कलाम के जीवन की 10 कहानियां जो आपकी सोच और जीवन को बदल सकती हैं
लखनऊ। स्वर्गीय डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ऐसी सख्शियत थे जिन्हें भूल पाना किसी के भी वश में नहीं है। कलाम ना सिर्फ एक वैज्ञानिक थे बल्कि, लेखक, राजनेता, समाजसेवी भी। कलाम का बच्चों के प्रति जो लगाव था वह किसी से भी छिपा नहीं है। अब्दुल कलाम बच्चों के बीच इतना लोकप्रिय हैं इसकी मुख्य वजह थी उनका खुद बच्चों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना कलाम साहब खुद बच्चों को पत्र लिखकर संदेश भेजते थे।
यही नहीं कलाम साहब जिस तरह से अपने साथ काम करने वाले लोगों के प्रति अपना सबकुछ समर्पित करते थे। कलाम साहब ने देश को वर्ष 2020 तक एक विकसित देश के रूप में स्थापित करने का सपना देखा था। लेकिन इस सपने के पीछे कलाम साहब के जीवन से जुड़ी बेहद प्रेरणादायी घटनाओं जो आपको हमेशा उनके पदचिन्हों पर चलने के लिए प्रेरित करेगी।

अपने सबऑर्डिनेट के बच्चों को ले गये थे घुमाने
थुंबा में अपने साथ काम करे कर्मचारियों के बच्चों को कलाम साहब प्रदर्शनी दिखाने के लिए ले गये थे, क्योंकि कर्मचारी ने अपने बच्चों से घुमाने ले जाने का वादा किया था लेकिन काम की व्यस्तता की वजह से भूल गया था।

पायलट के इंटरव्यू में नंबर कम मिले तो बन गये वैज्ञानिक
अब्दुल कलाम पायलट बनना चाहते थे लेकिन देहरादून एयरफोर्स अकादमी में कुछ नंबर कम मिलने की वजह से उनका चयन नहीं हो सका और वह मिसाइल मैन बन गये। हार से भी हार नहीं मानते थे कलाम साहब।

राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठने से कर दिया था इनकार
आईआईटी वाराणसी के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित कलाम साहब ने उनके लिए अन्य लोगों की अपेक्षा बड़ी कुर्सी पर बैठने से इनकार कर दिया था।

खुद भेजा था बच्चे को हाथ से लिखा ग्रीटिंग कार्ड
कलाम साहब का नमन नारायण नाम के छात्र ने जब उन्हें स्केच बनाकर भेजा तो कलाम साहब ने खुद हाथ से लिखा ग्रीटिंग कार्ड उस बच्चे को भेजकर सरप्राइज दिया था।

राष्ट्रपति बनने के बाद दान कर दी संपत्ति
अब्दुल कलाम ने राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी सारी जमांपूजी एक एनजीओ को दान कर दी थी। यही नहीं उन्होंने अपनी पूरी सैलरी भी दान कर दी थी।

चिड़ियों को नुकसान ना हो इसलिए दीवार पर टूटा कांच लगाने से मना किया
डीआरडीओ में काम करने के दौरान इसकी सुरक्षा के लिए बिल्डिंग की दीवारों पर टूटे कांच लगाने से कलाम साहब ने मना कर दिया था क्योंकि इससे चिड़ियों को नुकसान पहुंचता।

कलाम की अपील से टूटा रिकॉर्ड, बिक गयी 3 करोड़ से अधिक की किताबें
लखनऊ में राष्ट्रीय पुस्तक मेला में कलाम साहब ने बच्चों से अपने घर में एक छोटी लाइब्रेरी बनाने की अपील की जिसके बाद उस दिन फेयर में रिकॉर्ड 3 करोड़ रुपए से अधिक की किताबें बिक गयी थी।

कैबिनेट मंत्री बनने से कर दिया था इनकार
1998 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कलाम साहब को मंत्रीमंडल में शामिल होने के लिए कहा था लेकिन विशेष प्रोजेक्ट्स में व्यस्त होने की वजह से कलाम साहब ने मंत्री बनने से इनकार कर दिया था।

बचपन में बेचते थे अखबार
कलाम साहब बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे, ऐसे में अपनी पढ़ाई को जारी रखने के लिए और परिवार को मदद देने के लिए वो पेपर बेचते थे।

पहले अविवाहित राष्ट्रपति थे कलाम
कलाम साहब एकमात्र देश के ऐसे राष्ट्रपति थे जो विवाहित नहीं थे।












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