Zubeen Garg Funeral: पत्नी-15 बच्चों में से किसी ने नहीं दी जुबीन गर्ग को मुखाग्नि, जानें किसने दी चिता को आग?
Zubeen Garg Funeral Assam Update: 'मायाबिनी रातिर बुकुट...' - ये गीत गूंज रहा था, जब असम का सितारा, जुबीन गर्ग, पंचतत्व में विलीन हुआ। 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में एक स्कूबा डाइविंग हादसे में दुनिया छोड़ने वाले इस महान गायक को मंगलवार (23 सितंबर) को गुवाहाटी के कमरकुची गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग कांच के ताबूत के पास हाथ जोड़े, आंसुओं में डूबी प्रार्थना करती रहीं। हजारों प्रशंसकों की भीड़, उनके आइकॉनिक गीतों की गूंज, और विदाई देते उनके चार प्यारे डॉग्स - ये मंजर हर दिल को झकझोर गया। आइए जानते हैं किसने दी चिता को अग्नि?

Zubeen Garg Antim Sanskar: 15 बच्चे, पत्नी नहीं तो किसने दी चिता को अग्नि?
23 सितंबर की सुबह, कमरकुची एनसी गांव में जुबीन गर्ग का अंतिम संस्कार हुआ। जुबीन के दर्शन को पूरा असम जुटा। उनके गोद लिए 15 बच्चे, पत्नी में से किसी ने भी मुखाग्नी नहीं दी, यह फर्ज निभाया उनकी छोटी बहन पाल्मी बोरठाकुर (Zubeen Sister Palme Borthakur) ने। पारंपरिक असमिया गमोचा में लिपटे जुबीन गर्ग के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी (Zubeen Garg Mukhagni) । इस दौरान उनके भतीजे अरुण गर्ग और करीबी दोस्त राहुल गौतम शर्मा भी मौजूद थे।
Zubeen Garg Children Photos: जुबीन के 15 बच्चे कौन-कौन?
दरअसल, जुबीन गर्ग और पत्नी गरिमा के कोई जैविक बच्चे नहीं थे, लेकिन सिंगर दिल से काफी अमीर मिजाज के थे। जहां से भी गुजरते थे, तो सड़क पर जरूरतमं बच्चों को देखकर काफी उदार हो जाते थे। यही कारण था कि उन्होंने एक-एक कर 15 बच्चों को गोद लिया। हालांकि, अभी तक उनके बच्चों की तस्वीरें सार्वजनिक नहीं देखी गई हैं।
Zubeen Garg Last Wish: 'मेरी मौत पर ये जरूर करना'
अंतिम संस्कार पर हजारों प्रशंसक 'जोय जुबीन दा' के नारे लगाते रहे, गाते रहे उनके गीत 'मायाबिनी रातिर बुकुट' - वही गाना, जिसे जुबीन ने 2019 में कहा था, 'मेरी मृत्यु के समय ये गाना बजेगा।' जुबीन की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ताबूत के पास खड़ी थीं, उनके चेहरे पर वही शून्यता थी, जो पिछले पांच दिनों से उनके दिल में थी। आंसुओं से भरी उनकी प्रार्थना और ताबूत पर रखे हाथ हर किसी को रुला गए। गरिमा ने कहा, 'जुबीन हमेशा अपनी संगीत के जरिए हमारे बीच रहेंगे।' उनके 85 वर्षीय पिता, अल्जाइमर और डायबिटीज से जूझ रहे, भी वहां मौजूद थे, अपने बेटे को आखिरी बार देखते हुए।

जुबीन की यादें अमर!
जुबीन गर्ग के अंतिम संस्कार की शुरुआत गुवाहाटी के अर्जुन भोगेश्वर बरुआ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से हुई। रविवार (21 सितंबर) से ही लाखों प्रशंसक सरुसजई स्टेडियम में अपने चहेते सितारे को श्रद्धांजलि देने उमड़ पड़े। सोमवार (22 सितंबर 2025) रात तक स्टेडियम खुला रहा, क्योंकि भीड़ थमने का नाम नहीं ले रही थी। उनके पार्थिव शरीर को फूलों से सजी एम्बुलेंस में कांच के ताबूत में रखा गया, जिसके सामने उनकी तस्वीर और असमिया गमोचा लहरा रहा था। असम पुलिस ने गन सलामी दी, और पुजारी मंत्रोच्चार के साथ अंतिम रस्में पूरी कर रहे थे।

जुबीन के चार प्यारे कुत्ते - इको, दीया, रैंबो और माया - भी स्टेडियम लाए गए। जब परिवार ने उन्हें ताबूत के पास ले जाकर विदाई दी, तो हर आंख नम थी। ये मंजर सिर्फ शोक का नहीं, बल्कि जुबीन के प्रति उनके अपनों के अटूट प्यार का गवाह था।
Zubeen Garg Postmortem: दूसरा पोस्टमॉर्टम और जांच का साया
मंगलवार (23 सितंबर 2025) सुबह गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जुबीन के पार्थिव शरीर का दूसरा पोस्टमॉर्टम हुआ, जिसमें AIIMS और प्रज्ञानोतिषपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर शामिल थे। सिंगापुर में पहला पोस्टमॉर्टम हो चुका था, जिसमें डूबने को मृत्यु का कारण बताया गया। हालांकि, कुछ प्रशंसकों और संगठनों ने उनकी मृत्यु में साजिश की आशंका जताई, जिसके चलते असम CID जांच कर रही है। गरिमा ने अपने पति के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा (Manager Siddharth Sharma) के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की भावुक अपील की, कहते हुए, 'वो जुबीन के लिए भाई जैसे थे।'
Zubeen Garg Death Reason: असम का सितारा, जिसने छुआ हर दिल
जुबीन गर्ग, जिन्होंने 40 भाषाओं में 38,000 से ज्यादा गाने गाए, सिर्फ असम के नहीं, पूरे देश के दिल की धड़कन थे। 'या अली' से लेकर 'दिल तू ही बता' तक, उनके गीत आज भी गूंजते हैं। 19 सितंबर को सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के लिए गए जुबीन की स्कूबा डाइविंग (Zubeen Garg Scuba Diving) के दौरान हादसे में मृत्यु हुई। गरिमा ने बताया कि उन्होंने लाइफ जैकेट उतार दी थी, और तभी दौरा पड़ने से ये हादसा हुआ।

शोक में डूबा असम, अमर रहेगा जुबीन का नाम
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कमरकुची में 10 बीघा जमीन पर जुबीन की समाधि और स्मारक बनाने की घोषणा की। जोरहाट में भी उनकी राख विसर्जित की जाएगी और वहां दूसरा स्मारक बनेगा। रविवार से मंगलवार तक असम में राजकीय शोक रहा, स्कूल-कॉलेज बंद रहे, और सड़कों पर हजारों लोग अपने 'जुबीन दा' को अलविदा कहने खड़े थे।
जुबीन गर्ग की विदाई सिर्फ एक अंत नहीं, बल्कि उनकी संगीत और प्यार की अमर कहानी है। उनके गीत, उनकी आवाज, और उनके प्रशंसकों का प्यार हमेशा जिंदा रहेगा। क्या आपने कभी जुबीन के किसी गाने को गुनगुनाया है? कमेंट में बताएं....
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