बोले मनोज मुंतशिर- 'मैं हिंदू हूं, राष्ट्रवादी हूं लेकिन सेकुलर नहीं हूं, ये सरकार का काम'
नई दिल्ली, 26 जनवरी। 'तेरी मिट्टी मिल.. ' गीत के जरिए लोगों के दिलों में खास जगह बनाने वाले गीतकार-कवि मनोज मुंतशिर ने गणतंत्र दिवस के खास मौके पर अपनी नई कविता 'मैं उस भारत से आता हूं' पेश की है, जिसने सोशल मीडिया पर आते ही धूम मचा दी है। देशभक्ति के रंग में रची उनकी कविता दिल को छू लेने वाली है, फैंस ने उनकी कविता पर काफी बढ़िया कमेंट भी किए हैं तो वहीं हिंदुत्व, देशभक्ति, असहिष्णुता,धर्मनिरपेक्षता और सेक्यूलर पर मनोज मुंतशिर ने खुलकर अपनी राय लोगों के लोगों के सामने रखी है।

'हर वासी को अपने देश पर गर्व होना चाहिए'
आजतक डॉट इन से बात करते हुए कलम के जादूगर ने कहा कि 'मैं इस कविता के माध्यम से भारत के 135 करोड़ लोगों को उनकी जड़ों के बारे में याद दिलाना चाहता था। देश के हर वासी को अपने देश पर गर्व होना चाहिए।'
बचपन से ही देशभक्त हूं: मनोज मुंतशिर
उन्होंने कहा कि 'वह बचपन से ही देशभक्त रहे हैं। मेरी मां बताती हैं कि जब मैं छोटा था और रेडियो पर देशभक्ति के गीत बजते थे तो मैं सैल्यूट की पोजिशन में खड़ा हो जाता था। उन्होंने ये भी कहा कि वो जब स्कूल में पढ़ते थे तो 15 अगस्त और 26 जनवरी दोनों को आवाज अच्छी ना हो पर भी सबसे पहले देशभक्ति के गाने के लिए मंच पर पहुंच जाते थे और अपने उन दोस्तों को भी गुरुओं की मार से बचा लेता था, जिन्हें गाना नहीं आता था।'

'मैं हिंदू हूं, मैं एक राष्ट्रवादी हूं लेकिन सेकुलर नहीं हूं'
उन्होंने यह भी कहा कि 'वो चाहते हैं कि देश जब अपना 100वां स्वतंत्रता दिवस मनाए तो वो विश्वगुरु के रूप में लोगों के सामने आए। उन्होंने कहा कि 'मैं खुलकर कहता हूं कि मैं हिंदू हूं, मैं एक राष्ट्रवादी हूं, कि मैं एक भारतीय हूं। मुझे इन तीन चीजों में कोई शर्मिंदगी महसूस नहीं होती है, मुझे इस पर गर्व है और मैं बताता हूं कि क्या मैं नहीं हूं? मैं सेकुलर नहीं हूं। मुझे लगता है कि सेकुलर सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला और अब्यूज्ड वर्ड है। आपको बताया जाता है कि यदि आप सेकुलर नहीं हैं, तो आप बहुत बुरे व्यक्ति हैं। मैं सेकुलर नहीं हूं, मैं इसलिए नहीं हूं क्योंकि सरकार का काम सेकुलर होना है।'

'नीतियां बनाने वाली सरकार को धर्मनिरपेक्ष होने की जरूरत है'
उन्होंने आगे कहा, 'नीतियां बनाने वाली सरकार को धर्मनिरपेक्ष होने की जरूरत है। अगर मैं धर्मनिरपेक्ष हूं, तो मैं हिंदू धर्म में विश्वास नहीं करता, और मैं वासुदेव कुटुम्बकम में विश्वास नहीं करता, और मैं सर्व भवन्तु में विश्वास नहीं करता हूं। फिर मैं चार वेदों को भी नहीं मानता। फिर मेरी विश्वास प्रणाली क्या है? मैं धर्मनिरपेक्ष नहीं होना चाहता, मैं एक गौरवशाली हिंदू बनना चाहता हूं। मैं उस धर्म की नगाड़ा बजाना चाहता हूं जिसने पूरी दुनिया को भाईचारा सिखाया। कोई भी धर्म बुरा नहीं है, सभी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है।'

'भारत और भारतीयता दोनों के लिए खतरा'
उन्होंने कहा कि 'राष्ट्रवाद के खिलाफ बोलने वाले लोगों को अपना इलाज कराना चाहिए। क्योंकि ये लोग भारत और भारतीयता दोनों के लिए खतरा हैं। मैंने हाल ही में अखिलेश यादव का बयान सुना, जहां उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हमारा दुश्मन नहीं है। सच कहूं तो यह सुनने के बाद कुछ देर तक तो मुझे अच्छा नहीं लगा। मैं सोच रहा था कि जब इतना पढ़ा-लिखा व्यक्ति इस तरह बात करता है तो उनका एजेंडा समझ में आता है। वह किसी खास समूह या वर्ग को खुश करना चाहते हैं। आप यह कह दें कि पाकिस्तान या चीन आपका दुश्मन नहीं है, तो हो चुकी बात। आपको हमेशा अपने दोस्त और दुश्मन के बीच अंतर पता होना चाहिए।'
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