Jolly LLb 3 Review: अक्षय और अरशद की फिल्म के हीरो हैं सौरभ शुक्ला, देखने की वजहें हैं खास
Jolly Llb 3 Review in Hindi: पिछले कुछ हफ्ते से फिल्में देखने जाओ तो पहले ही हाफ में निराशा मिल जाती थी। ये एक ट्रेंड चल पड़ा था। आज अक्षय कुमार की जॉली LLB 3 देखने के लिए मीडिया को बुलाया गया, तो लगा 'क्या यार कहीं ये भी ऐसी ही न निकले।' लेकिन मेरे इस पूर्वाग्रह को फिल्म ने पहले ही सीन में चकनाचूर कर दिया। अब जब ऐसा हो ही गया, तो फिल्म का पूरा रिव्यू इत्मिनान से बिना स्पॉइलर के पढ़ लीजिए और फिर फिल्म देखने के लिए मन बनाइए। कसम से बता रहे हैं, मजा भरपूर मिलेगा।

पूंजीपतियों से हक की लड़ाई की कहानी
फिल्म खुलती है राजस्थान के एक गांव से। किसान राजाराम अपनी बहू के साथ तहसीली में खड़े हैं। क्योंकि उनकी जमीन कब्जाई जा रही है। राजाराम की से चोरी-छुपे फर्जी कागज में दस्कत करवा लिए गए हैं। जब बहू ने आवाज उठाई तो दबा दी गई, क्योंकि महिलाओं का हक नहीं है वहां बोलने का। बाहर निकाल दिया गया और राजाराम भीख मांगते रहे। लेकिन उनकी जमीन छीन ली गई। क्योंकि सरकारी अफसर भी पूंजीपति के सामने अपना ईमान बेच चुका है। राजाराम आत्महत्या कर लेता है। इसके बाद कहानी पहुंचती है कोर्ट केस में। जहां जानकी जो राजराम कि विधवा पत्नी अपने हक और पति की मौत का बदला लेना चाहती है। फिर एंट्री होती है जॉली मिश्रा और जॉली त्यागी की। बाद में क्या होता और जो होता है वो बहुत मजेदार होता है। इसके लिए पूरी फिल्म देखना उचित होगा। क्योंकि कसम खाए हैं, स्पॉइलर नहीं देंगे।
जस्टिस त्रिपाठी ने लूटा मजमा
फिल्म में जॉली मिश्रा के किरदार में अक्षय कुमार हैं। जो अपने चिर परिचित अंदाज में हैं। वही अंदाज में जिसके लिए वो जाने जाते हैं। उनकी चुटीले पंच मारने का तरीका और दांत चिआरते हुए मुस्कान मजा दिला देती है। जॉली त्यागी के किरदार में अरशद वारसी हैं, जो बेहतरीन हैं और अपने किरदार को महीन तरीके से निभाया है। जानकी के किरदार में सीमा बिस्वास ने भी जबरदस्त काम किया है। पहले ही सीन से फिल्म को रॉबिन दास ने बांधा है। उनका राजाराम का किरदार पूरी फिल्म को ऊंचाई देता है।
फिल्म की पूरी लाइमलाइट ले जाते हैं सुंदर लाल त्रिपाठी यानी सौरभ शुक्ला। वो जबसे एंट्री करते हैं, फिल्म में रोमांच ले आते हैं। पूरी फिल्म के हीरो वही हैं, ये कहना भी गलत नहीं होगा। हुमा कुरैशी और अमृता राव ने भी ठीक काम किया है। हालांकि उनका स्क्रीन स्पेस कम है। बाकी सपोर्टिंग कास्ट का काम भी बढ़िया हैं।
सुभाष कपूर का करिश्मा कायम
फिल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले और डायरेक्शन सुभाष कपूर ने ही किया है। उन्होंने तीनों ही कामों को बड़े ही सधे हुए तरीके से किया है। फिल्म की कहानी में हंसी-ठिठोली है और एक संदेश भी है। 'जॉली LLB 3' को उन्होंने रोलरकोस्टिंग राइड की तरह बनाया है। फिल्म 2 घंटे 37 मिनट की है और बहुत ही एंगेजिंग है। यही सुभाष कपूर के काम की तारीफ है। डायरेक्शन भी उन्होंने बहुत ही महीन और बारीक तरीके से किया है। उन्होने हर छोटी-छोटी चीजों का ध्यान रखा है। चंद्रशेखर प्रजापति की एडिटिंग भी कट टू कट है। कुछ भी ज्यादा और कम नहीं है। सबकुछ नपा तुला है। फिल्म के गाने भी अच्छे हैं। उससे ज्यादा अच्छा बैकग्राउंड स्कोर है, जिसे मंगेश धकड़े ने कंपोज किया है।
सौ बात की एक बात
कुल जमा 2 घंटे 37 मिनट की फिल्म देख लेनी चाहिए। क्योंकि इसमें इमोशन, कॉमेडी और ड्रामा का तड़का है। जो बतौर दर्शक हर एक इंसान को चाहिए होता है। ऐसे में इस फिल्म को परिवार के साथ देखा जा सकता है। वैसे अगर आपने रिव्यू यहां तक पढ़ लिया है, तो ये आपको कह सकता हूं कि फिल्म देखो मजा आएगा। नहीं तो आकर कमेंट में आप बता दीजिएगा। बाकी मेरी बात यहीं तक, आप फिल्म देखिए और अपनी राय बनाइए। oneindia hindi पर रिव्यू आपको कैसे लगते हैं, कमेंट बॉक्स बॉक्स पर अपनी राय जरूर दीजिएगा।












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