'अब किसी को फतवा जारी करना है तो करे..', गीता पढ़ने का दावा करने वाली उर्फी जावेद ने हिजाब विवाद पर कही ये बात

'अब किसी को फतवा जारी करना है, तो कर दे...', गीता पढ़ने का दावा करने वाली उर्फी जावेद ने हिजाब विवाद पर कही ये बात

मुंबई, 14 फरवरी: कर्नाटक में जारी हिजाब विवाद पर एक्ट्रेस और बिग बॉस की एक्स कंटेस्टेंट उर्फी जावेद ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उर्फी जावेद ने कहा है कि महिलाओं को क्या पहनना है और क्या नहीं पहनना है, ये सिर्फ उकी मर्जी होनी चाहिए। अगर कोई लड़की या महिला पर्दा करना चाहती है, हिजाब पहनना चाहती है, उसे रोकना नहीं चाहिए। खुद के बारे में बात करते हुए उर्फी जावेद ने कहा कि उन्होंने खुद कभी हिजाब नहीं पहना है। इसके साथ ही उर्फी ने यह भी कहा कि कई लोग उन्हें उनके पहनावे और ड्रेस को लेकर फतवा जारी करने की धमकी देते हैं। उर्फी जावेद ने ये बात न्यूज चैनल आजतक को दिए इंटरव्यू में कही है। उर्फी जावेज ने कुछ दिनों पहले दावा किया था कि वो गीता पढ़ रही हैं।

'स्कूल का एक कायदा होता है लेकिन जिनको हिजाब में...'

'स्कूल का एक कायदा होता है लेकिन जिनको हिजाब में...'

उर्फी जावेद ने कहा, ''मुझे हिजाब विवाद के बारे में बात करने में कोई दिक्कत नहीं है। महिलाएं जो चाहे वो पहन सकती हैं। कोई क्या पहनता है, इस बात को लेकर हम उसकी शिक्षा तय नहीं कर सकते हैं। लेकिन फिर भी एक बात जो मुझे समझ में आती है कि स्कूल का अपना एक कायदा होता है लेकिन हिजाब पहनकर वो लड़कियां कुछ गलत नहीं कर रही हैं। मेरे साथ ये बात हुई होती तो मैं तो यही कहती कि आजादी सबके लिए होनी चाहिए। अगर लड़कियां खुद को कवर कर इंपॉवर कर रही हैं तो ठीक है, सालों से औरतों की लड़ाई उनके पहनावे को लेकर चली आ रही है।''

उर्फी बोलीं- 'पर्दा रखने को नीची निगाहों से क्यों देखा जाता है...'

उर्फी बोलीं- 'पर्दा रखने को नीची निगाहों से क्यों देखा जाता है...'

उर्फी जावेद ने आगे कहा, '' मुझे एक बात समझ में नहीं आती है कि पर्दा रखने को नीची निगाहों से क्यों देखा जाता है। अगर पर्दा करना किसी पर थोपी नहीं जा रही है तो ये गलत नहीं है। लड़कियां-महिलाएं अपनी मर्जी से पहनना चाह रही हैं तो ये गलत नहीं है। मेकअप, पोत कर नहीं आ रही हैं। असल श्रृंगार तो उनके अंदर की आजादी से झलकती है।''

'एक ओर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ चल रहा है और दूसरी ओर रोक रहे हैं...'

'एक ओर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ चल रहा है और दूसरी ओर रोक रहे हैं...'

उर्फी जावेद ने कहा, ''मेरी मां हिजाब और पर्दा नहीं मानती थी, इसलिए मैंने भी कभी हिजाब नहीं पहना है। लेकिन मेरी नानी आज भी बुर्का पहनती हैं, लेकिन उनकी ये खुद की मर्जी है। एक और आप बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दे रहे हैं तो आप इस आधार पर किसी बेटी को रोक नहीं सकते हैं, उसने हिजाब क्यों पहना है। तो बेटी को पढ़ने से क्यों रोका जा रहा है।''

उर्फी ने कहा- फतवा जारी करना है तो करें...

उर्फी ने कहा- फतवा जारी करना है तो करें...

उर्फी जावेद ने अपने कपड़ों और काम को लेकर मिल रही धमकियों के बारे में भी बात की। उर्फी जावेद ने कहा, ''कई बार मुझे मेरे समाज के लोग तस्वीरों पर कमेंट पर बुरी-बुरी बातें करते हैं। लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मैं यहां उनको खुझ करने नहीं आई हूं। किसी को मेरे खिलाफ फतवा जारी करना है, तो कर दे। जिसे जो करना है वो करे, लेकिन मैं वही करूंगी और वगी पहनूंगी, जो मेरा मन करेगा। कोई मेरा खर्चा नहीं उठाता है और ना ही कोई मेरी जिंदगी में मदद कर रहा है।

'बिना कुरान-गीता पढ़े लोग, धर्म का ज्ञान दे रहे हैं...'

'बिना कुरान-गीता पढ़े लोग, धर्म का ज्ञान दे रहे हैं...'

उर्फी जावेद ने कहा कि धर्म का हिजाब से कोई लेना-देना नहीं है। यहां लोग अपनी सुविधा के मुताबिक चीजों को बदल देते हैं। ऐसे भी इस देश में धर्म की रखवाली वो लोग कर रहे हैं, जिन्होंने कभी गीता-कुरान नहीं पढ़ी। ऐसे लोगों को ज्ञान देने से पहले सोचना चाहिए। वो अपनी सहूलियत का इस्तेमाल कर समाज में नफरत फैला रहे हैं।

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