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Durg: शांति भोज में खिलाया मीठा, समाज ने किया बहिष्कृत, महिला आयोग ने प्रतिनिधियों को लगाई फटकार

राज्य महिला आयोग ने दुर्ग में महिला आवेदिका के एक सामाजिक बहिष्कार के प्रकरण का निराकरण किया गया। जिसमें आयोग ने समाज को आवेदिका को समाज में शामिल करने और पैसे वापस करने के निर्देश दिए।

Mahila Ayog cg

छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार के 4 साल पूरे हो चुके है। इस बीच महिला आयोग के माध्यम से राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक अपनी 6 वीं जनसुनवाई के तहत दुर्ग पहुंची। जहां एक सामाजिक मुद्दे पर सुनवाई करते हुए समाज को फटकार लगाई, और समाज को 24 घन्टे के भीतर परिवार को पैसे लौटने का फैसला सुनाया।

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परिवार ने शोक में खिलाया मीठा, तो समाज ने किया बहिष्कृत
इन प्रकरणों में एक सामाजिक मामला भी शामिल किया गया था। जिसमें आवेदिका को पारिवारिक शोक के दौरान शांति भोज में कलेवा (मीठा) खिलाए जाने पर समाज से बहिष्कृत कर दिया गया था। जिस पर समाज से अलग होकर जीवन यापन कर रही थी। जिसके बाद अपने परिजनों से मिलने आदि में समाज से विरोध किया गया। अवेदिका ने फिर आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

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समाज ने 17 हजार का अर्थदंड भी जमा कराया
इससे समाज में आना जाना बंद करा दिया गया था। जिसके बाद महिला ने समाज में मिलने आवेदन दिया। लेकिन समाज ने दंड स्वरूप 17 हजार रूपए का अर्थदण्ड देने की स्थिति में समाज में शामिल का निर्णय किया गया था। जिस पर आवेदिका द्वारा 17 हजार रूपए की राशि समाज के सदस्यों को प्रदान की गई थी। जिसमें 5 हजार रूपए रसीद की प्रति भी उसके द्वारा जनसुनवाई में प्रदर्शित की गई और उसने बताया कि 12 हजार रूपए की रसीद उन्हें नहीं दी गई।

24 घन्टे के भीतर पैसा वापस कर समाज
इस मामले पर सुनवाई करते हुए आयोग ने समाज के इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए, समाज के प्रतिनिधियों को समझाईश दी गई, की 24 घण्टे के भीतर आवेदिका को 17 हजार रूपए वापस किया जाए। इसके साथ-साथ सामाजिक बहिष्कार के निर्णय को भी वापस लें। एवं प्रतिनिधियों को इस प्रकार की नीतियों पर विराम लगाने के निर्देश दिए। जिस पर समाज ने आयोग की बात स्वीकार की।
पुनः आयोग को सूचित करेंगी पीड़िता
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ.किरणमयी नायक ने आवेदिका को उनके अधिकारों से अवगत कराते हुए बताया कि इसके बाद भी यदि समाज उन्हें बहिष्कृत करता है, तो वे पुनः आयोग में इसकी शिकायत कर सकते हैं। समाज के प्रतिनिधियों द्वारा पीड़ित पक्ष के लिए गए निर्णय का प्रमाण के रूप में दस्तावेज भी आयोग के पास जमा किए जाएंगे। प्रमाण प्राप्त होने पर आवेदिका के प्रकरण को नस्तीबद्ध किया जाएगा।

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