82 साल के व्यक्ति की कुत्ते से इतनी मोहब्बत कि बनवा डाला मंदिर, जानिए कैसे होती है पूजा

अतरंगी दुनिया में लोगों की अजीबो गरीब शौक होते हैं। जिन्हें पूरा करने के लिए वे किसी भी हद जा सकते हैं। कुत्ता जिसे मंदिरों के लिए अपवित्र माना जाता है आज उसकी पूजा के लिए मंदिर बनवाया जा रहा है। यह सुनने में अजीब जरूर लग रहा होगा लेकिन सच है। तमिलनाडु (Tamilnadu) में 82 वर्षीय एक वृद्ध कि अपने पालतू कुत्ते (Pet Dog) के प्रति इतनी मोहब्बत जगी कि उसे उसकी मौत के बाद एक मंदिर (Dog Temple) बनवाना पड़ा। आश्चर्य तो तब हुआ जब उस मंदिर में किसी देवी या फिर देवता की नहीं बल्कि उनके पालतू कुत्ते की मूर्ति स्थापित की गई।

शिवगंगा में है टॉम का मंदिर

शिवगंगा में है टॉम का मंदिर

तमिलनाडु के 82 वर्षीय व्यक्ति मुथु (Muthu) ने यह मंदिर अपने पालतू कुत्ते की याद में मंदिर बनवाया। मुथु एक सरकारी कर्मचारी के पद थे जो अब रिटायर्ड हो चुके हैं। उन्होंने शिवगंगा जिले (Sivaganga district) के मनामदुरै के पास अपने कुत्ते की याद में मंदिर बनवाया है।

80 हजार खर्च करके बनवाया मंदिर

80 हजार खर्च करके बनवाया मंदिर

मुथु के पालतू कुत्ते का नाम टॉम था। जो अब मर चुका है। शिवगंगा जिले के मनामदुरै के पास ब्राह्मणकुरिची में मुथु ने टॉम को अंतिम विदाई दी। बाद में मथु ने ब्राह्मणकुरिची में स्थित अपने खेत में टॉम के लिए एक मंदिर बनवा दिया। मुथु ने अपने टॉम के साथ बिताए पल को हमेशा ताजा रखने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने टॉम का मंदिर बनाने का निश्चय किया। टॉम की मूर्ति के लिए 80,000 रुपये खर्च किए। प्रतिमा इस साल जनवरी में स्थापित कर दी गई।

11 साल पहले मुथु की टॉम से हुई थी दोस्ती

11 साल पहले मुथु की टॉम से हुई थी दोस्ती

टॉम (Tom) एक लैब्राडोर (Labrador) प्रजाति का कुत्ता था। मुथु के भतीजे मनोज कुमार का कहना है कि टॉम को मेरे भाई अरुण कुमार ने 11 साल पहले खरीदा था। लेकिन हम उसे अपने पास नहीं रख सके। इसलिए हमने छह महीने बाद उसे अपने चाचा को सौंप दिया।

टॉम के जाने के बाद परिवार को लगा था सदमा

टॉम के जाने के बाद परिवार को लगा था सदमा

मुथु के भतीचे मनोज कहते हैं कि टॉम हमेशा उसका साथी था। दोनों ने एक दूसरे पर प्यार बरसाया। टॉम को कोई उनसे अलग नहीं कर सकता था। लेकिन टॉम अपनी बीमारी की वजह से सबको अलविदा कहकर चला गया। टॉम पिछले साल बीमार हो गया था। चिकित्सकों के उपचार के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका। बाद में जनवरी 2021 में टॉम ने मुथु और उनके परिवार से विदा हो गया। टॉम के जाने बाद पूरा परिवार सदमे में था।

टॉम को मंदिर में मिलता है पसंदीदा भोजन

टॉम को मंदिर में मिलता है पसंदीदा भोजन

टॉम के मंदिर में संगमरमर की प्रतिमा लगी है। प्रतिमा पर रोजाना चढ़ावा चढ़ाया जाता है। मंदिर सबके लिए खुला रहता है। प्रतिमा पर टॉम का पसंदीदा खाना चढ़ावा के रूप में परोसा जाता है।

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