किस मुश्किल में फंसे थे Rajesh Khanna? कैसे कामयाब होते गए Amitabh Bachchan? प्रेम चोपड़ा ने बताया सच
Prem Chopra: हिंदी सिनेमा के लिजेंड्री एक्टर प्रेम चोपड़ा ने हाल ही में फिल्म इंडस्ट्री के उस दौर को याद किया है, जब स्टारडम का समीकरण तेजी से बदल रहा था। हिंदी फिल्मों में मदार विलेन का किरदार निभाने वाले प्रेम चोपड़ा ने खुलासा किया है कि कैसे एक समय पर सुपरस्टार्स के जीवन में उतार चढ़ाव आते थे और कोई दूसरा अभिनेता सफल हो जाता था।
बदलते दौर की कहानी, जब सुपरस्टार भी पड़ गए पीछे
प्रेम चोपड़ा ने खुद बताया कि ये वह समय था जब एक तरफ राजेश खन्ना का करियर बर्बाद हो रहा था जबकि दूसरी तरफ अमिताभ बच्चन तेजी से सफलता की नई ऊंचाइयों को छू रहे थे। प्रेम चोपड़ा ने बताया कि कैसे राजेश खन्ना गायब हुए और अमिताभ बच्चन स्टार बनकर उभरे।

शोहरत से संघर्ष तक: राजेश खन्ना का मुश्किल दौर
-प्रेम चोपड़ा ने इंटरव्यू में बताया कि स्टारडम जितनी तेजी से सिर चढ़ता है, उतना ही कठिन उसका उतरना होता है। उन्होंने कहा कि राजेश खन्ना ने भले ही अपने संघर्ष को खुलकर जाहिर नहीं किया लेकिन उनके करीबी लोगों को ये साफ महसूस होता था कि वह अंदर से टूट रहे थे।
-प्रेम चोपड़ा ने कहा- जो इंसान कभी इंडस्ट्री का सबसे बड़ा सितारा रहा हो, उसके लिए अचानक उस मुकाम से नीचे आना बेहद मुश्किल होता है। ये बदलाव केवल करियर तक सीमित नहीं रहता बल्कि मानसिक तौर पर भी गहरा असर छोड़ता है।
आदतों में आया बदलाव, बढ़ गई शराब की लत
इस मुश्किल दौर का असर राजेश खन्ना की निजी जिंदगी पर भी पड़ाथा। प्रेम चोपड़ा ने खुलासा किया कि पहले जहां राजेश खन्ना कभी-कभार शराब पीते थे, वहीं बाद में उनकी ये आदत बढ़ती चली गई थी। उन्होंने बताया कि जब करियर में गिरावट आती है तो कई कलाकार ऐसे सहारों की ओर झुक जाते हैं, जो उनकी स्थिति को और ज्यादा खराब कर देते हैं। राजेश खन्ना के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।
अमिताभ बच्चन बदलाव को अपनाकर बने महानायक
-जहां एक ओर राजेश खन्ना इस बदलाव से जूझ रहे थे, वहीं अमिताभ बच्चन ने समय के साथ खुद को ढाल लिया। प्रेम चोपड़ा के अनुसार, यही बिग बी की सफलता का सबसे बड़ा कारण बना था।
-प्रेम चोपड़ा ने बताया कि अमिताभ बच्चन ने इस सच्चाई को स्वीकार किया था कि वह हर फिल्म में पारंपरिक हीरो की भूमिका नहीं निभा सकते। इसके बजाय उन्होंने ऐसे किरदारों को चुना जो कहानी में मजबूत और प्रभावशाली हों, भले ही वेग मुख्य नायक की पारंपरिक छवि में फिट न बैठते हों।
बदलते समय के साथ खुद को ढालना ही असली जीत
-प्रेम चोपड़ा की बातों से ये साफ होता है कि फिल्म इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए केवल स्टारडम ही काफी नहीं होता बल्कि समय के साथ खुद को बदलना भी जरूरी होता है।
-राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन की कहानी इस बात का जीता-जागता उदाहरण है, जहां एक सुपरस्टार बदलाव के दबाव में टूटता नजर आया, वहीं दूसरा उसी बदलाव को अपनाकर 'बॉलीवुड का महानायक बन गया।













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