'इरफान खान ने कहा था मैं मौत को अपने पास आते देख सकता हूं...; दोस्त को याद कर भावुक हुए नसीरुद्दीन शाह
'इरफान खान ने कहा था मैं मौत को अपने पास आते देख सकता हूं...; दोस्त को याद कर भावुक हुए नसीरुद्दीन शाह
मुंबई, 06 दिसंबर: बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और दिवंगत अभिनेता इरफान खान बहुत अच्छे दोस्त थे। नसीरुद्दीन शाह ने दिवंगत इरफान खान के साथ अपनी बातचीत को याद किया है। अप्रैल 2020 में इरफान खान की एक कैंसर की बीमारी की वजह से मौत हो गई थी। एक नए इंटरव्यू में नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि इरफान 'लगभग दो साल से जानते थे कि यह होने वाला था'। नसीरुद्दीन शाह ने कहा, 'इरफान ने मुझे कहा था कि मैं मोत को अपे पास आते देख सकता हूं।' नसीरुद्दीन शाह और इरफान खान ने मकबूल (2003) और 7 खून माफ (2011) सहित कई फिल्मों में एक साथ काम किया था। इरफान का पिछले साल 53 साल की उम्र में कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद निधन हो गया था।

'इरफान को 2 सालों से पता था कि ये होने वाला है...'
इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में नसीरुद्दीन शाह ने इरफान खान के निधन पर बात की। नसीरुद्दीन शाह ने कहा,''यह एक अनोखी बात थी क्योंकि इरफान को लगभग दो साल से पता था कि यह होने जा रहा है। मैंने उनसे कई बार फोन पर बात की, तब भी जब वह लंदन के अस्पताल में थे। यह आश्चर्यजनक था और यह एक वास्तविक सबक था कि कैसे उन्होंने इससे निपटा। इरफान मुझे कहते थे, 'मैं देख रहा हूं कि मौत मेरे पास आ रही है और कितने लोगों को वह मौका मिलता है?'

'यह एक भयानक नुकसान था...'
नसीरुद्दीन शाह ने आगे कहा, ''इरफान की बातों को सुनकर ऐसा लगता था कि जैसे वह अपनी मौत को आते देख उसका स्वागत कर रहा है। इस गंभीर संकट को अपनी ओर आते हुए देखने में बहुत हिम्मत लगती है। बेशक, यह एक भयानक नुकसान था। लेकिन यह हमारे हाथ में नहीं था। यह सिर्फ आपकी शारीरिक मशीनरी बंद हो रही थी। जि पर आपका कोई नियंत्रण नहीं था।"

'मौत के बारे में दिन-रात सोचना ठीक नहीं है...'
नसीरुद्दीन शाह ने आगे कहा, "मुझे नहीं लगता कि मौत के बारे में दिन-रात सोचना ठीक है। मैं निश्चित रूप से ऐसा नहीं करता। मैंने अपने करीबी लोगों की कई मौतों का अनुभव किया है। मेरे परिवार, मेरे माता-पिता, साथ ही, कुछ प्यारे दोस्तों। जिस तरह से ओम पुरी की मृत्यु हुई, जिस तरह से फारूक शेख की मृत्यु हुई, भयानक झटके थे। लेकिन इस पर ध्यान देना अच्छा नहीं है। मुझे लगता है कि मृत्यु जीवन का सबसे महत्वहीन हिस्सा है और विडंबना यह है कि सबसे अपरिहार्य भी है।''

नसीरुद्दीन शाह बोले-'मुझे जाना होगा तो मैं चला जाऊंगा'
नसीरुद्दीन शाह ने कहा, ''मैं इस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देता। जब मुझे जाना होगा तो मैं जाऊंगा। जब तक मैं आस-पास हूं, मैं जितना संभव हो उतना सतर्क और जीवित रहना चाहता हूं। मैं नहीं चाहूंगा कि मेरे जाने के बाद, दोस्त इस बारे में विलाप करें। मैं चाहता हूं कि मेरे जाने के बाद मेरे बारे में बात किया जाए और जो कुछ मैंने किया है उसके बारे में बात किया जाए। मैं चाहता हूं कि वे मुझे उस जीवन के लिए याद रखें जो मैंने जिया है, इस बारे में बात करने के बजाय कि मैं कैसे मर गया।"











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