Sushant Singh Rajput की मौत के 66 महीने बाद भी अनसुलझे हैं ये 5 बड़े सवाल, क्यों CBI नहीं दे पाई जवाब?
Sushant Singh Rajput: 14 जून 2020- ये तारीख बॉलीवुड और देश के करोड़ों फैंस के लिए आज भी एक गहरे सदमे की तरह है। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की असमय मौत ने न सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री को झकझोर कर रख दिया था बल्कि समाज, मीडिया और न्याय व्यवस्था के सामने भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
मार्च 2025 में CBI ने दी थी क्लोजर रिपोर्ट
आपको बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के करीब 5 साल बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मार्च 2025 में अपनी क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी थी। जानकारी के अनुसार सीबीआई ने अपनी जांच में बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती को पूरी तरह क्लीन चिट दे दी है।

रिया चक्रवर्ती को मिली क्लीन चिट
एजेंसी का कहना है कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे ये साबित हो कि रिया चक्रवर्ती ने सुशांत सिंह राजपूत को बंधक बनाया, धमकाया या उन्हें सुसाइड करने के लिए उकसाया था। क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर देने के बाद भी आज तक कई ऐसे सवाल हैं जो सुशांत की मौत को लेकर रहस्यमयी बने हुए हैं।
21 जनवरी को सुशांत सिंह राजपूत की बर्थ एनिवर्सरी
-आज यानी 21 जनवरी को दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की बर्थ एनिवर्सरी है। आइए इस खास मौके पर आपको बताते हैं सुशांत की मौत से जुड़े उन 5 बड़े सवालों के बारे में जिनके जवाब आज तक नहीं मिल पाए हैं।
-आपको बता दें कि लेख किसी निष्कर्ष पर पहुंचने का दावा नहीं करता है बल्कि उन 5 प्रमुख सवालों को सामने रखता है, जो अब भी लोगों के मन में उठते हैं।
सुशांत की मौत को लेकर आज भी अनसुलझे हैं ये 5 बड़े सवाल
1. क्या सुशांत की मानसिक स्थिति को सही ढंग से समझा गया था?
-जांच के दौरान ये बात सामने आई थी कि सुशांत सिंह राजपूत डिप्रेशन से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। लेकिन सवाल यह है कि क्या उनकी मानसिक स्थिति का पूरा और निष्पक्ष आकलन किया गया था?
-क्या उनका इलाज समय पर और पर्याप्त था? क्या आसपास के लोग उनकी परेशानी की गंभीरता को समझ पाए थे? आज भी फैंस ये जानना चाहते हैं कि क्या मदद के और रास्ते खुले थे जिन्हें समय रहते अपनाया जा सकता था।
2. मौत से पहले के आखिरी घंटों में क्या-क्या हुआ था?
-सुशांत सिंह राजपूत की मौत से पहले की गतिविधियों को लेकर कई जानकारियां सामने आई थीं लेकिन इस सावल का कभी जवाब नहीं मिला कि आखिरी बार उनसे कौन-कौन मिलने आया था? मौत से एक दिन पहले सुशांत का मूड और व्यवहार कैसा था?
-सुशांत सिंह राजपूत के फोन कॉल्स और मैसेजेस का पूरा संदर्भ क्या था? इन सवालों के जवाब अलग-अलग बयानों और रिपोर्ट्स में बिखरे हुए नजर आते हैं, जिससे संदेह पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया।
3. क्या मौत की जांच शुरू में सही दिशा में हुई थी?
-सुशांत सिंह राजपूत की मौत के शुरुआती जांच को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। क्या सभी पहलुओं पर बराबरी से जांच की गई? क्या किसी संभावना को बहुत जल्दी खारिज कर दिया गया था?
-अलग-अलग एजेंसियों के आने से जांच को स्पष्टता मिली या भ्रम? यही वजह रही कि ये मामला सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं रहा बल्कि सिस्टम पर भरोसे की परीक्षा बन गया था।

4. इंडस्ट्री प्रेशर और नेपोटिज्म की बहस कहां तक सही थी?
-सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म, गुटबाजीऔर आउटसाइडर्स के साथ भेदभाव पर खुलकर चर्चा हुई थी। हालांकि सवाल ये है कि क्या इंडस्ट्री का दबाव उनकी निजी जिंदगी और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा था?
-क्या प्रोफेशनल संघर्ष को निजी संघर्ष से जोड़कर जरूरत से ज्यादा सरल बना दिया गया था? ये बहस आज भी अधूरी है क्योंकि इंडस्ट्री के भीतर के हालात पर कोई ठोस और सर्वमान्य निष्कर्ष सामने नहीं आ पाया।
5. क्या सुशांत सिंह राजपूत की विरासत को सही सम्मान मिला?
-सुशांत सिंह राजपूत सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, वह एक विचारशील, जिज्ञासु और विज्ञान में रुचि रखने वाले इंसान थे। NASA, अंतरिक्ष विज्ञान, किताबें और सामाजिक मुद्दों में उनकी दिलचस्पी जगजाहिर थी। आज सवाल ये है कि क्या उनकी पहचान सिर्फ विवादों तक सीमित कर दी गई?
-क्या उनकी फिल्मों, विचारों और सपनों को उतना महत्व मिला, जितना मिलना चाहिए था? कई फैंस मानते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत की असली विरासत उनके काम और सोच में थी, जो शोर-शराबे में कहीं दब गई।
'एक अधूरी कहानी, जो आज भी झकझोरती है'
-सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर कानूनी और आधिकारिक स्तर पर जो भी निष्कर्ष निकाले गए हों, भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर कई सवाल आज भी जीवित हैं। ये मामला हमें मानसिक स्वास्थ्य, संवेदनशीलता और इंसान के भीतर चल रही लड़ाइयों को गंभीरता से समझने की जरूरत याद दिलाता है।
-शायद सभी सवालों के जवाब कभी पूरी तरह न मिल पाएं लेकिन सुशांत सिंह राजपूत की कहानी ये जरूर सिखाती है कि सफलता के पीछे छिपी चुप्पी को सुनना भी उतना ही जरूरी है।












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