Rocketry: 13 दिनों में आर माधवन की फिल्म ने चलाया जादू, IMDb से मिली 9.3 की जबरदस्त रेटिंग

'रॉकेट्री द नांबी इफेक्ट' हमारे देश के एक ऐसे साइंटिस्ट नांबी नारायण की कहानी है, जिसने देश को लिक्विड फ्यूल रॉकेट टेक्नॉलोजी का वरदान दिया है। आर माधवन की इस फिल्म के हिंदी वर्जन ने 13 दिनों में 27 करोड़ रुपये कमाए हैं।

मुंबई, 14 जुलाई: बॉलीवुड एक्टर आर माधवन की फिल्म 'रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट' की इन दिनों हर तरफ चर्चा हो रही है। फिल्म को दर्शकों का अच्छा खासा रिस्पॉन्स मिल रहा है। अभी कुछ दिनों पहले ही फिल्म रिलीज हुई है। हालांकि, रिलीज से पहले ही फिल्म को लेकर काफी बज बना रहा। 'रॉकेट्री द नांबी इफेक्ट' हमारे देश के एक ऐसे साइंटिस्ट नांबी नारायण की कहानी है, जिसने देश को लिक्विड फ्यूल रॉकेट टेक्नॉलोजी का वरदान दिया है। आर माधवन की इस फिल्म के हिंदी वर्जन ने 13 दिनों में 27 करोड़ रुपये कमाए हैं। इसके साथ ही फिल्म को आईएमडीबी पर 9.3 की जबरदस्त रेटिंग भी मिली है।

माधवन का डायरेक्शनल डेब्यू

माधवन का डायरेक्शनल डेब्यू

बताते चलें कि इस फिल्म से माधवन ने अपना डायरेक्शनल डेब्यू किया है। फिल्म एक जुलाई को कई भाषाओं में रिलीज हुई थी। इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, हिंदी बेल्ट में ही फिल्म ने 27 करोड़ कमा लिए। उम्मीद जताई जा रही है कि फिल्म वीकेंड पर अच्छा-खासा बिजनेस करेगी।

नांबी नारायण ने झेला दर्द

नांबी नारायण ने झेला दर्द

फिल्म में साफ तौर पर दिखाया गया है कि कैसे नांबी नारायण पर जासूसी और देशद्रोह के झूठे आरोप लगाए गए। साथ ही उनके द्वारा झेले गए दर्द को भी दिखाया गया है।

क्या है फिल्म की कहानी?

क्या है फिल्म की कहानी?

बताते चलें कि इसरो के पूर्व वैज्ञानिक और एयरोस्पेस नांबी नारायण की लाइफ पर बेस्ड फिल्म की कहानी फ्लैशबैक में चलती है। यहां मुख्य किरदार नांबी नारायण एक चैनल पर इंटरव्यू के दौरान सुपरस्टार शाहरुख खान को अपनी पूरी कहानी सुनाते हुए दिख रहे हैं।

4-5 सालों से जी रहे नांबी का दर्द

फिल्म में साफ तौर पर दिखाया गया है कि कैसे नांबी नारायण पर जासूसी और देशद्रोह के झूठे आरोप लगाए गए। साथ ही उनके द्वारा झेले गए दर्द को भी दिखाया गया है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि आर माधवन एक तरह से नांबी नारायण का दर्द बीते 4-5 सालों से जी रहे हैं।

अब्दुल कलाम ने भी किया साथ काम

अब्दुल कलाम ने भी किया साथ काम

फिल्म की कहानी शुरू होती है नांबी नारायण की जवानी से। विक्रम साराभाई एक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक के हुनर को पहचानते हैं। इस बीच ए पी जे अब्दुल कलाम को भी साथ काम करते देखा जा सकता है। नांबी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में पढ़ने जाते हैं। नासा में नौकरी भी पा लेते हैं। लेकिन इसके बाद नासा से कहीं कम वेतन देने वाले इसरो में लौट आते हैं।

इंटरव्यू के जरिये बढ़ती है कहानी

नांबी उपग्रहों में ले जाने वाला रॉकेट विकसित कर रहे हैं। वे इसमें कामयाब भी हो जाते हैं। वीआई एएस नाम के इस रॉकेट की टेस्टिंग भी सफल होती है। ये रॉकेट ही आज तक इसरो में भेजे जाने वाले उपग्रहों को अंतरिक्ष में ले जा रहा है। अब इंटरव्यू के बहाने ये पूरी फिल्म आगे बढ़ती है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+