छत्तीसगढ़ : शिक्षक हड़ताल में, गांव के युवाओं ने संभाली जिम्मेदारी, स्कूलों में बने टीचर, कहा हम हैं ना

छत्तीसगढ़ में इन दिनों शिक्षक और सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। सरकारी कर्मचारियों ने जहां 5 दिन के हड़ताल की घोषणा की है। वही शिक्षकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। हड़ताल का आज पांचवा दिन है।

दुर्ग 29 जुलाई। छत्तीसगढ़ में इन दिनों शिक्षक और सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। सरकारी कर्मचारियों ने जहां 5 दिन के हड़ताल की घोषणा की है। वही शिक्षकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। हड़ताल का आज पांचवा दिन है। इस बीच स्कूलों में बदहाल होती शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने गांव के ही पढ़े-लिखे युवाओं ने जिम्मेदारी संभाल ली है।

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गांव के युवक, युवतियों ने संभाली जिम्मेदारी
हड़ताल के दौरान परेशान हो रहे बच्चों और पालकों की समस्या को देखते हुए। दुर्ग जिले की गाड़ाडीह में प्रबंधन समिति ने युवाओं को प्रेरित कर मिडिल व हाई स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का आग्रह किया। जिसके बाद युवा खुद बच्चों को पढ़ाने निकल पड़े और अब स्कूलों में बच्चो की नियमित कक्षाएं ले रहे हैं। बेमेतरा जिले में 1295 स्कूल है,25 जुलाई से विभिन्न मागो को लेकर शिक्षकों के हड़ताल में चले जाने के कारण पूरी तरह से स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो गई है इसी बात को ध्यान में रखते हुए बेमेतरा ब्लाक के अंतर्गत आने वाले ग्राम नरी के पढ़े-लिखे युवाओं ने स्वयं पहल करते हुए स्कूल की व्यवस्था संभाली है ग्राम पंचायत नरी के युवा सरपंच और गांव के युवा कक्षा 1 से लेकर 10वीं तक की लगभग 300 विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं ताकि हड़ताल के चलते इन स्कूली बच्चों की पढ़ाई प्रभावित ना हो, गांव के 11 युवाओं के द्वारा अपनी सेवाएं देने से स्कूल की नियमित कक्षाएं लग रही है।

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आने वाले माह में है परीक्षा
दरअसल आने वाले माह में बच्चों की परीक्षा होनी है। अपने त्रैमासिक परीक्षा को लेकर बच्चे सिलेबस कंप्लीट करने की जद्दोजहद में लगे लेकिन स्कूल से शिक्षक गायब होने के कारण उन्हें परेशान होना पड़ रहा है इस बीच जिले के कुछ स्कूलों में गांव के युवाओं नहीं बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली है।

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कोरोना महामारी के दौरान भी संभाली थी जिम्मेदारी
गाड़ाडीह के उपसरपंच टोपेन्द्र वर्मा ने बताया कि कोरोना के कारण पढ़ाई के स्तर को कायम रखने के लिए मेरे गांव की युवक-युवतियां आगे आकर मेरे आह्वान को स्वीकार कर मेरा ही नहीं गांव के पढने वाले बच्चों का एवं पालकों का भी मान बढ़ाया।

ग्रामीणों ने की युवाओं की तारीफ
शिक्षकों की हड़ताल से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न होने देने के लिए पढ़े लिखे युवाओं ने खुद अध्यापन का जिम्मा संभाला हैं । स्कूल का ताला खोलकर बच्चों को पढ़ा रहे है। इन युवाओं की खूब प्रशंसा हो रही है। ग्राम गाड़ाडीह व तेलीगुंडरा में युवाओं ने अपने गांव के बच्चों का भविष्य गढ़ने में योगदान प्रदान करने स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ा रहे है। ग्राम तेलीगुंडरा में युवाओं के द्वारा हाईस्कूल के बच्चों को पढ़ा रहे हैं।हर विषय को पढ़ाने के लिए अलग-अलग आगे युवा आ रहे

गणित, विज्ञान विषय की कक्षाएं ले रहे युवा
गांव के बच्चों को पढ़ाने के लिए हर विषय पोस्ट ग्रेजुएट युवा शिक्षा दान कर रहे हैं। इनमें से अशोक कुमार मढरिया अध्यक्ष शाला प्रबंधन समिति ने हिन्दी एवं विज्ञान , भुवनेश्वरी चक्रधारी गणित , कविता यादव संस्कृत , रुकसान बानो अंग्रेजी प्रमिला चक्रधारी पहली से पांचवीं वाले बच्चों को सभी विषय , हिमांशु मढरिया गणित और बीच बीच में उपसरपंच टोपेन्द्र वर्मा भी आधे एक घंटे के लिए आते हैं।

महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग, हड़ताल पर शिक्षक
दरअसल छत्तीसगढ़ में इन दिनों हड़ताली सीजन चल रहा है। आने वाले साल में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारी और शिक्षक सरकार से सातवें वेतनमान और 34% महंगाई भत्ते की मांग कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें केंद्र सरकार के बराबर महंगाई भत्ता नहीं दिया जा रहा है। इससे उन्हें हर माह हजारों रुपए का नुकसान हो रहा है। इस मांग को लेकर शिक्षक हड़ताल पर हैं। लेकिन इस बीच शासकीय स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था ठप हो चुकी है।

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