नसीरुद्दीन शाह ने नाजी जर्मनी से की सरकार की तुलना, कहा- 'खुद के लिए नहीं, बच्चों के लिए डरता हूं'
नसीरुद्दीन शाह ने नाजी जर्मनी से की सरकार की तुलना, कहा- 'खुद के लिए नहीं, बच्चों के लिए डरता हूं
मुंबई, 14 सितंबर: अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने कहा है कि उनका मानना है कि फिल्म उद्योग काफी हद तक धार्मिक भेदभाव और इस्लामोफोबिया से अछूता रहा है। लेकिन अब धीरे-धीरे फिल्म निर्माताओं को फंडिंग करके प्रोपेगेंडा फिल्में बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि अब फिल्म इंडस्ट्री भी इस्लामोफोबिया से ग्रसित होता जा रहा है। सरकार फिल्ममेकर्स को इस तरह की फिल्में बनाने के लिए फंडिंग भी करती है। "तालिबान का जश्न मनाने वाले भारतीय मुसलमानों'' पर की गई अपनी टिप्पणियों के बाद सोमवार (13 सितंबर) को एनडीटीवी से बात करते हुए नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि अब प्रमुख फिल्म निर्माताओं को डराया और धमकाया भी जा रहा है। नसीरुद्दीन शाह ने यह भी कहा कि वह उत्पीड़न के कारण चिंतित हैं। उनके पास खोने के लिए बहुत कुछ है। यह उनके पूरे प्रतिष्ठानों को परेशान करने का सवाल है।
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फिल्म इंडस्ट्री में मुस्लिम समुदाय से भेदभाव किया जा रहा है?
नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि उन्होंने फिल्म उद्योग में कोई भेदभाव महसूस नहीं किया है। नसीरुद्दीन शाह बोले, मुझे नहीं पता कि फिल्म इंडस्ट्री में मुस्लिम समुदाय से कोई भेदभाव किया जा रहा है या नहीं। मैं मानता हूं कि हमारा योगदान अहम है। लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में केवल एक ही भगवान है और वह है पैसा। आपकी कमाई जितनी ज्यादा है, आपको इंडस्ट्री में सम्मान भी वैसे ही मिलता है।

'बॉलीवुड में तीनों खान अब भी टॉप पर हैं....'
नसीरुद्दीन शाह ने कहा, बॉलीवुड में तीनों खान अभी भी टॉप पर हैं। वह भी बाकियों से अच्छा कर रहे हैं। मैंने कभी कोई भेदभाव महसूस नहीं किया। मुझे अपने करियर की शुरुआत में अपना नाम बदलने की सलाह दी गई थी। मैंने ऐसा नहीं किया और मुझे नहीं पता कि इससे कोई फर्क पड़ता।"

नसीरुद्दीन शाह ने नाजी जर्मनी से की सरकार की तुलना
नसीरुद्दीन शाह ने कहा, फिल्म निर्मताओं-अभिनेताओं को सरकार द्वारा सरकार समर्थक फिल्में बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, हमारे प्रिय नेता के प्रयासों की सराहना करने के लिए फिल्में बनाने के लिए कहा जा रहा है। इसके लिए उन्हें पैसे भी दिए जा रहे हैं। उन्हें ये भी कहा जाता है कि वह अगर प्रोपेगेंडा फिल्में बनाएंगे तो उन्हें क्लीन चिट दिया जाएगा। ऐसा जर्मनी में भी यह प्रयास किया गया था। वहां विश्व स्तरीय फिल्म निर्माताओं टारगेट किया गया था और नाजी दर्शन का प्रचार करने वाली फिल्में बनाने के लिए कहा गया था।

'अगर अभिनेता मुंह खोलते हैं तो उनका उत्पीड़न किया जाता है'
71 वर्षीय अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने कहा, फिलहाल फिल्म इंडस्ट्री में कोई कट्टरता नहीं है, लेकिन अगर अभिनेताओं ने बोलने की हिम्मत की तो उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। कईयों ने किया है। यही कारण है कि सबसे बड़े खानों ने चुप्पी साध ली है। ''
प्रोपेगेंडा फिल्मों को लेकर नसीरुद्दीन शाह बोले हालांकि उनके पास निश्चित सबूत नहीं है लेकिन इन दिनों बड़ी टिकट वाली फिल्मों से साफ होता है कि किस तरह की फिल्में बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, "जिस तरह के बड़े बजट की फिल्में आ रही हैं। बड़ी फिल्में भाषाई एजेंडे को नहीं छिपा सकतीं।"

नसीरुद्दीन शाह बोले- मुझे अपने बच्चों को लेकर डर लगता है
नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि उनके पिछले बयान को गलत समझा जा रहा है। नसीरुद्दीन शाह ने कहा, तालिबान की वापसी के बाद भारत में कुछ मुस्लिमों की ओर से जश्न मनाए जाने को लेकर मेरे दिए गए बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने कहा, "मुझे इस बात का दुख था कि मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्ग इससे सहमत हैं। मुझे दक्षिणपंथ से भी पीठ थपथपाई गई। लेकिन मुझे ऐसी किसी बधाई या लेबल की आवश्यकता नहीं है।"
"पाकिस्तान जाओ" के नारों का जिक्र करते हुए, नसीरुद्दीन शाह ने मजाक में कहा कि उन्हें एक बार पाकिस्तान जाने के लिए टिकट भी भेजा गया था। टिकट "बॉम्बे से कोलंबो और कोलंबो से कराची" तक के लिए था।
नसीरुद्दीन शाह ने कहा, "मैं अपने बारे में चिंतित नहीं हूं, मुझे बच्चों की चिंता है, बच्चों को लेकर डर लगता है।












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