घर नहीं मिला तो सड़कों और मॉल्स में काटना पड़ता था वक्त, स्वरा भास्कर को याद आए अपने स्ट्रगल के दिन

एक वक्त पर स्वरा भास्कर को लोग आवारा समझते थे और उन्हें रहने के लिए घर तक नहीं मिला। किसी तरह एक्ट्रेस ने इस मुश्किल वक्त को मात देकर अपनी पहचान बनाने में कामयाबी हासिल की।

मुंबई, 16 सितंबर: बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर अपने बेबाक अंदाज के लिए अकसर सुर्खियों में बनी रहती हैं। किसी भी मुद्दे पर अभिनेत्री अपनी राय सीधे तौर पर रखती हैं। लेकिन इतनी बेबाक, मुंहफट और बोल्ड स्वरा को देखकर अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता कि एक वक्त पर उन्होंने मुश्किल भरे दिन काटे हैं। जी हां! आज इंडस्ट्री में अलग ही मुकाम हासिल करने वाली स्वरा भास्कर ने एक वक्त पर दर-दर की ठोकरें खाई हैं। एक वक्त पर इंडस्ट्री में रहना स्वरा के लिए काफी मुश्किल होता चला गया और एक्ट्रेस ने इस मुश्किल वक्त को मात देकर अपनी पहचान बनाने में कामयाबी हासिल की।

बेबाक हैं स्वरा

बेबाक हैं स्वरा

अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने तनु वेड्स मनु, रांझणा और वीरे दी वेडिंग जैसी फिल्में कर दर्शकों के दिलों पर राज किया है। स्वरा हमेशा से ही नेपोटिज्म के खिलाफ बेबाकी से अपनी आवाज उठाती रही हैं।

2008 में किया मुंबई का रुख

2008 में किया मुंबई का रुख

वो साल 2008 था, जब अपने सपनों को उड़ान देने स्वरा भास्कर दिल्ली से मुंबई आई थीं। अब स्वरा भास्कर ने इस बात का खुलासा किया कि जब वे मुंबई आईं, तो उन्हें कितनी परेशानियों का सामना करा पड़ा।

जब नसीब नहीं हुआ अपना घर

जब नसीब नहीं हुआ अपना घर

'मैशबल इंडिया' संग बातचीत में स्वरा ने बताया कि काफी दिनों तक तो मुंबई में उन्हें रहने के अपना घर तक नसीब नहीं हुआ। एक्ट्रेस ने खुलासा किया कि किराए पर घर नहीं मिलने की वजह से उन्हें एक दोस्त के साथ रहना पड़ा। फिर एक वक्त पर तो वे गोरेगांव में 6 लोगों के साथ वन बेडरूम किचन के अपार्टमेंट में भी रही हैं।

बोरिया बिस्तर बांधकर आई थीं मुंबई

बोरिया बिस्तर बांधकर आई थीं मुंबई

स्वरा कहती हैं कि मैं अपना बोरिया बिस्तर लेकर मुंबई आई थी। मैं शाहरुख खान जैसा बनना चाहती थीं। मेरे पेरेंट्स से मुझे एक बेंडिंग रोल मिला था इसके अलावा मेरे पास एक संदूक था। मैं यही सब लेकर मुंबई पहुंची थी।

मां ने दिया था सामान भरा संदूक

मां ने दिया था सामान भरा संदूक

स्वरा भास्क ने बताया कि मेरी मां ने मेरे लिए जो भी रखा था, वही सब भरकर मुझे संदूक में दे दिया। उसमें बर्तन, प्रेशर कुकर और पॉट्स थे। उस संदूक में इतना सामान था, जिसकी जरूरत पूरी जिंदगी मुझे पड़ती।

'लोग आवारा समझते थे'

'लोग आवारा समझते थे'

स्वरा बताती हैं कि मुंबई पहुंचने पर उन्हें किराए पर घर ढूंढना काफी मुश्किल हो गया था। लोग उन्हें और उनकी सहेली को आवारा लड़की समझते थे। लोग मकान किराये पर देने से पहले नियमों की लिस्ट समझाने लगते थे।

मॉल्स और सड़कों पर बीतता था वक्त

मॉल्स और सड़कों पर बीतता था वक्त

स्वरा भास्कर अपने स्ट्रगल के दिनों का दर्द बयां करते हुए बताती हैं कि बहुत ढूंढने के बाद गोरेगांव में एक घर मिला, जो बनकर तैयार भी नहीं हुआ था। एक महीने तक एक्ट्रेस को किसी ऑफिस में रहना पड़ा, जिसे सुबह 9 बजे से पहले खाली करना होता था, और एंट्री शाम 6 बजे के बाद ही मिलती थी। इस बीच वे मॉल्स और सड़कों पर बैठा करती थीं।

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