Tere Ishk Mein Review: और..2 घंटे 47 मिनट की कहानी देख अंत में मर जाता है दर्शक, रिव्यू
Tere Ishk Mein Movie Review in Hindi: शुक्रवार का दिन खुशी लेकर आता है, वो इसलिए क्योंकि मॉर्डन मानव सभ्यता में इस दिन से वीकेंड की शुरुआत होती है। सुबह से ही मूड चंगा रहता है, मस्त होकर दफ्तर जाता है और सुकून भरे दिनों की याद सजाता है। इस दिन बॉलीवुड (हिंदी सिनेमा) वाले फिल्म रिलीज करते हैं। अगर आप इनकी फिल्म सुबह सुबह देखने जा रहे हैं तो फिर यही दिन थोड़ा चिंताजनक बन जाता है। जैसे कि आज मेरे साथ हुआ, एक्साइटेड होकर फिल्म देखने पहुंचे। फिर जो हुआ और जैसे हुआ, वो सब आपके सामने मिनट दर मिनट बताता हूं। इसमें एक दर्शक की टीस भी हो सकती है।

फ्रेम खुलता है और आसमान में दिखता है फाइटर जेट तेजस, उसमें बैठा हुआ पायलट। वो गुस्से में, नीचे से उसे ऑर्डर दिया जाता है कि बेस पर लौटे, लेकिन वो अपने दिल की सुनता है। उसे आसमान में दुश्मन दिखता है। जिसको वो उल्टे पांव लौटने पर मजबूर कर देता है। ख़ैर ये कहानी का दूसरा सिरा, पहला ये है कि लड़का डूसू (दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन) का अध्यक्ष है। भयंकर गुस्से वाला है। कोई उसके सामने चुनाव भी लड़ता है तो पीटता है, दौड़ा दौड़ा कर। ऐसे ही एक दिन वो यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम में जा पहुंचता है। जहां एक मुक्ति नाम की लड़की अपनी PHD की प्रजेंटेशन देती है।
वो साइकोलॉजी की स्टूडेंट है। उसका टॉपिक ऐसे लोगों पर रहता है, जो अपने गुस्से पर काबू पाते हैं सुधर जाते है। फिर वही होता है, लड़की उस गुस्से वाले लड़के को सुधारने का बीड़ा उठाती है। ताकि उसका काम हो जाए। वो हमेशा उस लड़के से कहती है मैं अपना काम कर रही हूं। लेकिन लड़के को प्यार हो जाता है...एकतरफा। जिसमें वो सबकुछ तबाह करना चाहता है। लेकिन एक दिन जिंदगी ऐसी करवट लेती है कि वो लड़का एयरफोर्स का बेस्ट पायलेट बन जाता है। इतना पढ़कर आपको ये कहानी समझ नहीं आई होगी। ऐसे ही फिल्म देखते देखते मुझे भी खूब मेहनत करनी पड़ी थी। ख़ैर आप लोगों को आगे की कहानी फिल्म देखने पर पता चलेगी।
किरदारों में जान फूंकते एक्टर्स
धनुष ने शंकर के किरदार को काफी अच्छे तरीके से निभाया है। शंकर साउथ का लड़का होने के बाद भी हिंदी अच्छी बोलता है। इमोशन और एग्रेशन दोनों ही उन्होंने बेहतरीन ढंग से दिखाए हैं। गुस्से में अधिकतर एक्टर्स को लाउड होते देखा है, लेकिन वो उन्होंने अपने आपको ओवर लाउड नहीं किया है। पावरफुल डायलॉग्स को भी सही तरीके से डिलेवर किया है। कृति सेनन ने मुक्ति के रोल को अच्छे से मुक्ति दी है। उनका दिखाया हर एक इमोशन भी अच्छा है। ये कहा जा सकता है कि मिमी के बाद कृति ने ढंग का काम किया है। पिता के रोल में प्रकाश राज का काम भी अच्छा है।
शंकर के दोस्त के रोल में देव यानी प्रियांशु पेन्युली ने स्क्रीन स्पेस के साथ जस्टिस किया है। फिल्म में रांझाणा के मुरारी यानी जीशान अय्युब की भी एंट्री होती है, वो फिल्म को अलग लेवल पर ले जाती है। अकेले जीशान ने फिल्म को एक नया मोड़ देते हैं। 10 मिनट का रोल काफी इम्पैक्ट फुल है। दूसरी तरफ विनीत सिंह भी सपोर्टिंग रोल में अच्छे दिखे हैं। कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि परफॉर्मेंस में सभी एक्टर्स ने अपना 100 प्रतिशत दिया है।
एक्टर्स की मेहनत पर पानी फेरती कहानी
तेरे इश्क में को हिमांशु शर्मा और नीरज यादव ने मिलकर लिखी है। दो लोग मिलकर भी 2 घंटे 47 मिनट की कहानी को कस नहीं पाए। कसने की बात छोड़िए समझ ही नहीं पाए कि आखिर दर्शक को दिखाना क्या है। जो लड़की पहले जिस लड़के से प्यार नहीं करती। लड़का उसे भूल जाता है, फिर वो लड़की अचानक उससे कैसे बेइंतहा मोहब्बत कर सकती है? साथ ही वो लड़के को ही गिल्ट में डाल रही है? ये किस जमाने की कहानी है, क्या दिखाना चाहते हैं समझ ही नहीं आता है।
लेखन के लेवल पर फिल्म बुरी तरह फेल है। यकीन मानिए कहानी देखते-देखते खुद के बाल खींचने का मन करता है। फिल्म के कुछ डायलॉग्स अच्छे हैं, इसकी तारीफ होनी चाहिए। क्लाइमैक्स भी अच्छा है, लेकिन कहानी की वजह से मर जाता है। फिल्म के गाने भी बहुत अच्छे हैं, वो यादगार रहते हैं। डायरेक्शन भी आनंद एल राय ने बेहतरीन किया है। टेक्निकल लेवल पर फिल्म बहुत खूबसूरत है। लेकिन हीरो यानी कहानी ने पूरा मजा खराब कर दिया।
सौ बात की एक बात
ख़ैर इस फिल्म पर इतना कहना चाहूंगा कि रांक्षणा समझकर आप इसे देखने न जाएं। नहीं तो आप निराश नहीं बहुत निराश और हताश हो जाएंगे। एकतरफा आशिक भी इस कहानी देखने के बाद हो सकता है कि खून की उल्टियां कर बैठें। इतना कहा जा सकता है कि अच्छी एक्टर्स को लेकर खराब कहानी पर फिल्म कैसे बनाना है, ये आपको तेरे इश्क में देखकर समझ आ सकता है।












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