White Tiger: छत्तीसगढ़ के मैत्री बाग जू में सफेद बाघों का बढ़ा कुनबा, मां के साथ अठखेलियाँ करता दिखा सिंघम
छत्तीसगढ़ में एक ऐसा चिड़ियाघर है जो सफेद बाघ के लिए जाना जाता है। दुर्ग जिले में भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा निर्मित भारत और रूस की मित्रता के प्रतीक 'मैत्री बाग जू' को सफेद बाघ की नर्सरी भी कहा जाता है। यहां लगभग 7 सफेद बाघ हैं। यहां बड़ी संख्या में शावक जन्म लेते हैं। इसी तरह दो महीने पहले पैदा हुए नन्हे शावक सिंघम को अब केज के बाहर छोड़ दिया गया है। यानी सिंघम को देखने के लिए अब पर्यटकों का इंतजार खत्म हो चुका है।

सिंघम को देखने मैत्री बाग में उमड़ रही भीड़
भिलाई इस्पात संयंत्र के मैत्री बाग में सिंघम को देखने भीड़ उमड़ रही है। नन्हा शावक सिंघम अपनी मां रोमा के साथ केज के बाहर खुले आसमान में पहली बार बाहर आया। जिसे देखने के लिए स्कूली बच्चों और पर्यटकों की भीड़ लग रही है। हर कोई उन्हें अपनी कैमरों में कैद करने ले उत्साहित है। क्योंकि लगभग चार साल बाद मैत्री गार्डन में नन्हे सिंघम कीकिलकारियां गूंजी है।

मैत्री बाग प्रबन्धन ने शावक का रखा विशेष ध्यान
दरअसल दो महीने पहले शावक सिंघम को सफदे बाघिन रोमा ने जन्म दिया है। शावक को बीमारी या अन्य संक्रमण से बचाने के लिए जू प्रबंधन ने दो माह तक सिंघम का विशेष ध्यान रखा। उनके खान पान और स्वास्थ्य की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। जू के प्रभारी डॉ. एनके जैन ने बताया कि मैत्री बाग में लम्बे समय बाद मैत्री बाग में सफेद बाघ का जन्म हुआ है। इससे पहले 2018 में सफेद बाघ के शावक रक्षा और आजाद की किलकारी गूंजी थी। सिंघम को दो माह तक पर्यटकों से दूर रखा गया और आज सिंघम को पर्यटकों के लिए बाड़ा के बाहर छोड़ा गया।
दो माह पूर्व कैंसर से हुई थी सफेद बाघ की मौत
मैत्री बाग जू मे 30 अगस्त को एक सफेद बाघ की मौत के बाद इनकी संख्या घटकर 6 हो चुकी थी। ऐसे में नन्हे सिंघम के आने के बाद इनका कुनबा बढ़कर 7 हो चुका है। इससे पहले जू प्रबंधन सफेद बाघ सोनम और सुल्तान की ब्रीडिंग कराता था। लेकिन उसके दूसरे जू चले जाने से सुल्तान अकेला पड़ गया था। इस बीच उसकी दोस्ती जू की नई बाघिन रोमा के साथ हुई। इस जोड़े को एक साथ बाड़े में रखा गया। उनकी ब्रीडिंग करवाई गई। यह प्रयोग सफल रहा और जू में फिर से सफेद बाघ का कुनबा बढ़ने लगा है। यह पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र होगा।
1998 में लाए गए तरुण तापसी ने बढाया कुनबा
दरअसल साल 1998 में मैत्री बाग में पहली बार सफेद बाघ भिलाई लाए गए। भुवनेश्वर स्थित नंदन कानन चिडिय़ा घर से मैत्रीबाग में सफेद बाघ व बाघिन (तरुण-तापसी) का जोड़ा लाया गया था। भिलाई के टाउनशिप क्षेत्र और मैत्री बाग का वातावरण इन बाघों को भा गया। जिसके बाद इनके प्रजनन के सफलतम प्रयास किए गए। प्राकृतिक माहौल, वातावरण व अच्छी देख-रेख की वजह से सफेद बाघ का कुनबा बढ़ने लगा। यहां से कई शावक व बाघ चेन्नई, कलकत्ता, दिल्ली, गुजरात,महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के अनुसार एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत भेजे गए हैं।












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