
70 के दशक की शुरुआत में वांचू समिति ने देश और बैंको से कालेधन पर लगाम की सिफारिश की थी। जिसका समाधान नोटबंदी बताया गया। इस मामले पर पूर्व नौकरशाह माधव गोडबोले अपनी किताब 'अनफिनिश्ड इनिंग्ज: रिकलेक्शन एंड रिफ्लेक्शंस ऑफ ए सिविल सर्वेंट' में लिखते है कि तब उस समय के केंद्रीय वित्तमंत्री वाई.बी. चव्हाण ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात की और नोटबंदी को लागू करने के लिए उनकी मंजूरी मांगी। किताब में पीएम गांधी के हवाले से कहा गया है कि तब इंदिरा गांधी ने कहा कि क्या कांग्रेस को और चुनाव नहीं लड़ने है?
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फिर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 से देश में आपातकाल घोषित कर दिया। लेकिन देश भर में बढ़ते विरोध के कारण 1977 में आपातकाल हटाना पड़ा और लोकसभा चुनावों की घोषणा करनी पड़ी। साल 1977 के आम चुनावों में जनता पार्टी को बहुमत मिला और मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने कालाधन पर लगाम लगाने के लिए 14 जनवरी 1978 को रिजर्व बैंक में मुख्य लेखाकार कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी आर. जानकी रमन को उच्च मूल्यवर्ग के नोटों - 1000, 5000 और 10000 रुपये के लीगल टेंडर खत्म करने संबंधी अध्यादेश का मसौदा तैयार करने को कहा।
इसके अध्यादेश का मसौदा तैयार होने के बाद इसे तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी के पास सहमति के लिए भेजा दिया गया। राष्ट्रपति से अध्यादेश को जैसे ही मंजूरी मिली तुरंत 16 जनवरी की सुबह आकाशवाणी पर नोटबंदी का ऐलान कर दिया गया।
कितना प्रतिशत था बड़े नोटों का?
मोरारजी देसाई ने जब नोटबंदी का ऐलान किया तो उसका नागरिकों पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा क्योंकि तब यह बड़े नोट ज्यादा सर्कुलेशन में नहीं थे। रिजर्व बैंक के अनुसार 31 मार्च 1976 तक कुल 7,144 करोड़ की करेंसी चलन में थी। जिसमें 1000 के नोट 87.91 करोड़ थे। यह कुल राशि का मात्र 1.2 प्रतिशत थे। वहीं 5000 के नोट 22.90 करोड़ थे, जिसका प्रतिशत मात्र 0.3 था। जबकि 10,000 के कुल 1260 नोट चलन में थे जिनकी वैल्यू 1.26 करोड़ थी। इस प्रकार इन तीनों बड़े नोटों का कुल सर्कुलेशन 2 प्रतिशत से भी कम था।
जब पीएम मोदी ने किया नोटबंदी का ऐलान
8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 बजे रात में नोटबंदी का ऐलान किया था। इसके तहत 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर कर दिया था। इसके बदले में 500 के नये नोट जारी किये गये थे जबकि 1000 का नोट बंद ही कर दिया गया और 2000 का नया नोट जारी किया गया।
नोटबंदी का ऐलान करते समय सरकार ने कहा कि इसका मकसद काले धन पर अंकुश लगाना, जाली नोटों को रोकना और टेरर फंडिंग को बंद करना है। हालांकि, आरबीआई के मुताबिक उस समय देशभर में 500 और 1000 रुपये के कुल 15.41 लाख हजार करोड़ रुपये के नोट चलन में थे। इनमें 15.31 लाख हजार करोड़ के नोट सिस्टम में वापस आ गये थे।
10 हजार से ज्यादा के नोट जारी नहीं हो सकते?
भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 24 के अनुसार बैंक नोट दो रुपये, पांच रुपये, 10 रुपये, 20 रुपये, 50 रुपये, 100 रुपये, 500 रुपये, 1000 रुपये, 5000 रुपये और 10000 रुपये के मूल्यवर्ग के होंगे। हालांकि ये कीमत दस हजार रुपये से अधिक नहीं हो सकती। बाद में इस सूची में 200 रुपए का नोट भी जुड़ गया।
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