bhootni movie review:एंटरटेनिंग है फिल्म 'द भूतनी', संजय दत्त और सनी सिंह ने खींचा ध्यान

मूवी रिव्यू: द भूतनी
डायरेक्टर: सिद्धांत सचदेव
कास्ट: संजय दत्त, मौनी रॉय, सनी सिंह, पलक तिवारी और निकुंज शर्मा
रेटिंग: 2.5 स्टार्स

हॉरर-कॉमेडी के भरे हुए ज़माने में, द भूतनी एक ताज़ा हवा के झोंके की तरह है। यह फिल्म सिर्फ डर और हंसी का मिश्रण नहीं है, बल्कि यह एक सुपरनैचुरल यात्रा है जो दिल और दिमाग दोनों को छूती है। सिद्धांत सचदेव के निर्देशन में बनी यह फिल्म न सिर्फ डराने का काम करती है, बल्कि अपने अद्भुत हास्य और गहरी भावनाओं से भी दर्शकों को बांधती है। यह फिल्म सुपरनेचुरल मिस्ट्री, रोमांस और भावनाओं का एक शानदार सम्मिलन है, जिसे देखना एक अलग अनुभव है।

bhootni movie review

फिल्म की कहानी सेंट विंसेंट कॉलेज में घटित होती है, जो एक ऐतिहासिक और रहस्यमय स्थल है। कहानी का केंद्रीय विषय वर्जिन ट्री है, जो हर साल वेलेंटाइन डे के दिन जीवित हो जाता है और सच्चे प्यार की तलाश में निकलता है। इस पेड़ से जुड़ी आत्मा को सच्चे प्यार की तलाश है, और इसके कारण कॉलेज में एक अजीब सी घटनाओं की शुरुआत होती है। फिल्म का 27 दिन का वक्त काफी रोमांचक और दिलचस्प है, जिसमें डर, हास्य और भावनात्मक मोड़ हर जगह मिलते हैं। सिद्धांत सचदेव ने इस फिल्म में रोमांच, हास्य और डर के बीच शानदार संतुलन बैठाया है। हर दृश्य में एक अलग ही इमोशनल टोन है, और यही फिल्म की ताकत है। यह फिल्म आपको सिर्फ डर नहीं देती, बल्कि इसमें एक गहरी भावनात्मक कहानी भी छिपी हुई है, जो अंत तक आपको जोड़ कर रखती है।

संजय दत्त ने बाबा के किरदार में जो अद्भुत अभिनय किया है, वह फिल्म का मुख्य आकर्षण है। एक अनुभवी भूत-प्रेत शिकारी के रूप में उनकी उपस्थिति जबरदस्त है। वह हास्य और गंभीरता दोनों को बहुत अच्छी तरह से संतुलित करते हैं, और इस किरदार में उनका अभिनय फिल्म को एक अलग ही स्तर पर ले जाता है। सनी सिंह ने शांतनु के किरदार में बेहद सहज और संवेदनशील प्रदर्शन किया है। उनका अभिनय सरल लेकिन प्रभावी है। पलक तिवारी ने अनन्या के किरदार में एक इमोशनल गहराई दी है। उनका अभिनय बहुत ही सटीक और सशक्त है, जिससे वह फिल्म में एक स्थिरता लाती हैं। मौनी रॉय, जो मोहब्बत की भूतनी का किरदार निभा रही हैं, ने फिल्म में अपने अभिनय से सबको चौंका दिया है। उनका किरदार रहस्यमय और डरावना है, और साथ ही एक गहरी उदासी भी महसूस होती है। उनकी उपस्थिति स्क्रीन पर बेहद आकर्षक और दिल दहला देने वाली है। निकुंज शर्मा और आसिफ खान ने अपने अभिनय से हास्य का बेहतरीन मिश्रण पेश किया है। उनका कॉमिक टाइमिंग सही जगह पर आता है और फिल्म के मूड को कभी भी ओवरडोन नहीं होने देता।

फिल्म की सिनेमेटोग्राफी कमाल है। फिल्म का लाइटिंग डिज़ाइन भी बहुत प्रभावी है। इसके अलावा, दृश्य प्रभाव (VFX) बेहद सटीक हैं, जो फिल्म के सुपरनैचुरल तत्वों को बढ़ाते हैं, लेकिन कभी भी ओवर-द -टॉप नहीं होते। संगीतकार संतोष नारायणन ने फिल्म के संगीत में एक अद्भुत ताजगी दी है। गाने जैसे "तरारारा" और "महाकाल" ना सिर्फ फिल्म के मूड को उभारते हैं, बल्कि इनका संगीत एक सांस्कृतिक और उन्मादी असर छोड़ता है। बैकग्राउंड स्कोर भी काफी प्रभावी है, जो हर दृश्य में सही समय पर उठता है, और दर्शकों को भावनात्मक तौर पर जोड़ता है।

फिल्म का लेखन बहुत ही चतुर है। संवाद छोटे, तीखे और कभी-कभी बहुत ही तीखे होते हैं। किरदार वास्तविक लोगों की तरह बात करते हैं, पर उनमें एक विशेष फिल्मी रंग होता है, जो दर्शकों को मजेदार और रोमांचक बनाए रखता है। यह स्क्रीनप्ले बहुत ही सटीक और प्रभावशाली है, जिसमें हर पल में भावनाओं की गहराई और हास्य का आदान-प्रदान होता है। यह फिल्म सिर्फ डर और हंसी तक सीमित नहीं रहती। इसके भीतर एक गहरी भावना भी है, जो प्यार और खोए हुए रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है। भूतनी की आत्मा न केवल डराती है, बल्कि एक खोए हुए प्यार को ढूंढने के लिए बेचैन भी है। यह फिल्म हमें यह याद दिलाती है कि हर सुपरनैचुरल किरदार के पीछे एक कहानी होती है, और यही कहानी हमें एक इंसानियत का अहसास कराती है।

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