दिल्ली में पांच साल में चुने जाएंगे 5 मेयर , एक बार महिला मेयर के हाथों में होगी MCD की कमान
दिल्ली में हर पांच साल में एमसीडी के चुनाव होते हैं, लेकिन मेयर पद का चुनाव हर साल अप्रैल माह में होता है। चुने हुए पार्षदों में से ही कोई मेयर चुना जाता है।

MCD Election Result 2022: दिल्ली एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए भाजपा को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। आप ने 15 साल से दिल्ली में चल रहे भाजपा के शासन को खत्म कर दिया है। आम आदमी पार्टी ने 134 सीटों पर जीत दर्ज करके पूर्ण बहुमत हासिल किया है। वहीं भाजपा के खाते में 104, कांग्रेस के खाते में 9 और निर्दलीयों के पास 3 सीटें आई हैं। वोट शेयर की बात करें तो इस लिहाज से भी आप ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। आप के पास 42.05 फीसदी वोट आया है तो भाजपा के खाते में 39.09 फीसदी वोट आया है। वहीं कांग्रेस को सिर्फ 11.68 फीसदी वोट मिला है।

पांच साल में पांच मेयर क्यों?
अहम बात यह है कि दिल्ली में एमसीडी का चुनाव यूं तो पांच साल में सिर्फ एक बार होता है। लेकिन मेयर का चुनाव सीधे तौर पर नहीं होता है। मेयर का चुनाव पार्षद करकते हैं। वह हर साल अपना नया मेयर चुनते हैं। जिस भी पार्टी को एमसीडी के चुनाव में बहुमत मिलता है वह पांच साल तक सत्ता में रहती है। लेकिन महापौर का कार्यकाल सिर्फ एक साल का ही होता है। ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि इसके पीछे की वजह क्या है।

क्या कहता है एमसीडी एक्ट
दरअसल एमसीडी में जिस पार्टी को बहुमत मिलता है मेयर भी उसी पार्टी का होता है। ऐसे में सदन की जब पहली बैठक होगी तो उसमे मेयर के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। चुने गए पार्षदों में से कुछ मेयर पद पर अपनी दावेदारी पेश करेंगे। मेयर इसके लिए अपना नामांकन करेंगे और फिर पार्षद नए मेयर का चयन करते हैं। दिल्ली नगर निगम एक्ट की बात करें तो हर साल अप्रैल माह में होने वाली पहली बैठक में नए मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव होता है।

महिलाओं और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण
दिल्ली एमसीडी में पहले साल मेयर का पद महिलाओं के लिए आरक्षित होता है। यानि पहले साल कोई महिला पार्षद ही मेयर बन सकती है। इसके बाद अगले साल से पुरुष मेयर पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। तीसरे साल मेयर का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होता है। चौथे और पांचवे साल की बात करें तो यह अनारक्षित होता है। यानि पहले साल महिला और दूसरे साल अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होता है, बाकी के तीन साल मेयर की सीट के लिए अनारक्षित होती है।












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