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'अगर Sanjay Dutt ने बताई होती सच्चाई तो ना मरते सैकड़ों लोग', सालों बाद उज्जवल निकम ने क्यों कहा ऐसा?

Sanjay Dutt and Ujjwal Nikam: भारत के लोकप्रिय वकीलों में से एक उज्ज्वल निकम उन चार लोगों में शामिल हैं, जिन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। अपनी बेबाक बयानबाजी और दलीलों के लिए मशहूर उज्जवल निकम ने भारत के सुपर स्टार संजय दत्त को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिसके बाद एक बार फिर संजय दत्त के जीवन का वो पन्ना खुल गया जिसके बारे में वो कभी भी बात करना नहीं चाहते हैं।

एनडीटीवी को दिए गए इंटरव्यू में उज्जवल निकम ने कहा कि 'अगर अभिनेता संजय दत्त ने हथियारों से लदे उस वाहन के बारे में पुलिस को पहले सूचना दे दी होती, जिससे उन्होंने एक AK-47 बंदूक उठाई थी, तो मुंबई हमले में सैकड़ों लोगों की जान नहीं जाती।'

Sanjay Dutt

Sanjay Dutt को मैंने उन्हें निर्दोष माना: उज्जवल निकम

निकम ने कहा कि 'संजय दत्त ने हथियार इसलिए रखा था क्योंकि वे बंदूकों से आकर्षित थे, उन्होंने कानून की नजर में अपराध किया था लेकिन वह सीधे-सादे आदमी हैं, मैंने उन्हें निर्दोष माना है।'

संजय दत्त के घर आई थी हथियारों से भरी गाड़ी

निकम ने कहा कि 'मुझे केवल एक बात कहनी है, 12 मार्च को विस्फोट हुआ, उससे कुछ दिन पहले एक वैन उनके (संजय दत्त के) घर आई थी, यह हथियारों से भरी हुई थी, जिसमें हाथ के हथगोले, AK 47s थे। अबू सलेम (गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम का गुर्गा) उसे लाया था। संजय ने कुछ हाथ के हथगोले और बंदूकें उठाईं, फिर उन्होंने वह सब वापस कर दिया और केवल एक AK 47 रखी। अगर उन्होंने उस समय पुलिस को सूचित किया होता, तो पुलिस जांच करती और मुंबई विस्फोट कभी नहीं होते।'

12 मार्च 1993 को मुंबई शहर में सिलसिलेवार 12 बम धमाके हुए थे (Sanjay Dutt)

आपको बता दें कि 1993 का मुंबई बम धमाका भारत के इतिहास में एक ऐसा काला अध्याय है जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। 12 मार्च 1993 को मुंबई शहर में सिलसिलेवार 12 बम धमाके हुए, जिसमें 250 से ज्यादा लोगों की जान चली गई और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह भारतीय इतिहास के भयावह आतंकी हमलों में एक था, जिसके जख्म आज भी भरे नहीं है।। इस हमले से जुड़ी जांच और कानूनी कार्रवाई कई दशकों तक चली और इस केस से बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त का नाम भी जुड़ा, जिसने पूरे देश को चौंका दिया था।

Sanjay Dutt के पास से मिली थी प्रतिबंधित AK 47s

संजय दत्त पर आरोप था कि उन्होंने प्रतिबंधित AK 47s अपने पास रखी थी। संजय दत्त पर TADA के अंतर्गत आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाए गए लेकिन बाद में उन्हें TADA से राहत मिल गई और उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत केस चला था। 1993 में उन्हें गिरफ्तार किया गया और लगभग 16 महीने जेल में बिताने के बाद उन्हें जमानत मिली।

मैं आतंकवादी नहीं हूं: संजय दत्त (Sanjay Dutt)

2013 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 6 साल के लिए सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। उन्होंने पुणे की यरवदा जेल में बाकी की सजा पूरी की और 2016 में रिहा हुए थे। अपनी सजा पूरी होने के बाद संजय दत्त ने कहा था कि 'वो आतंकवादी नहीं हैं, उन्होंने अपने देश से कोई गद्दारी नहीं की है। उनसे एक गलती अनजाने में हुई, जिसकी सजा उन्होंने भुगत ली है।'

एक नजर उज्जवल निकम के अब तक के सफर पर..

  • उज्जवल देओराव निकम का जन्म 30 मार्च 1953 को महाराष्ट्र के जलगांव में हुआ था।
  • उनके पिता डियोराओजी निकम न्यायाधीश व बैरिस्टर थे।
  • विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई करने के पश्चात् उन्होंने एस.एस. मणियार लॉ कॉलेज, जलगांव से विधि की डिग्री प्राप्त की ।
  • उज्जवल निकम ने 1979 में जिला अभियोजक के रूप में अपने कानूनी सफर की शुरुआत की और देश के कई बड़े मुकदमे लड़े हैं।
  • उन्हें 2009 से Z+ सुरक्षा प्राप्त है
  • 2016 में सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।
  • 2024 में उन्होंने भाजपा की ओर से मुंबई उत्तर-मध्य लोकसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा था लेकिन जीत हासिल नहीं हुई।

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