'शर्मिंदा हूं, क्योंकि मैं खामोश रहा...', द कश्मीर फाइल्स के इस एक्टर ने क्यों मांगी कश्मीरी पंडितों से माफी
नई दिल्ली, 14 मार्च। कश्मीरी पंडितों के विस्थापन पर बनी फिल्म द कश्मीरी फिल्म को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। फिल्म में कश्मीरी पंडितो पर हुए अत्याचार को दिखाया गया है। फिल्म में अहम किरदार निभा रहे अभिनेता प्रकाश बेलावाड़ी ने कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को लेकर खुलकर बात की है। कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार पर चुप रहने को लेकर प्रकाश ने लोगों से माफी मांगी है। फिल्म के लेखक और निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की प्रकाश ने जमकर तारीफ की है और उनका शुक्रिया अदा किया है कि उन्होंने फिल्म में उन्हें काम करने का मौका दिया।

90 के दशक में प्रकाश पत्रकार थे।
बता दें कि द कश्मीर फाइल्स फिल्म शुक्रवार को रिलीज हुई है और फिल्म को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि एक्टर प्रकाश बेलावाड़ी पत्रकारिता के छात्र रह चुके हैं। प्रकाश ने कहा कि जब कश्मीर में 1990 केमें बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों का पलायन हो रहा था तो मैं पत्रकार था और बतौर पत्रकार रहते मैं इस मुद्दे पर चुप रहा, इसके लिए मैं लोगों से माफी मांगना चाहता हूं।

कश्मीरी पंडितों से माफी मांगी
प्रकाश बेलावाड़ी ने एक वीडियो जारी करके कश्मीरी पंडितों से अपनी चुप्पी के लिए माफी मांगी है। वीडियो में प्रकाश ने कहा कि मैं द कश्मीर फाइल्स फिल्म का हिस्सा होना गर्व की बात है, जब मुझे विवेक अग्निहोत्री ने फिल्म की स्क्रिप्ट भेजी थी, मैं स्क्रिप्ट पढ़कर चौंक गया था क्योंकि तबतक मुझे इस भयावह घटना की विस्तृत जानकारी नही थी कि कैसे इतनी बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों के साथ 1990 में जम्मू कश्मीर में अत्याचार किया गया।

मैं खुद को शर्मिंदा महसूस कर रहा
कश्मीरी पंडितों के मुद्दे पर चुप रहने को लेकर लोगों से माफी मांगते हुए प्रकाश ने कहा मैं खुद को शर्मिंदा महसूस करता हूं, मैं भी खुद को दोषी महसूस करता हूं क्योंकि मैं उस समय पत्रकार था और उस वक्त की घटनाओं को लेकर मैं खुद पर गर्व करता था कि मेरे पास हर बड़े मुद्दे की जानकारी थी, लेकिन ऐसा नहीं था। मैं लंबे समय तक इस मुद्दे पर उदासीन रहा, इसके लिए मैं उस पूरे समुदाय से माफी मागता हूं।

लोगों को न्याय मिलना चाहिए
प्रकाश कहा कि मैं विवेक अग्निहोत्री जी को शुक्रिया अदा करना चाहता हूं और उनके प्रति आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि उन्होंने इस मुद्दे पर इतनी सघन रिसर्च की और इस मुद्दे पर फिल्म बनाने का साहस दिखाया और इस सच को दुनिया के साने लेकर आए। मैं हर भारतीय से अपील करता हूं कि वह इस फिल्म को देखे और जाने कि उस वक्त हमारे देश में क्या हुआ था। हमे यह जरूर कहना चाहिए कि उन लोगों को भी न्याय पाने का अधिकार है और उन्हें यह न्याय मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने साथी पत्रार आरके मुत्थू का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने उनसे इस वीडियो को शेयर करने के लिए कहा था।












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