दुर्ग: कर्ज में डूबे निगमों में वित्तीय व्यवस्था बदहाल, बढ़ रही निगमों की संख्या लेकिन घट रही सुविधाएं

छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में विद्युत देयक भुगतान का बोझ बढ़ता जा रहा है। समय-समय पर सरकार इसे जमा भी कराती है। लेकिन इसके बाद भी नगरीय निकाय राजस्व वसूली नहीं होने का बहाना बनाकर बिजली बिल भुगतान से बचती नजर आती है।

दुर्ग, 22 जुलाई। सरप्लस बिजली वाले छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में विद्युत देयक भुगतान का बोझ बढ़ता जा रहा है। समय-समय पर सरकार इसे जमा भी कराती है। लेकिन इसके बाद भी नगरीय निकाय राजस्व वसूली नहीं होने का बहाना बनाकर बिजली बिल भुगतान से बचती नजर आती है। दुर्ग जिले के चार नगरीय निकायों में देनदारियों अगर बात करें तो चारों नगर निगम में बिजली बिल भुगतान का बोझ बढ़ने लगा है। वहीं अन्य देनदारियों के कर्ज से भी निगम प्रबन्धन दबे हुए हैं।

nigam

निगमों में वित्तीय व्यवस्था ही बदहाल
दुर्ग जिले के चार नगर निगमों की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। निगमो में मूलभूत सुविधाए ही कर्जे में दबी हुई है। जी हां अब तक आपने कर्ज से बंद होती कंपनियां देखी है। लेकिन अब नगर निगम प्रशासन को भी कर्ज में डूब गया है। जिले के दुर्ग भिलाई चरोदा और रिसाली नगर निगम तो बन गए लेकिन यहां वित्तीय प्रबंधन व्यवस्था आज भी बद से बदतर है। जिसका परिणाम है कि आज इन निकायों में 80 करोड़ रुपये से भी अधिक बिजली बिल का भुगतान नहीं किया गया है।
निगम बन गए चार लेकिन सुविधाएं नही
दुर्ग जिले में नगरीय निकायों की संख्या तो बढ़ रही है। लेकिन मूलभुत सुविधाओ के लिए पैसा जुटाने में आज भी निगम प्रशासन फैल शाबित हो रही है । जिसका मुख्य कारण वित्तीय कुप्रबंधन सम्पत्तिकर व अन्य करों के माध्यम से आय में कमी को माना जा सकता है। भिलाई से अलग होकर रिसाली निगम बना, चरोदा नगर पालिका को सरकार ने निगम बनाया, दुर्ग और भिलाई में भी आबादी तेजी से बढ़ती जा रही है जिनके जिनके विकास कार्यों के लिए शहर के विकास कार्यों के लिए निगम प्रशासन को राज्य सरकार और केंद्र सरकार की योजनाओं की राशि का इंतजार करना पड़ता है।
मूलभूत सुविधाओं में ही मारी डंडी
अब सड़क पानी, सफाई और बिजली जैसी सुविधाओ को भी बिना कर्ज के के शहर की जनता को उपलब्ध करा पाना संभव नही है। क्योंकि निगम के संचित निधि, पर्यावरण मद, ब्याज मद, अधोसंरचना जैसे मदों के लिए निगम का खजाना खाली है। जिसका असर निगम की स्थापना व्यय या फिर शहर के विकास कार्यों में साफ देखने को मिलता है। निगम सम्पत्तिकर के पैसे से सिर्फ अपने कर्मचारियों का भुगतान ही कर पाता है। वहीं निगम को शहर के विकास कार्यों के लिए राज्य सरकार व केंद्र सरकार के 14 वे व 15 वे वित्त की राशि का इंतजार करना पड़ता है।
ये निगम सीएसपीडीसीएल के बने कर्जदार
बिजली बिल की अगर बात करें तो जिले में चार नगर निगम क्षेत्र है। जिनमे दुर्ग में सबसे अधिक 50 करोड़ रुपए का बिजली बिल बकाया है , दूसरे नम्बर पर भिलाई है। जहां 21 करोड़ 65 लाख का बिल बकाया है। चरोदा निगम में 2 करोड़ 31 लाख और नवनिर्मित रिसाली निगम में 59 लाख रुपए का बिजली बिल बकाया है। भिलाई नगर निगम में ही सिर्फ 69 करोड़ रुपए की देनदारी है। सभी निकायों में बिजली का बिल भुगतान के साथ, ठेकेदारों के भुगतान, जलकर का भुगतान बकाया है।

चारो निकायों में 110 करोड़ का कर्ज
सीएसपीडीसीएल के मुख्य अभियंता एस जामुलकर बतातें हैं कि इस तरह चरोदा, रिसाली और दुर्ग मिलाकर चारो निकायों पर लगभग 110 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज है। जब भुगतान की राशि अधिक हो जाती है। तब सीएसपीडीसीएल निगम क्षेत्र में नए बिजली कनेक्शन रोकने व बिजली काटने की कार्यवाई भी करता है। तब महापौर द्वारा राज्य सरकार से मदद की गुहार लगाई जाती है।अब तक दो बार राज्य सरकार ने दुर्ग जिले के निकायों को 10 - 10 करोड़ रुपए दिए हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+