दिसंबर में लगातार पड़ रही भीषण सर्दी की असली वजह जानिए, भविष्य में और भी खराब होगा मौसम का मिजाज

दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत में भीषण सर्दी ने बरसों के रिकार्ड तोड़ दिए हैं। सामान्य तौर पर हर साल पांच-छह दिन चलने वाली भीषण सर्दी इस बार दिसंबर में लगातार कई दिनों से जारी है। इसने मौसम वैज्ञानिकों को भी चौंका दिया है और इसे वह असामान्य घटना मान रहे हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान को इसने बुरी तरह से प्रभावित किया है। इन प्रदेशों में कई लोगों की जानें जा चुकी हैं। शनिवार को दिल्ली में तापमान 2.4 डिग्री तक पहुंच गया, इसके और नीचे जाने के अनुमान हैं। सीकर में पारा लुढ़ककर माइनस 4 डिग्री पर पहुंच गया। मौसम विभाग के मुताबिक, 22 सालों बाद दिल्ली में ऐसी सर्दी पड़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार जबर्दस्त वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (western disturbance) यानि पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता में अंतर की वजह से दिसंबर में उत्तर भारत ठंड से बुरी तरह ठिठुर रहा है और इसका असर नए साल की शुरुआत में भी जारी रहने के अनुमान है। पश्चिमी विक्षोभ है क्या और इस बार यह इतना खौफनाक क्यों हो गया है?

पश्चिमी विक्षोभ: हर साल आता है तूफान

पश्चिमी विक्षोभ: हर साल आता है तूफान

नक्शे में भूमध्य सागर (mediterranean sea) को आप देख सकते हैं, वहां से ठंडी हवाओं का तूफान हर साल उठता है जिसको पश्चिमी विक्षोभ कहा जाता है। इस तूफान की वजह से भारत के कई क्षेत्रों में जाड़े की बारिश होती है। पश्चिमी विक्षोभ रबी की फसलों के लिए काफी फायदेमंद होता है। गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए यह बहुत आवश्यक है। लेकिन इस बार सर्दी के मौसम में दिल्ली समेत उत्तर भारत में यह पश्चिमी विक्षोभ कहर ढा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बार पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता में असंतुलन है इसलिए यह विलेन बन गया है।

आखिर क्यों पश्चिमी विक्षोभ इस बार बना विलेन?

आखिर क्यों पश्चिमी विक्षोभ इस बार बना विलेन?

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के इस खतरनाक रूप के पीछे ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण व कोहरे से बना स्मॉग है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर राजेंद्र जेनामणि का कहना है कि सिंधु-गंगा के मैदान (फोटो में देखिए) के ऊपर स्मॉग यानि धुआं युक्त कोहरे की मोटी परत जमी है और ग्लोबल वार्मिंग की वजह से भारत के समुद्र का तापमान भी असंतुलन का शिकार है। इन दोनों कारणों से इस बार पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता में इस बार अंतर आ गया है। धरती के वातावरण में तापमान की वृद्धि को ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं जिस वजह से जलवायु में भी परिवर्तन हो रहे हैं। जलवायु परिवर्तन से कहीं बहुत ज्यादा सर्दी, कहीं बहुत ज्यादा बारिश, कहीं बहुत ज्यादा गर्मी तो कहीं सूखे की स्थिति बनती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से भारत में लोगों को भविष्य में इससे भी ज्यादा खराब मौसम का सामना करना पड़ सकता है।

उत्तर भारत में बढ़ेगी सर्दी, मध्य व दक्षिण भारत में गर्मी

उत्तर भारत में बढ़ेगी सर्दी, मध्य व दक्षिण भारत में गर्मी

मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन से पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता में अंतर आया है जिससे आने वाले वर्षों में उत्तर भारत में तापमान और नीचे गिर सकता है। मध्य व दक्षिण भारतीय क्षेत्रों में गर्मी और ज्यादा बढ़ सकती है। सिंधु गंगा मैदान और हिमालय के क्षेत्र में भविष्य में मौसम और ज्यादा खराब होने के आसार हैं। इन क्षेत्रों में पूरा उत्तर भारत शामिल है। जंगल क्षेत्र का कम होना जलवायु परिवर्तन के लिए कई जिम्मेदार वजहों से एक है। ग्रीनहाउस गैस जैसे कार्बन डायऑक्साइड, मीथेन, ओजोन के साथ-साथ वातावरण में पीएम10 और पीएम 2.5 जैसे कणों के उत्सर्जन से वातावरण और ज्यादा खराब हो रहा है।

कैसे होगा वातावरण और भी खराब?

कैसे होगा वातावरण और भी खराब?

इसी बात को आगे बढ़ाते हुए जलवायु परिवर्तन शोध संस्थान (ccpr) के वैज्ञानिक डॉक्टर भूपिंदर बी सिंह कहते हैं कि ज्यादा प्रदूषण से ज्यादा स्मॉग होगा, इससे पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता में असंतुलन होगा जिसकी वजह से मौसम और भी ज्यादा खराब होगा। इसका सीधा दुष्प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जिनको इसका सामना करना पड़ेगा। फिलहाल दिसंबर में पड़ी रही इस भीषण सर्दी के 31 दिसंबर के बाद ही कम होने के अनुमान हैं।

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