Thug Life Review: कमजोर और प्रिडिक्टेबल कहानी का ट्रीटमेंट तगड़ा, फिल्म में कमल हासन का महिमामंडन
फिल्म- ठग लाइफ
कास्ट- कमल हासन, तृषा कृष्णनन और अबिरामी
डायरेक्टर- मणि रत्नम
रेटिंग- 2.5 स्टार्स
कमल हासन के करियर की 234वीं फिल्म रिलीज हो गई है। 'ठग लाइफ' पूरी तरह से उनकी फिल्म है। फिल्म का बज बहुत भयंकर था, मेकर्स ने इसे हर भाषा में प्रमोट भी किया। हालांकि कर्नाटक में फिल्म को लेकर विवाद उठ गया। बज को देखते हुए सुबह-सुबह हम भी फिल्म देखने पहुंचे। लेकिन सुबह का शो था तो करीब 10-15 लोग ही सिनेमाघर में दिखे। कुछ सीन देख उन्होंने मल्टीप्लेक्स को सिंगल स्क्रीन थिएटर बनाने की भी कोशिश की। लेकिन उसे चरम तक नहीं पहुंचा सके।
फिल्म की कहानी की बात करें तो कमल हासन ने शक्तिवेल नामक एक खूंखार गैंगस्टर की भूमिका निभाई है। फिल्म की शुरुआत एक त्रासदी से होती है। एक निर्दोष पत्रकार को उसके गिरोह द्वारा मार दिया जाता है। अपराध बोध से ग्रसित, शक्तिवेल पत्रकार के अनाथ बेटे को गोद ले लेता है। जबकि उस व्यक्ति की बेटी लापता हो जाती है। समय बीतने के साथ, गोद लिया हुआ बेटा बड़ा होकर शक्तिवेल के गिरोह का एक वफादार सदस्य बन जाता है। लेकिन दुश्मन सिर्फ़ प्रतिद्वंद्वी गुटों में ही नहीं छिपे होते। कुछ अप्रत्याशित कोनों से उभर कर सामने आते हैं। वे कौन हैं और वे क्या चाहते हैं? मोटा माटी फिल्म की कहानी यही है।

कहानी के बाद बात आती है फिल्म में एक्टर्स की परफॉर्मेंस की। इसमे हर जगह कमल हासन ही छाए हुए हैं। ट्रेलर में ही इसका आभास हो गया है। बढ़ती उम्र के बाद भी उन्होंने अपने कई एक्शन से कनवेंस करते हैं। फिल्म में उनकी एक लाइन है कि मैं मृत्यु के स्वामी यमराज को हराकर आया हूं। कई बार उनके एक्शन में ये बात दिखती भी है। उनके द्वारा किए गए रोमांटिक सीन भी बड़े कमाल के हैं। कई सीन में उन्हें देखना एक ट्रीट के जैसा है। सिलामबरसन का काम भी देखने लायक है। तृषा और कमल की केमेस्ट्री दिखती है। तृषा ने भी कमाल काम किया है। वो अलग बात है कि उनका स्क्रीन टाइम बेहद कम है। रोहित सराफ और अली फजल भी छोटे रोल में हैं, लेकिन दोनों का काम ठीक सा है। सपोर्टिंग कास्ट ने भी अच्छा काम है।
फिल्म को लिखा मणि रत्नम और कमल हासन ने है। इस फिल्म की कहानी का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि ये प्रिडिक्टबल है। इसमें ये पता चल जाता है कि अब जो हुआ है उसके बाद क्या होगा। कहानी भी काफी कमजोर है। इस वजह से कई जगह आपको थोड़ा बोरियत हो सकती है। आपका मन फोन निकाल कर चालाने का भी हो सकता है। डायरेक्शन की बात करें तो इसमें मणि रत्नम का स्टाइल दिखता है। पिक्चराइजेशन के मामले में फिल्म गजब है। उन्होंने फिल्म का ट्रीटमेंट भी तगड़ा किया है। साउथ की फिल्म है तो उसका स्टाइल भी अलग रहता है। मणि को डायरेक्शन के लिहाज से पूरे नंबर मिलते हैं, लेकिन कमजोर कहानी ने उनका खेल बिगाड़ दिया है।
सिनेमैटोग्राफी रवि के चंद्रन ने की है। उनके वाइड एंगल फ्रेम और कलर पैलेट मजा बांधने का काम करते हैं। भव्यता भी उन्होंने दिखाई है। ए श्रीकर प्रसाद ने फिल्म को एडिट किया है। उनकी कैंची बहुत बढ़िया चली है। जहां जरूरत थी, उस हिसाब से उन्होने फिल्म में कांट छांट की है। दोनों ही के पास लंबा एक्सपीरिएंस हैं। जो उनके इस फिल्म के काम में दिखता है। म्यूजिक ए आर रहमान का है। कुछ गाने तो ऐसे हैं जो आपके कदम थिरका देते हैं। एक चेहरा और चांद के टुकड़े जेहन में भी रह जाते हैं।
कुल जमा फिल्म ऐसी है कि आप इस वीकेंड देख सकते हैं। साउथ सिनेमा के फैन हैं तो आपको ये फिल्म देख लेनी चाहिए। फिल्म में लार्जर दैन लाइफ वाले कई मोमेंट्स हैं। मेरी बात यहीं तक आप भी फिल्म देखिए और अपनी राय बनाइए।












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