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Bhilai Steel Plant प्रबंधन ने वाहनों में QR कोड किया अनिवार्य, ऐसा सिस्टम वाला देश का पहला संयंत्र

Bhilai Steel Plant स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की सबसे बड़ी इकाई है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में स्थित भिलाई इस्पात संयंत्र में प्रबंधन ने कर्मचारियों के प्रवेश के लिए एक नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब बीएसपी कर्मचारियों को संयंत्र के भीतर प्रवेश के लिए अपने वाहनों पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही बीएसपी देश का पहला संयंत्र होगा जहां क्यूआर कोड की व्यवस्था लागू की जा रही है। अब इसका विरोध करने वाले यूनियन नेताओ को भी इसका पालन करना होगा।

सितम्बर से लागू होनी थी क्यूआर व्यवस्था

सितम्बर से लागू होनी थी क्यूआर व्यवस्था

भिलाई स्टील प्लांट में यह व्यवस्था एक सितम्बर से शुरू की जानी थी। इसके लिए स्केनर भी मेन गेट में लगाए गए थे। लेकिन भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों यूनियनों के विरोध और तकनीकी कारणों से इसे सितम्बर में लागू नहीं किया जा सका था। भिलाई इस्पात संयंत्र में इसे अब सख्ती से लागू करने की तैयारी कर ली है। गुरुवार को क्यूआर कोड लगाने की शुरुआत की गई है जिसके तहत कर्मचारियों के प्रत्येक वाहनों में क्यूआर कोड लगाए जाएंगे ।

सप्ताह भर बाद प्रबंधन दिखाएगी सख्ती

सप्ताह भर बाद प्रबंधन दिखाएगी सख्ती

भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए शुरू किए गए इस क्यूआर कोड व्यवस्था को लागू करने के सेफ्टी व सीआईएसएफ के जवानों ने प्रवेश द्वारों में मोर्चा संभाल लिया। सेफ्टी विभाग का अमला मेन गेट में कर्मियों को क्यूआर कोड के बारे में समझाइश दे रहा है। बाकी विभागों में सीआईएसएफ के जवान क्यूआर कोड की महत्ता से कार्मिकों को अवगत करा रहे थे। लेकिन चेतावनी भी जा रही है कि अगले हफ्ते से इस पर सख्ती बरती जाएगी।

इसे लागू करने के पीछे प्रबंधन का क्या है उद्देश्य

इसे लागू करने के पीछे प्रबंधन का क्या है उद्देश्य

भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन इस व्यवस्था को लागू करने के पीछे अपना उद्देश्य कर्मचारियों की सुरक्षा को बता रहा है इसके साथ ही बीएसपी प्रबंधन संयंत्र के अंदर अज्ञात वाहनो के प्रवेश पर रोक लगाना चाहता है। भिलाई इस्पात संयंत्र में होने वाली चोरियों और हादसों को रोकने के लिए प्रबंधन कई तरीके अपना रहा है जिसके तहत वाहनों में की व्यवस्था शुरू की जा रही है। लेकिन यह सिस्टम उन कर्मचारियों के लिए मुसीहत बन गया है, जो भिलाई इस्पात संयंत्र से अधिकतर समय गायब रहते हैं या सिर्फ 4 से 5 घंटे की ड्यूटी करते हैं। इसके साथ ही अब तक कर्मचारी जिस वाहन का पेट्रोल अलाउंस ले रहे थे उस गाड़ी के डिटेल ही कंपनी के पास जमा करते थे। जब कर्मचारी किसी अन्य वाहन को लेकर संयंत्र के भीतर प्रवेश करता है तब सड़क हादसे या फिर यातायात के नियमों की अनदेखी करने पर उसे चिन्हित करना काफी मुश्किल होता है।

कर्मचारी यूनियन के नेता इसलिए कर रहे थे विरोध

कर्मचारी यूनियन के नेता इसलिए कर रहे थे विरोध

भिलाई इस्पात संयंत्र में सितम्बर माह से पहले की यूनियन नेताओं इसका विरोध शुरू कर दिया था। सबसे ज्यादा बीएसम यूनियन ने इसका विरोध किया तब उनका कहना है कि अंजान व्यक्ति मोबाइल से क्यूआर कोड को स्कैन कर उनकी निजी जानकारियां, पर्सनल नंबर, ग्रेड, पे स्लिप, अटेंडेंस, डिपार्टमेंट, वाहनों की जानकारी हासिल कर सकता है। प्रबंधन का कहना है कि दूसरा कोई भी स्कैनर इसे स्कैन नहीं कर सकेगा। प्रबंधन यूनियन नेताओ को इसके डाटा कलेक्शन को समझाया है।

ई-सहयोग एप से जनरेट करना होगा क्यूआर कोड

ई-सहयोग एप से जनरेट करना होगा क्यूआर कोड

भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्मिकों को क्यूआर कोड का महत्व के साथ-साथ उसे जनरेट करने की भी जानकारी दी जा रही है। बताया गया कि क्यूआर कोड के लिए कार्मिकों को ई सहयोग एप का इस्तेमाल करना होगा। जिसमें उन्हें उन सभी वाहनों के नंबर की जानकारी अपलोड करना होगा, जिसका इस्तेमाल वे प्लांट आने के लिए करते हैं।

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