DDLJ: 'बड़े-बड़े देशों में ऐसी छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं', 30 साल बाद भी जवां है राज-सिमरन की मोहब्बत
30 years of DDLJ: आज से 30 साल पहले 20 अक्टूबर 1995 को एक फिल्म रिलीज हुई थी, नाम था 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', यशराज बैनर तले बनी ये फिल्म दिवाली पर दर्शकों के लिए तोहफा थी, फिल्म का निर्देशन किया था अपनी फिल्मों से लोगों को मोहब्बत की भाषा सिखाने वाले यश चोपड़ा के बेटे आदित्य चोपड़ा ने।
जिन्होंने इस फिल्म के जरिए इश्क की नई इबादत लिखी, जिसने बच्चे से लेकर बूढ़ों तक को अपने मोहपाश में ऐसे बांधा, जिसके बारे में कभी किसी ने सोचा नहीं था। आलम ये था कि इस फिल्म को देखने के बाद यूथ को भी 'करवाचौथ' और 'सरसों के खेत' से प्यार हो गया था।

पर्दे पर एक प्रवासी भारतीय का लंदन में रहकर अपने गांव की मिट्टी को मिस करना और एक खूबसूरत गर्ल, जो कि 17-18 साल की बाली उमर से, सपनों में एक ड्रीम ब्वॉय को देखती है लेकिन एक हिंदुस्तानी लड़की की तरह वो अपने प्रेम के लिए बगावत नहीं कर सकती है, यानी कहने का फिल्म में वो सबकुछ था, जिसने हर इंडियन को इस फिल्म से जोड़ दिया।
राज-सिमरन का इश्क पूरी तरह से जवां है (DDLJ)
इसका नतीजा ये हुआ कि आज भी राज-सिमरन का इश्क पूरी तरह से जवां है, ताजा है और लोगों को गुदगुदाता है, भले ही वक्त के पटल पर उसने 30 साल का आंकड़ा पार कर लिया हो, ये एक ऐसी प्रेम कहानी थी, जिसने लोगों के अंदर 'बगावत' नहीं बल्कि 'दोस्ती' करने का जज्बा पैदा किया, फिल्म का हीरो अपनी प्रेमिका को भगाकर नहीं बल्कि घरवालों की मर्जी से 'दुल्हनिया' बनाना चाहता है और शायद यही यूएसपी फिल्म के हिट होने का कारण थी, फिल्म के गाने आज भी लोगों को थिरकने पर मजबूर करते हैं।
'बड़े बड़े देशों में ऐसी छोटी छोटी बातें होती रहती हैं' (DDLJ)
पर्दे पर राज बनकर लोगों का दिल चुराने वाले शाहरुख खान ने कहा कि 'लगता ही नहीं कि दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे को रिलीज हुए 30 साल हो गए हैं। मानो कल की ही बात हो, 'क्योंकि बड़े बड़े देशों में ऐसी छोटी छोटी बातें होती रहती हैं', लेकिन यह अब भी यकीन करना मुश्किल है।'
'लोग फिल्म देखने आने लगे... और प्यार में पड़ने लगे'
'मैं दिल से आभारी हूं दुनिया भर के उन लोगों का जिन्होंने 'राज' को इतना प्यार दिया। किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह फिल्म लोगों के दिलों में इतनी गहराई तक उतर जाएगी। वो पल मैं कभी नहीं भूल सकता जब लोग फिल्म देखने आने लगे और प्यार में पड़ने लगे।'
'इस फिल्म की सफलता का सारा श्रेय आदित्य को जाता है'
'इस फिल्म का असर जो लोगों के दिलों पर पड़ा है, वो बेमिसाल है। आज भी बहुत से कपल्स मुझसे मिलकर कहते हैं कि उन्होंने शादी की या प्यार किया डीडीएलजे देखकर। यह फिल्म भारत और दक्षिण एशियाई संस्कृति के पॉप कल्चर में एक खुशहाल छाप छोड़ गई, इस फिल्म की सफलता का सारा श्रेय आदित्य को जाता है, जिनके पास डीडीएलजे की अद्भुत स्पष्टता थी और यश जी के आशीर्वाद को भी। हम सबने यह फिल्म बहुत प्यार और ईमानदारी से बनाई थी, बस यही कहता हूं कि आने वाले सालों तक यूं ही प्यार में पड़ते रहें।'
राज-सिमरन के ट्रेन स्टेशन वाले सीन ने पूरे देश को रोक दिया
तो वहीं सिमरन बनकर लोगों के दिलों पर दस्तक देने वाली काजोल ने कहा कि 'डीडीएलजे के 30 साल पूरे होना किसी सपने जैसा लगता है! यह फिल्म अब एक विरासत बन चुकी है, हमने कभी नहीं सोचा था कि राज और सिमरन का ट्रेन स्टेशन वाला सीन पूरे देश को रोक देगा। इसके गाने, डायलॉग्स और सरसों के खेत पॉप कल्चर का हिस्सा बन गए।'
'मेरे लिए सिमरन अब भी जिंदा है' (DDLJ)
काजोल ने आगे कहा,'डीडीएलजे का एक अंश हर उस रोमांटिक फिल्म में मौजूद है जो उसके बाद बनी। मेरे लिए 'सिमरन' अब भी जिंदा है - वो लाखों भारतीय लड़कियों का प्रतीक है जो अपने माता-पिता की बात मानती हैं, पर दिल में आज़ादी की चाह भी रखती हैं। इसलिए वो आज भी सबको छूती है। जब कोई कहता है 'जा सिमरन, जा', तो वो सिर्फ एक डायलॉग नहीं रहता, वो साहस और प्यार का प्रतीक बन जाता है।जो दर्शक 16 साल की उम्र में इस फिल्म से प्यार कर बैठे थे, आज वे अपने बच्चों के साथ इसे देख रहे हैं। शायद यही डीडीएलजे की खूबसूरती है।'
हमारे बीच एक समझ और भरोसा है: काजोल
'डीडीएलजे के लिए मिले प्यार के लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगी। आदित्य चोपड़ा की दूरदृष्टि इस फिल्म की असली ताकत थी, परिवार, परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाना और दिल की बात सुनने का साहस ये विषय कभी पुराने नहीं होते हैं। शाहरुख के साथ काम करना हमेशा सहज रहा है। हमारे बीच एक समझ और भरोसा है, जो बिना बोले काम करता है। कैमरे के सामने यह सब कुछ नेचुरल है , यही वजह है कि दर्शक उस जादू को महसूस करते हैं।'












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