गूगल का इस्तेमाल कर 12वीं पास ने हजारों लोगों को ठगा, रहें ऐसी फर्जी सरकारी वेबसाइटों से सावधान

दिल्ली, 7 अक्टूबर। इंटरनेट का इस्तेमाल कर लोगों से पैसों की ठगी का जाल ऐसा बिछा है कि हर दिन कई लोग उनका शिकार होते हैं। फर्जी वेबसाइट के जरिए लोगों को ठगने, उनका लॉग इन पासवर्ड समेत अन्य जानकारियां चुराने को फिशिंग कहते हैं। 12वीं पास एक शख्स परिवहन विभाग की फीशिंग वेबसाइटों के जरिए लोगों को चूना लगा रहा था लेकिन अब वह दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में है। उसने परिवहन विभाग की कई फर्जी वेबसाइटें बनाई थीं जिसके जरिए वह सेवाओं का झांसा देकर पैसे लेता था। लोग वेबसाइट का पता देखकर उसके जाल में फंस जाते थे। इस शख्स ने ठगी के लिए गूगल का इस्तेमाल किया। अब वह जेल में है।

परिवहन विभाग को फर्जीवाड़े की लगी भनक

परिवहन विभाग को फर्जीवाड़े की लगी भनक

इस मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब परिवहन विभाग के अफसरों को पता चला कि कोई शख्स विभाग के नाम पर इंटरनेट पर फर्जीवाड़ा कर रहा है। इस बारे में दिल्ली पुलिस साइबर सेल के डीसीपी केपीएस मल्होत्रा ने जानकारी दी कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में अधिकारी पीयूष जैन ने शिकायत दी कि आरटीओ की नकली वेबसाइटों को जरिए लोगों से कोई पैसे ठग रहा है। शिकायत में बताया गया कि परिवहन विभाग के नाम से कई फर्जी डोमेन इंटरनेट पर हैं जैसे e-parivahanindia.online, www.roadmax.in, Sarathiparivahan.com

पुलिस ने जांच शुरू की

पुलिस ने जांच शुरू की

परिवहन विभाग के अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया और मामले की छानबीन शुरू कर दी। पहले इंटरनेट पर परिवहन विभाग के नाम से दर्ज फर्जी डोमेन के बारे में पता लगाया गया। इन वेबसाइटों के रजिस्ट्रेशन कराने वाले की जानकारी जुटाई गई। ठगी के शिकार होने वाले लोगों के बैंक स्टेटमेंट से यह पता लगाया कि पैसे किन खातों में जा रहे हैं। छानबीन के बाद पुलिस ने गाजियाबाद में ऑफिस खोलकर ठगी का रैकेट चलाने वाले 12वीं पास कपिल त्यागी को गिरफ्तार कर लिया। तीस वर्षीय कपिल त्यागी के बारे में पता चला कि उसने फर्जी कॉल सेंटर में काम किया था जहां से उसने ठगी के गुर सीखे थे।

गूगल का कैसे किया इस्तेमाल?

गूगल का कैसे किया इस्तेमाल?

गूगल में जब कोई सर्च करता है तो सबसे ऊपर एड के तौर पर कुछ लिंक्स पहले दिखते हैं। अक्सर लोग इनको सही मान लेते हैं जबकि ऐसा नहीं है। ऑनलाइन ठगी करने वाले शातिर अब गूगल एड्स का इस्तेमाल करने लगे हैं। कपिल त्यागी भी गूगल को एड्स देकर अपनी वेबसाइट को ऊपर में दिखा रहा था। लोग उसकी वेबसाइट पर क्लिक करते थे। इसके बाद कपिल त्यागी परिवहन विभाग की सेवाओं के बदले दस्तावेज और पैसे लेता था। जबकि वो कोई सेवा नहीं देता था। पुलिस के मुताबिक, कपिल त्यागी फर्जी सेवाओं के बदले तीन हजार रूपए तक ले लेता था। कपिल त्यागी के ऑफिस से बैंक के चेकबुक, सिम कार्ड, लैपटॉप, पेन ड्राइव समेत अन्य चीजें जब्त की गई हैं। उसके बैंक खातों का भी पता लगाया जा रहा है।

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