छ.ग. में इंजीनियरिंग के प्रति छात्रों का रुझान बढ़ाने नए कोर्सेस पर फोकस, 5 साल में 15 कॉलेज हुए बंद

छत्तीसगढ़ के स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय दुर्ग में हर साल इंजीनियरिंग कॉलेज बंद करने के लिए क्लोजर एप्लीकेशन लगाते हैं। लेकिन इस बार एक भी कॉलेज नें क्लोजर एप्लीकेशन नहीं दिया है।

दुर्ग, 06अगस्त। छत्तीसगढ़ के इंजीनियरिंग की शिक्षा को लेकर युवाओं में रुचि कम होती जा रही है। जिसके चलते प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में स्टूडेंट्स के एडमिशन भी कम हो रहे हैं। जिसके कारण छत्तीसगढ़ के स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय दुर्ग में हर साल इंजीनियरिंग कॉलेज बंद करने के लिए क्लोजर एप्लीकेशन लगाते हैं। लेकिन इस बार एक भी कॉलेज नें क्लोजर एप्लीकेशन नहीं दिया है। जिससे माना जा रहा है कि कॉलेज प्रबंधन को इस साल बेहतर एडमिशन की उम्मीद है। कुछ कॉलेजों ने सीटें बढ़ाने के लिए आवेदन लगाया है।

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कॉलेजों को इस साल अच्छे एडमिशन की उम्मीद
प्रदेश में इंजीनियरिंग कॉलेजों प्रबन्धन को इस साल बेहतर एडमिशन की उम्मीद है। क्योंकि विश्विद्यालय ने अपने सिलेबस में बदलाव करते हुए नए कोर्स लॉन्च कर दिए हैं, वहीं पुराने ट्रेडिशनल कोर्स की सीटों को घटाया है। इस साल इंजीनियरिंग कॉलेज नए ऊर्जा के साथ नई शुरुआत करने की तैयारी में है।

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लॉकडाउन की मार झेलने वाले कई कॉलेज बंद
इंजीनियरिंग के प्रति युवाओं में कम होते क्रेज व बीते कोरोना काल में लॉकडाउन के चलते नुकसान झेलने वाले कई कॉलेजों ने अपना संस्थान बंद कर दिया है। कुछ साल से इंजीनियरिंग के प्रति छात्रों का रूझान घटने लगा था। जिसके कारण कई इंजीनियरिंग कॉलेज बंद भी हुए। वही इसका सबसे बड़ा कारण राज्य में इंजीनियरिंग के छात्रों को रोजगार नहीं मिलना है। इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल व आईटी के छात्र बेंगलुरु या फिर अन्य देशों में जाकर जॉब की तलाश करते हैं।

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फिर एक बार बढ़ रहा रुझान, विवि ने नए कोर्स किये डेवलप
अब इंजीनियरिंग फील्ड में फिर एक बार स्टूडेंट्स के रुझान आने की संभावना है। विशेषज्ञों के मुताबिक कई नए कोर्स शुरू करने का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। विद्यार्थी फिर इंजीनियरिंग की शिक्षा में दिलचस्पी ले रहे हैं। पीईटी व पीपीटी की परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र छात्राओं की संख्या भी बढ़ी है। इससे कालेज प्रबंधनों को उम्मीद है कि इस साल एडमिशन का ग्राफ बढ़ेगा। वही विश्वविद्यालय की ओर से भी कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं छात्रों को कोर्स में बदलाव कर वह हिंदी में इंजीनियरिंग के किताबों का प्रकाशन कर छात्रों की पढ़ाई को आसान बनाने का काम किया है।

पांच साल में 15 कॉलेज हुए बन्द, अब सीटें बढ़ाने की मांग
यूनिवर्सिटी के कुलपति से मिली जानकारी के अनुसार बीते 5 वर्षों में 15 संस्थान बंद हो चुके हैं हर साल 3 से 5 साल संस्थान बंद करने के आवेदन मिलते थे लेकिन इस बार क्लोजर के लिए एक भी आवेदन विश्वविद्यालय को नहीं मिला है। बल्कि इस साल कॉलेजों ने सीटें बढ़ाने की मांग रखी है कॉलेज की योग्यता के अनुसार सीटें बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी। यह सत्र इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए अच्छा साबित होगा। सीट इनटेक बढ़ाने-घटाने और नए कोर्स लॉन्च जैसे आवेदन मिल रहे हैं।
विवि से 31 अगस्त तक दी जाएगी सम्बद्धता
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने कॉलेजों को 31 जुलाई तक मान्यता प्रदान किया। इसे लेटर ऑफ एप्रूवल कहा जाता है। एलओए लेटर कॉलेज सीएसवीटीयू में देंगे। इस प्रक्रिया के बाद विवि से उन्हें संबद्धता दी जाती है। विश्वविद्यालय से संबद्धता मिलने के बाद तकनीकी शिक्षा निदेशालय काउंसलिंग की शुरुआत सितंबर के दूसरे हफ्ते तक करेगी। फिलहाल, डीटीई में अभी काउंसलिंग को लेकर अपडेट नहीं किया है।
कम्प्यूटर साइंस के नए कोर्स पर फोकस
प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में वर्तमान दौर के अनुसार सब्जेक्ट व कोर्सेस डिजाइन करने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। जैसे वर्तमान समय कंप्यूटर व रोबोटिक्स से सबंधित कोर्स का है इस बात को समझकर सभी कॉलेजों ने अपना पूरा फोकस उन कोर्सेस पर लगाया है, जिन्हें करने छात्र बाहरी प्रदेशों का रुख कर रहे थे।

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