Delhi: विज्ञापन विवाद पर सिसोदिया का पलटवार- क्या बीजेपी के मुख्यमंत्रियों से भी वसूला जाएगा खर्च?
दिल्ली में विज्ञापन का विवाद गर्म गया है। इसको लेकर डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने बीजेपी पर पलटवार किया है।

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दिल्ली में अब विज्ञापन को लेकर राजनीति गर्मा गई है। राजधानी के सूचना एवं प्रचार निदेशालय (डीआईपी) ने सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) को विज्ञापनों पर खर्च 163.62 करोड़ की भरापाई का निर्देश दिया है। इसके पीछे उन्हें 2015 में जारी उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया। अगर 10 दिन के अंदर पैसा जमा नहीं किया गया, तो पार्टी के मुख्यालय को सील किया जा सकता है। इस पर अब दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने पलटवार किया है।
मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर लिखा कि दिल्ली में अफसरों पर असंवैधानिक नियंत्रण का नाजायज इस्तेमाल देखिए- बीजेपी ने दिल्ली सरकार की सूचना विभाग सचिव ऐलिस वाज (IAS) से नोटिस दिलवाया है कि 2017 से दिल्ली से बाहर राज्यों में दिये गए विज्ञापनों का खर्चा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से वसूला जाएगा। उन्होंने आगे लिखा कि दिल्ली के अखबारों में बीजेपी के तमाम राज्यों के CM के विज्ञापन छपते हैं, पूरी दिल्ली में इनके CM के फोटो वाले सरकारी होर्डिंग लगे हैं। क्या इनका खर्चा बीजेपी मुख्यमंत्रियों से वसूला जाएगा? क्या इसीलिए दिल्ली के अफसरों पर असंवैधानिक कब्जा करके रखना चाहती है बीजेपी?
AAP प्रवक्ता ने कही ये बात
वहीं AAP प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने विज्ञापनों को लेकर दिसंबर में दिए गए एलजी विनय सक्सेना के आदेश को अवैध बताते हुए कहा कि उपराज्यपाल के पास पैसा वसूल करने का अधिकार नहीं है। आदेश का कोई कानूनी मूल्य नहीं है। हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गोवा सहित बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के विज्ञापन दिल्ली में छपते हैं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सरकार भी ऐसा कर रही। उन्होंने कहा कि बीजेपी शासित राज्यों ने दिल्ली में 22,000 करोड़ रुपये के विज्ञापन पब्लिश करवाए हैं। जब बीजेपी 22,000 करोड़ का भुगतान खजाने से करेगी, तो हम क्यों 97 करोड़ अपने पास से दें। उन्होंने एलजी पर केजरीवाल सरकार को परेशान करने का आरोप लगाया।












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