हाईकोर्ट आदेश : 14 साल की युवती को 27 सप्ताह के गर्भ से मिलेगी मुक्ति, CIMS के डॉक्टरों को सौंपी जिम्मेदारी

अपने ही रिश्तेदार के दुष्कर्म का शिकार हुई युवती ने अनचाहे गर्भ से मुक्ति के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। जिस पर हाईकोर्ट के जस्टिस पी सैम कोशी ने नाबालिक युवती को अबॉर्शन कराने की अनुमति दे दी है।

बिलासपुर, 24 जुलाई। अपने ही रिश्तेदार के दुष्कर्म का शिकार हुई युवती ने अनचाहे गर्भ से मुक्ति के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। जिस पर हाईकोर्ट के जस्टिस पी सैम कोशी ने नाबालिक युवती को अबॉर्शन कराने की अनुमति दे दी है। दरअसल, अपने ही रिश्तेदार के दुष्कर्म की शिकार पीड़ित बच्ची गर्भवती होने के बाद से अबॉर्शन कराने के लिए भटक रही थी। लेकिन वकीलों की सलाह पर युवती की मां ने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने उसका मेडिकल जांच कराया, जिसमें डॉक्टरों ने युवती को अबॉर्शन के लिए उपयुक्त बताया। अब CIMS ( छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) के डॉक्टरों की देखरेख में 27 सप्ताह की प्रेग्नेंसी को खत्म करने की मेडिकल प्रक्रिया की जाएगी।

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रिश्तेदार ने ही बनाया था हवस का शिकार
जानकारी के अनुसार, 14 साल की लड़की को उसके ही रिश्तेदार ने बहलाकर प्रेमजाल में फंसा लिया था। इस दौरान उसे शादी करने का झांसा देकर रिश्तेदार युवक ने दुष्कर्म किया। लगातार दुष्कर्म करने के बाद जब लड़की प्रेग्नेंट हुई तब दुष्कर्म का मामला सामने आया।

स्वास्थ्यगत कारणों से नही कराया था अबॉर्शन
हाईकोर्ट में दायर याचिका में बताया गया कि जिस रिश्तेदार युवक ने दुष्कर्म किया। उसके खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। लेकिन, नाबालिग को अनचाहे गर्भ से अब तक छुटकारा नहीं मिल सका था। लड़की के स्वास्थ्य कारणों से परिजन भी उसकी डिलीवरी कराने के लिए राजी नहीं थे। इस स्थिति में लड़की का अबॉर्शन कराने के लिए परिजन भटकते रहे थे। इसके चलते अब लड़की 27 हफ्ते के गर्भावस्था में पहुंच गई। याचिका में लड़की को अनचाहे गर्भ से मुक्ति दिलाने का आग्रह किया गया। कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रेग्नेंट लड़की और परिजनों को बड़ी राहत मिली है।
CIMS की मेडिकल रिपोर्ट के बाद दी अनुमति
इस केस की प्राथमिकता से सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस पी.सैम कोशी की सिंगल बेंच ने प्रेग्नेंट लड़की का मेडिकल जांच कराने का आदेश दिया था। साथ ही CIMS के विशेषज्ञ डॉक्टरों को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा था। डॉक्टरों ने लड़की की जांच की और रिपोर्ट में बताया कि 27 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को मेडिकल टर्मिनेट किया जा सकता है। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही हाईकोर्ट ने लड़की का अबॉर्शन करने की अनुमति दी है। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है कि CIMS के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लड़की का अबॉर्शन करे। कोर्ट ने लड़की के स्वास्थ्य को देखते हुए सावधानी से प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करने का निर्देश दिया है।

विशेष परिस्थितियों में मिलती है गर्भपात कराने की अनुमति
इस मामले में डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य तौर पर कानून में विशेष परिस्थितियों में 24 सप्ताह तक गर्भ गिराने की अनुमति मिलती है। इसके बाद भी विशेष प्रकरणों में कोर्ट के आदेश और मेडिकल परीक्षण कराने के बाद कोर्ट के आदेश पर अबॉर्शन किया जाता है। केरल हाईकोर्ट ने एक दिन पहले ही एक नाबालिग युवती के 30 सप्ताह का गर्भ गिराने का आदेश दिया है।

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