कौन हैं जावेद अहमद सिद्दीकी? Al Falah University के चेयरमैन को कोर्ट ने ED की कस्टडी में भेजा

Who is Javed Ahmed Siddiqui: दिल्ली की एक अदालत ने अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को 13 दिनों की कस्टडी में सौंप दिया है। सिद्दीकी की गिरफ्तारी अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग, वित्तीय धोखाधड़ी और टेरर फंडिंग के गंभीर आरोपों की जांच के सिलसिले में की गई है।

ED ने सिद्दीकी को PMLA (धन शोधन निवारण अधिनियम) की धारा 19 के तहत 18 नवंबर को देर रात गिरफ्तार किया था। अदालत ने विस्तृत रिमांड आदेश में कहा है कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि सिद्दीकी ने बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और धन के विचलन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध किया है।

Al Falah Group Chairman Jawad Ahmed Siddiqui

कौन हैं जावेद अहमद सिद्दीकी?
जावेद अहमद सिद्दीकी का जन्म 15 नवंबर 1964 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। उन्होंने इंदौर की देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी से बीटेक किया और 1992 से 1994 तक जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में लेक्चरर भी रहे।

  • व्यावसायिक यात्रा: सिद्दीकी ने 1992 में अल फलाह इन्वेस्टमेंट कंपनी में निदेशक के रूप में कार्य करना शुरू किया और बाद में अल फलाह ट्रस्ट की स्थापना की। उनका व्यवसाय शिक्षा, सॉफ्टवेयर, वित्तीय सेवाओं और ऊर्जा क्षेत्र तक फैल गया।
  • अल फलाह यूनिवर्सिटी: सिद्दीकी अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी हैं, जिसकी स्थापना 1995 में हुई थी। यह ट्रस्ट फरीदाबाद के धौज गांव में 70 एकड़ में फैले अल फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस और अल फलाह मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन को संचालित करता है।
  • पुराना रिकॉर्ड: सिद्दीकी पर पहले भी वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं। साल 2000 में दक्षिण-पूर्व दिल्ली में निवेश धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था और 2001 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 2004 में निवेशकों का पैसा वापस करने की शर्त पर जमानत मिली थी।

जावेद अहमद पर प्रमुख आरोप:

  • 1. फर्जी मान्यता का दावा: ED ने कोर्ट को बताया कि अल-फलाह संस्थानों ने वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच शिक्षा संबंधी प्राप्तियों के रूप में लगभग 415.10 करोड़ रुपये जुटाए। जांच एजेंसी का तर्क है कि यह धन 'अपराध की आय' है क्योंकि यह ऐसे समय में एकत्र किया गया था जब विश्वविद्यालय अपनी मान्यता और वैधानिक स्थिति को सार्वजनिक रूप से गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहा था।
  • 2. धन का विचलन: आरोप है कि सिद्दीकी ने ट्रस्ट के पैसे को गलत तरीके से अपने परिवार की कंपनियों में भेजा। कंस्ट्रक्शन, कैटरिंग और अन्य सेवाओं के कॉन्ट्रैक्ट सीधे उनकी पत्नी और बच्चों की कंपनियों को दिए गए। मनी लॉन्ड्रिंग के लिए शेल कंपनियों का भी इस्तेमाल किया गया।
  • 3. परिवार का नियंत्रण: सिद्दीकी ने चैरिटेबल ट्रस्ट में अपनी पत्नी, बेटी और भाइयों को ट्रस्टी बना रखा है, जिससे यूनिवर्सिटी सीधे उनके कंट्रोल में है।

टेरर फंडिंग से कनेक्शन की जांच

सिद्दीकी की गिरफ्तारी में आतंकवाद को फंडिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले का भी कनेक्शन सामने आया है। दिल्ली ब्लास्ट और फरीदाबाद में विस्फोटक बरामदगी की जांच कर रही सुरक्षा एजेंसियां अल फलाह यूनिवर्सिटी के कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं।

'जकात' के नाम पर टेरर फंडिंग
सूत्रों के अनुसार, तब्लीगी जमात के माध्यम से 'जकात' के नाम पर शाहीन और आतंकवाद से जुड़े अन्य लोगों को टेरर फंडिंग की गई थी, जिसका इस्तेमाल आतंक के सामान खरीदने में हुआ। इस फंडिंग में कई मुस्लिम देशों की संस्थाएं भी शामिल बताई जा रही हैं। दिल्ली बम ब्लास्ट मामले में भी सिद्दीकी को पहले समन भेजा जा चुका था, लेकिन वह पेश नहीं हुए थे।

ईडी ने मंगलवार (18 नवंबर 2025) को अल-फलाह ग्रुप के 19 ठिकानों पर बड़ी छापेमारी की थी, जिसमें कई अहम दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और करीब 48 लाख रुपये कैश बरामद किए गए।

कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए और आगे की 'अपराध की आय' का पता लगाने, संपत्ति को जब्त करने और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को नष्ट होने से रोकने के लिए सिद्दीकी की हिरासत को अति आवश्यक माना है। क्राइम ब्रांच भी अब सिद्दीकी के पुराने वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों की दोबारा जांच कर रही है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+