आपको किस AC से है कोरोना वायरस संक्रमण का ज्यादा खतरा, जानिए
दिल्ली। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए देश में लगे लॉकडाउन के बाद केंद्र सरकार के निर्देश पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने लोगों को एयर कंडीशन के उपयोग के बारे में सावधान किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि घरों में एयरकंडीशन का उपयोग न करें क्योंकि इससे वातावरण में नमी होती है। उन्होंने ताजी हवा के लिए खिड़कियां खुली रखने की सलाह दी। एयरकंडीशन के उपयोग से कोरोना वायरस के फैल सकने की बात अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सामने आई। 6 मार्च को द टेलिग्राफ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर के नेशनल सेंटर फॉर इंफेक्शस डिजीज के वैज्ञानिकों ने एक हॉस्पिटल में रिसर्च किया जहां कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज चल रहा था। जांच करने पर हॉस्पिटल के एयर कंडीशन के वेंटिलेशन एग्जॉस्ट में कोरोना वायरस मिला। इसके बाद उन्होंने यह आशंका जाहिर की कि एयर कंडीशनिंग सिस्टम से बिल्डिंग स्पेस में संक्रमण का खतरा हो सकता है। ऐसा ही एक रिसर्च चीन में भी हुआ।

सिंगापुर और चीन के वैज्ञानिकों ने क्या कहा?
सिंगापुर के वैज्ञानिकों ने कहा कि कोरोना वायरस के हल्के संक्रमण से पीड़ित मरीजों के कमरे के एयर एग्जॉस्ट में भी कोविड-19 के सबूत मिले जिससे पता चलता है कि हवा के जरिए यह वायरस युक्त सूक्ष्म बूंदे एयर एग्जॉस्ट तक गई होंगी। चीन में भी एक रेस्टोरेंट की स्टडी के बाद रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया कि एयर कंडीशन वेंटिलेशन के जरिए कोरोना वायरस युक्त बूंदों का प्रसार हुआ जिससे लोग संक्रमित हुए। इस स्टडी में कहा गया कि एयर कंडीशन वाले स्पेस में वायरस युक्त सूक्ष्म बूंदे हवा में जाकर एक मीटर से ज्यादा दूरी तक भी जा सकती हैं और अन्य लोगों को संक्रमित कर सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस बारे में गाइडलाइन्स जारी कर दी। संगठन ने कहा कि एसी के जरिए वायरस फैल सकता है। लॉकडाउन होने के बाद देश में महाराष्ट्र और गुजरात जैसे अधिक संक्रमित राज्यों में एसी से संबंधित एडवाइजरी जारी की गई। अब इससे सवाल यह उठा कि क्या सच में एयर कंडीशनर के उपयोग से कोरोना वायरस का प्रसार होता है?

सरकारी एजेंसी पीआईबी के मुताबिक...
गर्मी से बचने के लिए घर में एसी चलाने से कोरोना वायरस के फैलने के दावे के बारे में देश की सरकारी एजेंसी पीआईबी के फैक्ट चेक ट्विटर हैंडल से यह बताया गया कि यह मामला थोड़ा जटिल है। विंडो एसी का इस्तेमाल ठीक है लेकिन सेंट्रल एयर कंडीशन का उपयोग ठीक नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि विंडो एसी के उपयोग से कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा तब तक नहीं है जब तक लोग घर में रह रहे हैं। लेकिन सेंट्रल एयर कंडीशन से कोरोना वायरस का संक्रमण उस स्पेस में कहीं भी फैल सकता है जहां यह लगा है। इस मामले को और स्पष्ट रूप से समझने के लिए आगे पढ़िए।

कोरोना वायरस हवा में ज्यादा देर नहीं टिकता!
आईआईटी बॉम्बे के एक विशेषज्ञ संबुद्ध चौधरी ने द प्रिंट से बात करते हुए इस बारे में कहा कि कोरोना वायरस सामान्य वायरस की तरह नहीं है जो हवा में टिका रहता है। अगर कोरोना वायरस संक्रमित छींकते हैं तो उसके स्प्रे से जो सूक्ष्म बूंदें निकलती हैं, वह ज्यादा देर तक हवा में ठहर कर नहीं रहती। कोविड-19 युक्त वह बूंदें थोड़ी देर हवा में रहकर किसी सतह पर जाकर टिक जाती हैं और बहुत समय तक वहीं रहती हैं। यही कोरोना वायरस की खासियत है जिसके आधार पर विशेषज्ञ बताते हैं कि घर का विंडो एसी सुरक्षित है और सेंट्रल एसी असुरक्षित।

विंडो एसी VS सेंट्रल एसी
विशेषज्ञ संबुद्ध चौधरी का कहना है कि अगर घर में कोई कोरोना संक्रमित नहीं है तो विंडो एसी के इस्तेमाल से कोई खतरा नहीं होना चाहिए क्योंकि कोरोना वायरस हवा में ज्यादा देर नहीं टिकता इसलिए यह बाहर से हवा के जरिए घर के अंदर नहीं आ सकता। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के अंदर से निकलकर किसी सतह पर बैठ जाता है। लेकिन सेंट्रल एयर कंडीशन का उपयोग जहां होता है वहां किसी सतह पर टिकने से पहले यह वायरस रिसायकल हो रही हवा के साथ तेजी से फैल सकता है।

महामारी में ऐसी जगहों पर जाने से बचें
शॉपिंग मॉल्स, रेस्टोरेंट, अपार्टमेंट बिल्डिंग, ऑफिस जैसी जगहों में सेंट्ल एसी का इस्तेमाल होता है, वहां काफी लोग होते हैं। अगर संक्रमित व्यक्ति उस स्पेस में छींकता है तो वायरस युक्त सूक्ष्म बूंदे रिसायकल हो रही हवा में फंसकर कम समय में तेजी से दूसरों तक फैल सकता है। इसलिए सेंट्रल एसी में कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा ज्यादा है, वहीं विंडो एसी में यह खतरा न के बराबर है। सेंट्रल एसी जहां लगा हो वैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर महामारी के समय जाने से बचें क्योंकि वहां संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने का भी खतरा ज्यादा है।












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