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Medha Patkar: मानहानि मामले में मेधा पाटकर गिरफ्तार, 24 साल पुराने केस में पुलिस ने की कार्रवाई

Medha Patkar: सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी 24 साल पुराने मानहानि के मामले में हुई, जो दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल वीके. सक्सेना द्वारा वर्ष 2000 में दायर किया गया था। यह कार्रवाई 23 अप्रैल को साकेत कोर्ट द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट के बाद की गई।

गिरफ्तारी के बाद पाटकर को आज साकेत कोर्ट में पेश किया जाएगा। न्यूज़ एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) विशाल सिंह ने 23 अप्रैल को मेधा पाटकर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। दरअसल, कोर्ट ने उनके बार-बार गैरहाजिर रहने और आदेशों की अवहेलना को गंभीरता से लिया।

Medha Patkar

क्या है मामला?

साल 2000 में वीके सक्सेना ने मेधा पाटकर के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज किया था। जुलाई 2024 में कोर्ट ने उन्हें इस मामले में दोषी ठहराया और तीन महीने की सज़ा सुनाई, जिसे परिवीक्षा (Probation) के आधार पर एक साल तक अच्छे आचरण के लिए सस्पेंड किया गया था। साथ ही उन्हें 10 लाख रुपए का मुआवज़ा भी देने का निर्देश मिला।

हालांकि, 8 अप्रैल 2025 को कोर्ट ने उन्हें मुआवज़ा जमा करने और परिवीक्षा बांड भरने के निर्देश दिए, लेकिन पाटकर ने इसका पालन नहीं किया। इसके बाद कोर्ट ने उनकी गैरहाजिरी को जानबूझकर की गई अवमानना मानते हुए गैर-जमानती वारंट जारी किया।

कोर्ट ने क्या कहा?

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) विशाल सिंह ने कहा, 'दोषी जानबूझकर कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर रही हैं और सजा की शर्तों को मानने से इनकार कर रही हैं। अदालत को अब उन्हें बलपूर्वक पेश करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।' कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि अगली बार भी पाटकर आदेश की अवहेलना करती हैं, तो सजा में परिवर्तन कर उसे और सख्त किया जा सकता है।

हाईकोर्ट में याचिका, लेकिन राहत नहीं

मेधा पाटकर ने कोर्ट में अपील लंबित होने का हवाला देते हुए कार्यवाही पर स्थगन (Stay) की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इस याचिका को "तुच्छ और शरारतपूर्ण" करार देते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में ऐसा कोई निर्देश नहीं है जिससे उन्हें सजा की शर्तों से छूट मिलती हो।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी और अगली सुनवाई

पाटकर इससे पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुई थीं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें 23 अप्रैल को स्वयं उपस्थित होने का निर्देश दिया था। अब यह मामला 3 मई 2025 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

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