कौन हैं इंजीनियर राशिद? जम्मू-कश्मीर के सांसद की तिहाड़ जेल में ट्रांसजेंडर कैदियों ने की धुनाई, क्या था मामला
तिहाड़ जेल से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जम्मू-कश्मीर के सांसद इंजीनियर राशिद (Engineer Rashid) के साथ ट्रांसजेंडर कैदियों ने मारपीट की है। इस घटना ने जेल सुरक्षा और सांसद की हालत को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि- आखिर विवाद इतना बढ़ा कैसे कि मारपीट की नौबत आ गई?
जानकारी के मुताबिक, जेल नंबर-2 में कैदियों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई। बात इतनी बढ़ गई कि इंजीनियर राशिद पर ट्रांसजेंडर कैदियों ने हमला कर दिया। जेल प्रशासन ने बीच-बचाव कर स्थिति को काबू में किया और राशिद की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

जेल प्रशासन का कहना है कि इस घटना में राशिद को सिर्फ हल्की चोटें आई हैं और हत्या की साजिश जैसी खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
जेल में क्यों हुआ विवाद?
सूत्रों के अनुसार, एक हफ्ते पहले तिहाड़ जेल नंबर 3 में राशिद और ट्रांसजेंडर कैदियों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। इसके बाद उनकी पिटाई कर दी गई। राशिद की पार्टी ने आरोप लगाया कि ट्रांसजेंडर कैदियों को 'उकसाया जाता है ताकि माहौल बिगाड़ा जा सके।' वहीं जेल अधिकारियों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि घटना मामूली झगड़े तक ही सीमित थी।
कब से जेल में हैं इंजीनियर राशिद?
राशिद 2019 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकी संगठनों को फंडिंग की। एनआईए (NIA) ने उन्हें 2017 के टेरर फंडिंग केस में गिरफ़्तार किया था। बाद में उन पर यूएपीए (UAPA) और देशद्रोह की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की गई।
राजनीति में बड़ा उलटफेर
जेल में रहने के बावजूद इंजीनियर राशिद ने 2024 लोकसभा चुनाव में कश्मीर की बारामूला सीट से बड़ा उलटफेर किया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और सज्जाद गनी लोन जैसे दिग्गज नेताओं को हराकर जीत हासिल की। उन्होंने यह चुनाव 2,04,000 से ज़्यादा वोटों के अंतर से जीता।
कौन हैं इंजीनियर राशिद?
शेख अब्दुल राशिद को लोग 'इंजीनियर राशिद' के नाम से जानते हैं। उनका जन्म कश्मीर के लंगेट में हुआ। 1988 में उन्होंने बीएससी की डिग्री ली और फिर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। इसके बाद करीब एक दशक तक जम्मू-कश्मीर प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन में इंजीनियर रहे। राजनीति में उनकी शुरुआत अब्दुल गनी लोन की पीपुल्स कॉन्फ्रेंस से हुई थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी अलग पार्टी -अवामी इत्तेहाद पार्टी - बनाई।
क्यों है मामला चर्चा में?
राशिद को बीते साल विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत भी मिली थी और संसद सत्र के दौरान उन्हें कस्टडी पैरोल दी गई थी। लेकिन तिहाड़ जेल में हुई ताज़ा घटना ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है। अब हर किसी के मन में यही सवाल है कि क्या ये महज कैदियों के बीच झगड़ा था या इसके पीछे कोई और साज़िश छिपी है?












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