Stray Dogs पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर Raveena Tandon ने दिया बड़ा बयान, जानें किसे ठहराया जिम्मेदार?
Raveena Tandon on Stray Dogs: दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने के सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया है। कुत्तों के प्रति अपने प्यार के लिए मशहूर बॉलीवुड एक्ट्रेस रवीना टंडन ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी है।
उन्होंने इस समस्या का ठीकरा स्थानीय निकायों पर फोड़ा और नसबंदी व टीकाकरण की कमी को इसका बड़ा कारण बताया। यह खबर X पर वायरल हो रही है। आइए, विस्तार से जानें रवीना ने आगे और क्या कहा?

रवीना का तीखा बयान: 'कुत्ते नहीं, निकाय जिम्मेदार'
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रवीना ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अपनी राय जाहिर की। उन्होंने कहा, 'जहां आवारा कुत्तों की आबादी बढ़ी है, वहां इन बेचारे कुत्तों को दोष देना गलत है। इसका असली कारण स्थानीय निकायों की नाकामी है, जो नसबंदी और टीकाकरण अभियान को ठीक से नहीं चला रहे।'
रवीना ने आगे कहा, 'अगर नसबंदी अभियान सफल होता और इसके लिए पैसा व बुनियादी ढांचा सही तरीके से लगाया जाता, तो हम इस स्थिति तक नहीं पहुंचते। स्थानीय निकाय अपने क्षेत्र के आवारा कुत्तों के लिए जिम्मेदार हैं। नसबंदी आज की सबसे बड़ी जरूरत है।'
सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश
11 अगस्त 2025 को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों की समस्या को 'बेहद गंभीर' बताते हुए सख्त आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि 8 हफ्तों के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर आश्रय स्थलों में रखा जाए। कोर्ट ने साफ किया कि कोई भी कुत्ता सड़कों, कॉलोनियों या सार्वजनिक स्थानों पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार, MCD, और NDMC को 5,000 कुत्तों के लिए आश्रय स्थल बनाने और नसबंदी व टीकाकरण के लिए पर्याप्त कर्मचारी तैनात करने का निर्देश दिया। साथ ही, एक हेल्पलाइन शुरू करने को कहा, जहां कुत्तों के काटने की शिकायत दर्ज हो, और 4 घंटे के भीतर कुत्ते को हटाया जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि बाधा डालने वालों पर अवमानना की कार्रवाई होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई 2025 को टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें रेबीज और कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं का जिक्र था। 2025 में दिल्ली में 35,000 से ज्यादा कुत्तों के काटने के मामले और 54 रेबीज से मौतें दर्ज हुईं। 6 साल की बच्ची चावी शर्मा की रेबीज से मौत ने कोर्ट को झकझोरा। कोर्ट ने कहा, 'बच्चों और बुजुर्गों को किसी भी कीमत पर रेबीज का शिकार नहीं बनने दे सकते।'
रवीना का इमोशनल कनेक्शन
रवीना टंडन, जो पशु कल्याण के लिए जानी जाती हैं, ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने 'वेलकम टू द जंगल' के सेट से बचाई गई एक इंडी कुत्ती 'जोया' को अपने परिवार में शामिल करने की बात कही। उन्होंने PETA इंडिया का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने जोया का टीकाकरण और नसबंदी की। रवीना ने लिखा, 'वह सबसे मिलनसार बच्ची है, जिसे दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस ने भी खूब प्यार दिया।'
पशु संगठनों का विरोध
PETA इंडिया और FIAPO ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को 'अमानवीय' और 'अवैज्ञानिक' बताया। PETA की डॉ. मिनी अरविंदन ने कहा, '10 लाख कुत्तों को आश्रय में रखना असंभव है। यह रेबीज नियंत्रण को बिगाड़ेगा और कुत्तों के लिए दुखदायी होगा।' FIAPO की भारती रामचंद्रन ने कहा, 'नसबंदी और टीकाकरण ही एकमात्र वैज्ञानिक समाधान है।'
दिल्ली में कुत्तों का आतंक: आंकड़े चौंकाने वाले!
- दिल्ली में करीब 10 लाख आवारा कुत्ते हैं, जिनमें से 4.7 लाख की नसबंदी हुई है।
- 2025 में 35,000+ कुत्तों के काटने के मामले और 54 मौतें।
- रेबीज एक घातक बीमारी है, जो बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक है।
रवीना की फिल्मी दुनिया
रवीना हाल ही में 'घुड़चढ़ी' में नजर आई थीं और अब 'वेलकम टू द जंगल' में दिखेंगी, जो निर्माणाधीन है। लेकिन उनकी पशु प्रेमी छवि इस बयान से और मजबूत हुई है।
क्या होगा आगे?
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सार्वजनिक सुरक्षा के लिए अहम है, लेकिन आश्रय स्थलों की कमी और नसबंदी की धीमी रफ्तार चुनौती है। रवीना का बयान इस बहस में नया रंग लाया है। क्या स्थानीय निकाय अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे, या यह फैसला विवादों में फंस जाएगा? यह समय बताएगा। आप क्या सोचते हैं? क्या रवीना का स्थानीय निकायों को जिम्मेदार ठहराना सही है, या सुप्रीम कोर्ट का फैसला जरूरी था? कमेंट्स में अपनी राय शेयर करें!
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