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SC On Delhi Pollution: दिल्ली की जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त, प्रदूषण से बचने का बताया आखिरी रास्ता

supreme court on Delhi Pollution: राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की समस्या अब एक गंभीर आपातकाल का रूप ले चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की जहरीली हवा से निपटने के लिए एक ठोस समाधान पेश किया है। अदालत ने शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को स्पष्ट किया कि केवल शॉर्ट टर्म उपायों से दिल्ली का दम घुटने से नहीं रोका जा सकता।

इसके लिए राजधानी के 'ग्रीन कवर' को बढ़ाना ही रास्ता है। प्रदूषण पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बेहतर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) की लड़ाई में 'ग्रीन कवर' का विस्तार सबसे अच्छा औप लॉन्ग टर्म समाधान है।

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कोर्ट ने इस मामले में वन अनुसंधान संस्थान (FRI), देहरादून द्वारा तैयार किए गए एक्शन प्लान पर सोमवार को विस्तृत सुनवाई करने का निर्णय लिया है।

Delhi Green Cove Target 25% से बढ़ा कर 33% तक का सफर

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की हरियाली को लेकर कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े और लक्ष्य साझा किए हैं। फिलहाल की स्थिति चिंता पैदा करने वाली है। 'इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023' के अनुसार, दिल्ली का कुल वन और वृक्ष आवरण 371.31 वर्ग किलोमीटर है, जो इसके कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 25% है।

FRI ने अदालत के समक्ष एक चरणबद्ध कार्य योजना पेश की है, जिसका लक्ष्य दिल्ली के ग्रीन कवर को बढ़ाकर 33% तक ले जाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने और दिल्ली के हर पेड़ की गिनती (Tree Census) करने में लगभग 4 साल का समय लगने का अनुमान है।

MC मेहता केस का हवाला, सुनवाई में देरी पर चिंता

वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु कृष्णकुमार ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली में हरित क्षेत्र बढ़ाने से जुड़ा मामला लंबे समय से लंबित है। उन्होंने प्रसिद्ध MC मेहता बनाम भारत संघ मामले का हवाला दिया, जिसमें फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) को दिल्ली में पेड़ों की गिनती (ट्री सेंसस) और ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए एक एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया था। हालांकि, मार्च 2025 में FRI द्वारा ड्राफ्ट योजना सौंपे जाने के बाद से इस मामले में कोई ठोस सुनवाई नहीं हो सकी।

Expert Committee Delhi में नई नियुक्ति: एमडी सिन्हा संभालेंगे कमान

दिल्ली सरकार को वनीकरण (Afforestation) और पेड़ों की उपयुक्त प्रजातियों के चयन पर सलाह देने के लिए बनी तीन सदस्यीय समिति में एक पद रिक्त था। पूर्व आईएफएस अधिकारी ईश्वर सिंह के एनजीटी (NGT) में चले जाने के बाद यह पद खाली हुआ था। कोर्ट ने हरियाणा कैडर के पूर्व आईएफएस अधिकारी एमडी सिन्हा को इस समिति का नया सदस्य नियुक्त किया है। अब वे सुनील लिमये और प्रदीप किशन के साथ मिलकर दिल्ली की हरियाली का खाका तैयार करेंगे।

अदालत ने पेड़ों की अवैध कटाई को रोकने और मौजूदा हरियाली के संरक्षण के लिए 'ट्री सेंसस' को अनिवार्य बताया है। इस जनगणना के लिए जियोस्पेशियल तकनीक (Geospatial Technology) और वैज्ञानिक विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। ग्रीनिंग प्रोजेक्ट के लिए ₹3.69 करोड़ और पेड़ों की मैपिंग व जनगणना के लिए ₹4.43 करोड़ का बजट प्रस्तावित है।

रिज क्षेत्र में बदलेगी दिल्ली, क्या होगा फायदा?

यह सुनवाई उस संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है जहां एक दिन पहले ही कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को दक्षिण दिल्ली के छतरपुर में अर्धसैनिक बलों के अस्पताल (CAPFIMS) के लिए सड़क चौड़ी करने हेतु 152 पेड़ काटने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जहां विकास अनिवार्य है, वहां अनुमति दी जाएगी, लेकिन उसकी क्षतिपूर्ति के लिए वैज्ञानिक तरीके से वनीकरण करना भी उतना ही जरूरी है।

FRI की रिपोर्ट में प्रस्ताव दिया गया है कि दिल्ली के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक स्टेयरिंग कमेटी बनाई जाए। इसमें केंद्र और दिल्ली सरकार के 19 विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिनका काम वनीकरण के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान करना होगा। दिल्ली की सांसें बचानी हैं तो हरियाली बढ़ाना अनिवार्य है, और इसके लिए सरकारों को ठोस, समयबद्ध और ईमानदार कदम उठाने होंगे।

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