सड़क का ट्रैफिक कम करने के लिए केंद्र सरकार ला रही है पॉड टैक्सी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार जल्द ही अपने महत्वाकांक्षी मेट्रिनो/पर्सनल रैपिड ट्रांजिट प्रोजेक्ट को एनसीआर में मूर्त रूप दे सकती है। यह जानकारी रविवार को केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मीडिया को दी।

सड़क का ट्रैफिक कम करने के लिए केंद्र सरकार ला रही है पॉड टैक्सी

केंद्र सरकार का है पायलट प्रोजेक्ट

केंद्र सरकार के इस पायलट प्रोजेक्ट की कीमत तकरीबन 800 करोड़ रुपए है। इसमें पैसेंजर्स को भारत में पहली बार ड्राइवरलेस पॉड का इस्तेमाल परिवहन में करने को मिलेगा। ये पॉड दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर से बादशाहपुर होते हुए राजीव चौक, इफको चौक और गुड़गांव के सोहना रोड तक जाएंगे। पहले चरण में 12.3 किलोमीटर तक खंभों के सहारे एक इलेक्ट्रिक तार पर इन पॉड की सर्विस ली जा सकेगी।

जानें क्या कहा नितिन गडकरी ने

नितिन गडकरी ने कहा,'हम 800 करोड़ के इस पायलट प्रोजेक्ट को एनएचएआई यानी नेशनल हाइवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया के साथ मिलकर चला अंजाम देंगे। मैंने शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू से इस संदर्भ में बात की है और यह तय हुआ कि इसे हम एनएचएआई एक्ट के तहत अमल में ला सकते हैं। इससे पहले यह तय नहीं था कि इसे ट्रामवेज़ के तहत पूरा किया जाए या फिर एनएचएआई एक्ट के तहत।'

सड़क का ट्रैफिक कम करने के लिए केंद्र सरकार ला रही है पॉड टैक्सी

सूत्रों की मानें तो ये पॉड 13 स्टेशनों से होकर गुजरेंगे और प्रत्येक पॉड में एक वक्त पर 5 लोग यात्रा कर सकेंगे। नितिन गडकरी ने कहा कि शुरुआती चार टेंडर मिल चुके हैं और वित्तीय निवेश संबंधी बोलियां जल्द ही लगाई जाएंगी।

ये चार कंपनियां आईं आगे

इसके लिए सड़क व परिवहन मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद इसपर काम शुरू हो जाएगा। भारत में पॉड सर्विस शुरू करने में चार ग्लोबल कंपनियों ने हाथ आगे बढ़ाए हैं। इनमें से एक कंपनी ने लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर पॉड टैक्सी सर्विस शुरू की थी। जबकि एक कंपनी यूएई, एक अमेरिका और एक पोलैंड से है। ऐसा माना जा रहा है कि शुरुआती चरण में 1100 पॉड टैक्सी इंस्टाल की जाएंगी।

इतना होगा प्रोजेक्ट का खर्च

इस ड्राइवरलेस पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट में कुल 4 हजार करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है। दिल्ली के धौलाकुआं से हरियाणा के मानसेर की 70 किलोमीटर दूरी को पहले जोड़े जाने पर जोर होगा।

जानिए क्या है पॉड टैक्सी

पॉड टैक्सी एक तार पर चलती हैं जिनमें करंट दौड़ता रहता है। ये तार खंबों के जरिए टंगे होते हैं। सड़क से ट्रैफिक के बोझ को कम करने के लिए ​इन पॉड टैक्सी को लगाया जाएगा। ये पूरी तरह से आॅटोमैटिक और ड्राइवरलेस पॉड होते हैं। ये जमीन से 5-10 मीटर की हाइट पर चलते हैं।

पॉड टैक्सी से संबंधित एक प्रेजेंटेशन कुछ दिनों पहले पीएम नरेंद्र मोदी और यूनियन कैबिनेट के सामने पेश की गई थी।

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