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Dialogue Controversy: 'क्या देश के सारे हिंदू मर गए हैं?' बीआर चोपड़ा से क्यों पूछा गया था ये सवाल?

Adipurush Controversy: फिल्म 'आदिपुरुष' अपने चलताऊ संवाद और कटेंट की वजह से लोगों के निशाने पर है। आम से लेकर खास तक का गुस्सा फिल्म के राईटर और डायरेक्टर पर फूटा है। टीवी जगत के ऐतिहासिक शो 'महाभारत' के कलाकारों ने तो फिल्म को बैन करने की बात तक कह डाली है।

Dialogue Controversy:

'महाभारत' के युधिष्ठिर को आया गुस्सा

बीआर चोपड़ा के शो 'महाभारत' में युधिष्ठिर का रोल निभा चुके एक्टर गजेंद्र चौहान ने तो इस फिल्म पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने की मांग की है तो वहीं शो में धृतराष्ट्र बने गिरजा शंकर ने इस फिल्म की तुलना 'महाभारत' से करने से ही मना कर दिया।

'मैं टपरी छाप फिल्म की तुलना महाभारत से कैसे करूं'

उन्होंने कहा कि 'वो शो एक उम्दा इतिहास है, उसकी तुलना मैं टपरी छाप फिल्म 'आदिपुरुष' से कैसे कर सकता हूं। मैंने फिल्म देखी नहीं है या यूं कह लीजिए कि मेरी इच्छा ही नहीं हुई कि मैं इसे देखूं। सोशल मीडिया पर मैंने जो देखा और सुना उसे देखकर ही मन इतना खराब हो गया कि मेरी फिल्म देखने की इच्छा ही नहीं हुई।'

'महाभारत का संवाद दिल को छूता है'

उन्होंने कहा कि 'यहां एक राईटर ने सबकुछ अपने हिसाब से लिख दिया जबकि महाभारत के टाइम हर संवाद, हर सीन सबके साथ डिस्कस होता था और शायद यही वजह है कि आज भी लोग वो संवाद नहीं भूले हैं।'

लेखक राही मासूम रजा पर भी उठे थे सवाल

फिलहाल फिल्म 'आदिपुरुष' को लेकर बवाल जबरदस्त रूप से जारी है लेकिन यहां हम आपको बीआर चोपड़ा के इतिहास रचने वाले ऐतिहासिक शो 'महाभारत' से जुड़ा एक बहुत ही रोचक किस्सा बताते हैं, जिसका जिक्र बीबीसी शो में लेखक रजा के ही साथी कुंवरपाल सिंह ने किया था।

राही मासूम रजा ने महाभारत लिखने से किया था मना

दरअसल साल 1988 में टीवी पर प्रसारित हुए 'महाभारत' को लिखने की जिम्मेदारी निर्देशक बीआर चोपड़ा ने अपने मनपसंद लेखक राही मासूम रजा को सौंपी थी और उन्होंने इसका ऐलान एक प्रेसवार्ता में भी कर दिया था। लेकिन राही मासूम रजा उन दिनों बॉलीवुड में खासा व्यस्त थे इसलिए उन्होंने समय की कमी बताकर बीआर चोपड़ा को मना कर दिया था लेकिन तब बीआर चोपड़ा ने उनके इनकार पर कोई रिएक्शन नहीं दिया था।

'क्या देश के सारे हिंदू मर गए हैं?'

उन दिनों whatsapp या मोबाइल का दौर तो था नहीं इसलिए लोग खत लिखा करते थे। बीआर चोपड़ा के पास भी महाभारत के ऐलान के बाद रोजाना सैकड़ों खत आने लगे थे, जिसमें लोगों ने उनसे नाराजगी जताई थी कि 'क्या देश के सारे हिंदू मर गए हैं? जो आपने एक मुस्लिम लेखक को 'महाभारत' के संवाद लिखने को कहा है।' इस तरह का पत्रों से चोपड़ा ऑफिस भर गया था।

'मैं गंगा पुत्र हूं इसलिए मैं ही महाभारत लिखूंगा'

एक दिन उन सारे खतों को उन्होंने राही मासूम रजा को भेज दिया और पूछा कि 'वो इस बारे में क्या कहना चाहते हैं?' राही मासूम रजा को ये बात दिल पर लग गई और उन्होंने तुरंत बीआर चोपड़ा को फोन करके कहा कि 'मैं गंगा पुत्र हूं और आज से मैं ही आपका महाभारत लिखूंगा', बस इसके बाद जो हुआ है, वो आपके सामने ही है। 'महाभारत' के संवाद आज भी लोगों के दिल-दिमाग में कौंधते हैं।

आज भी लोगों को याद है- 'मैं समय हूं'

आज भी लोगों को 'मैं समय हूं' याद है तो आज भी लोग भीष्म पितामह की प्रतिज्ञा और चीर हरण के दौरान द्रोपदी का वो विलाप नहीं भूल पाए हैं। ये राही की कलम ही थी, जिसने इस शो को हमेशा के लिए स्क्रीन पर अमर कर दिया।

यूपी के गाजीपुर के रहने वाले थे राही मासूम रजा

आपको बता दें कि राही मासूम रजा मूल रूप से यूपी के गाजीपुर के रहने वाले थे, उनका बचपन प्रयागराज और काशी की गलियों में भी गुजरा था और मुंबई जाने से पहले उन्होंने प्रयागराज में कुछ दिन काम भी किया था, इसलिए उन्होंने बीआर चोपड़ा से खुद को गंगा पुत्र कह कर संबोधित किया था।

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