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Budget 2026: फिल्म इंडस्ट्री से 2025 में सरकार को हुआ करोड़ों का फायदा, बजट से प्रोड्यूसर्स कर रहे कौन सी मांग

Budget 2026: भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की आर्थिक ताकत का अंदाजा साल 2025 के बॉक्स ऑफिस आंकड़ों से साफ लगाया जा सकता है। साल 2025 की शुरुआत में रिली हुई फिल्म 'छावा' (Chhava) से लेकर दिसंबर 2025 की ब्लॉकबस्टर मूवी 'धुरंधर' (Dhurandhar) ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया।

साल 2025 फिल्म इंडस्ट्री के लिए रहा अच्छा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साल 2025 में करीब 1800 (छोटी-बड़ी) फिल्में बनीं और कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन लगभग 13,395 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो अब तक का रिकॉर्ड माना जा रहा है।

Budget 2026

ज्यादा टिकट बिक्री से सरकार को हुआ फायदा

आपको बता दें कि मूवी टिकट पर लागू 18 फीसदी GST के आधार पर सरकार को सिर्फ टिकट बिक्री से करीब 2411 करोड़ रुपये का टैक्स मिला है। ये भी अपने आप में एक नया कीर्तिमान है।

टॉप फिल्मों की कमाई और सरकार का हिस्सा

-साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों ने न सिर्फ मेकर्स के लिए मुनाफा कमाया बल्कि सरकार के खजाने में भी बड़ी हिस्सेदारी डाली है। जानकारी के अनुसार बॉक्स ऑफिस पर हुए बड़े कलेक्शन का सीधा फायदा टैक्स के रूप में सरकार को मिलता है।

-फिल्म इंडस्ट्री से सरकारी राजस्व केवल जीएसटी तक सीमित नहीं है। इसके अलावा कलाकारों द्वारा दिया जाने वाला इनकम टैक्स, प्रोडक्शन हाउस का कॉरपोरेट टैक्स, ओटीटी और डिजिटल राइट्स से होने वाली आय, ये सभी स्रोत मिलकर सरकार के लिए सैकड़ों करोड़ का राजस्व तैयार करते हैं।

-हाल के वर्षों में जहां शाहरुख खान सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले कलाकारों में गिने जाते थे, वहीं 2024-25 में बॉलीवुड के महनायक अमिताभ बच्चन ने लगभग 120 करोड़ रुपये टैक्स देकर नया रिकॉर्ड बनाया है।

24 भाषाओं में बन रहीं हजारों फिल्में

भारत में हर साल लगभग 2000 छोटी-बड़ी फिल्में बनती हैं, जो हिंदी, तमिल, तेलुगू, मराठी, बांग्ला, असमिया,उड़िया सहित 24 भाषाओं में रिलीज होती हैं। हालांकि इनमें से सिर्फ 10 से 12 फिल्में ही ब्लॉकबस्टर बन पाती हैं बाकी औसत या घाटे में रह जाती हैं।

प्रोड्यूसर्स की बड़ी मांग: GST कम हो और टिकट दर नियंत्रित हो

फिल्म निर्माताओं की लंबे समय से मांग रही है कि 100 रुपये से ऊपर की टिकट पर लगने वाला 18 फीसदी GST कम किया जाए, मल्टीप्लेक्स में बढ़ती टिकट कीमतों पर नियंत्रण हो और सिंगल स्क्रीन थिएटर्स को बढ़ावा दिया जाए। उनका मानना है कि महंगी टिकटें दर्शकों को सिनेमाघरों से दूर कर रही हैं।

सिंगल स्क्रीन थिएटर्स के पुनर्जीवन की जरूरत

निर्माताओं का सुझाव है कि सरकार शहरों में सिंगल स्क्रीन थिएटरों को प्रोत्साहित करें ताकि कम बजट और कंटेंट आधारित फिल्मों को भी दर्शक मिल सकें।

टैक्स फ्री और राज्य सरकारों की फिल्म नीति

-कई राज्य सरकारें अपनी फिल्म नीति के तहत फिल्मों को सब्सिडी और सुविधाएं देती हैं। उत्तर प्रदेश की फिल्म 'बंधु नीति' इसका उदाहरण है। समय-समय पर कुछ फिल्मों को टैक्स फ्री भी किया जाता है, जिससे दर्शकों की संख्या बढ़ती है।

-फिल्म निर्माण को साल 1998 में उद्योग का दर्जा मिला था। इसके बाद से बैंकों से लोन और संस्थागत वित्त की राह आसान हुई थी लेकिन आज फिल्म इंडस्ट्री के लोगों की मांग है कि आम बजट में भी इस सेक्टर के लिए ठोस राहत दी जाए।

NFDC फंड बढ़ाने की मांग

-निर्माताओं का कहना है कि कंटेंट आधारित फिल्मों को सहयोग देने वाली संस्था NFDC के फंड में पर्याप्त बढ़ोतरी होनी चाहिए। साल 2024 के बजट में महज 23 करोड़ की वृद्धि को वो नाकाफी मानते हैं।

-फिल्म इंडस्ट्री सरकार के लिए बड़ा राजस्व स्रोत बन चुकी है। बावजूद इसके निर्माताओं को उम्मीद है कि बजट 2026 में GST में राहत, टिकट दर नियंत्रण, सिंगल स्क्रीन प्रोत्साहन और NFDC फंड बढ़ोतरी जैसे कदम उठाए जाएंगे ताकि भारतीय सिनेमा का भविष्य और मजबूत हो सके।

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