Swachh Survekshan 2022 में छत्तीसगढ़ का पाटन इस तरह बना नम्बर वन, जानिए 5 प्रमुख कारण
Swachh Survekshan 2022, छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला एक बार फिर देश भर में सुर्खियों में है। क्योंकि दुर्ग जिले के पाटन ने स्वच्छता सर्वेक्षण में ईस्ट जोन रैंकिंग में पहला स्थान हासिल किया है। इसी तरह पाटन नगर पालिका ने एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के स्वच्छता सर्वेक्षण में देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। कलेक्टर ने दुर्ग जिले की इस सफलता के 5 बड़े कारण बताएं है।

स्वच्छता रैंकिंग में सुधार के 5 प्रमुख कारण
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर ने यह पुरस्कार प्राप्त किया। कलेक्टर ने अपने अनुभव साझा किये। इसके साथ ही उन्होंने इस सफलता की समीक्षा की और जिले में स्वछता के रैंकिंग में सुधार के 5 प्रमुख कारण बताए। कलेक्टर ने जिले के सभी नगरीय निकायों को स्वच्छता के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए बधाई दी है।

प्लास्टिक वेस्ट कम करने, बर्तन बैंक की शुरुआत
दुर्ग के ग्रामीण इलाकों में प्लास्टिक वेस्ट को समाप्त करने के लिए शादी, पार्टी जैसे आयोजनों में प्लास्टिक के पत्तलों का इस्तेमाल अधिक होता है। प्लास्टिक से प्रदूषण तो फैलाता ही बल्कि गांव की सुंदरता भी खराब करती हैं। पेड़ों के पत्तों के दोना पत्तल का चलन लगभग समाप्त हो चुका है। आयोजनों के पश्चात ग्रामीण इसे खुले में फेंक देते थे। जिला प्रशासन महिला समूह के माध्यम से बर्तन खरीदे और समारोहों पर किराये से देना आरंभ किया। इससे समूह की महिलाओं की आय बढ़ी और प्लास्टिक वेस्ट पूरी तरह से रूक गया। अभी तक पूरे जिले में 50 से अधिक गांवों में बर्तन बैंक आरंभ हो चुके हैं।

गांवो में चलाया गया सुजलम अभियान
दुर्ग के गांवो में गंदे पानी को फिर से भूमि में डालकर भूमिगत जलस्तर को बढाने और वर्षा जल को संग्रहित करने की शुरुआत की गई। इसके लिए दुर्ग के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सुजलम अभियान के तहत सोकपीट बनाये गये। गांव में घरों से निकलने वाले गंदे पानी को भूमि में पुनः डालकर उसे व्यर्थ होने से बचाया गया। इसके लिए लगभग 3000 सोकपीट बनाये गये। इससे स्वच्छता कार्य को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिली।

घुरूवा योजना से घरेलु कचरे का सही इस्तेमाल
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा नरवा, गरुवा, घुरूवा, बाड़ी योजना लाये जाने से लोग घुरूवा की परम्परा को अपनाने लगे हैं। इसके तहत घरों से निकलने वाले कचरे को कंपोस्ट खाद बनाया जा रहा है। पशुओं के गोबर और घर से निकलने वाले गीले कचरे को घर में ही खाद बनाकर बागवानी या कृषि में उपयोग करने से गांवों की स्वच्छता में सुधार हो रहा है। घुरूवा की परंपरा लौटने पाटन ब्लाक के गांव स्वच्छ हो रहे हैं।

स्वच्छता कमांडो और दीदियों के प्रयास ने बनाया नंबर वन
इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ सबसे निचले अमले का रहा। इन्होंने लोगों को लगातार स्वच्छता के लिए प्रेरित किया और इसके अच्छे नतीजे सामने आये। स्वच्छता के क्षेत्र में पूर्व में भी रिसामा, तर्रीघाट, पतोरा आदि को पुरस्कृत किया जा चुका है। पाटन के नगर पंचायत अध्यक्ष भूपेंद्र कश्यप ने बताया कि 15 वार्डो में लगभग 45 स्वच्छता कमांडो और दीदियों को गांव गांव जाकर स्वच्छ्ता जागरूकता लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। जिसका असर देखने को मिला है।

पतोरा में बना छत्तीसगढ़ का पहला एफएसटीपी प्लांट
सामान्य तौर पर मल जल शोधन संयंत्र (Faecal Sludge Treatment Plant) शहरों में लगाया जाता है। लेकिन पाटन क्षेत्र के ग्राम पतोरा में छत्तीसगढ़ का पहला FSTP आरंभ हुआ है। इससे स्लज ट्रीटमेंट की सुविधा ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध हुई है। गांव के मल जल को स्वच्छ करके पुन कृषि में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में इन्होंने प्राप्त किया सम्मान
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शालिनी यादव, उपाध्यक्ष अशोक साहू एवं जिला पंचायत सीईओ अश्विनी देवांगन ने यह सम्मान ग्रहण किया। आज जिला पंचायत सीईओ देवांगन ने कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा से सम्मान समारोह के अपने अनुभव साझा किये। कलेक्टर ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए स्वच्छता के क्षेत्र में इसी तरह से बढ़िया कार्य करने कहा।
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