Liquor Policy Case: केजरीवाल की 'जज बदलने' की मांग पर आज आएगा Delhi HC का फैसला, अब तक क्या-क्या हुआ
Liquor Policy Case Delhi HC Verdict: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के लिए आज का दिन कानूनी रूप से बेहद अहम है।
दिल्ली हाई कोर्ट 20 अप्रैल की शाम 4:30 बजे उस याचिका पर अपना फैसला सुनाएगा, जिसमें केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से आबकारी नीति (Liquor Policy) मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने (Recusal) की मांग की है।

शुरुआत में यह फैसला दोपहर 2:30 बजे आना था, लेकिन जस्टिस शर्मा ने इसे शाम के लिए टाल दिया। उन्होंने कहा कि वह केजरीवाल के Rejoinder को लिखित दलील के रूप में स्वीकार करने के लिए 'अपने रास्ते से हटकर' प्रयास कर रही हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए Arvind Kejriwal की गुहार
आज सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि सीबीआई (CBI) द्वारा दाखिल किए गए लिखित जवाबों पर उनके द्वारा दिए गए प्रत्युत्तर को रिकॉर्ड पर लिया जाए। आम आदमी पार्टी ने एक बयान जारी कर सवाल उठाया-केजरीवाल ने सीबीआई के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है, लेकिन इसे रिकॉर्ड पर क्यों नहीं लिया जा रहा? बार-बार हमारे जवाब दर्ज करने से क्यों रोका जा रहा है?
क्या हैं केजरीवाल के आरोप?
केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से केस छोड़ने की मांग करते हुए 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) का मुद्दा उठाया है। केजरीवाल का दावा है कि जस्टिस शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में वकील हैं। याचिका में कहा गया है कि उनके बेटे सुप्रीम कोर्ट में 'ग्रुप-A' और बेटी 'ग्रुप-C' के वकील के रूप में केंद्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उन्हें केस आवंटित करने का जिम्मा सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता के पास है, जो इस मामले में सीबीआई की ओर से पैरवी कर रहे हैं। केजरीवाल के वकीलों का तर्क है कि ऐसी स्थिति में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर संदेह पैदा होता है।
CBI की दलील: 'देरी करने की रणनीति'
दूसरी ओर, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया है। सीबीआई के वकीलों का कहना है कि केजरीवाल और उनकी लीगल टीम सुनवाई में देरी करने के लिए इस तरह की याचिकाएं दायर कर रही है। सीबीआई के मुताबिक, जब सुनवाई अंतिम चरण में होती है, तब जज को बदलने की मांग करना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
Liquor Policy Case का फ्लैशबैक: अब तक क्या हुआ?
CBI की गिरफ्तारी: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामले में राहत मिलने के बाद सीबीआई ने केजरीवाल को भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया था।
हाई कोर्ट में चुनौती: केजरीवाल ने सीबीआई की गिरफ्तारी और ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें रिमांड पर भेजा गया था।
जज से हटने की अपील: इसी मुख्य याचिका के बीच, केजरीवाल के वकीलों ने एक 'रिक्यूसल' (Recusal) अर्जी डाली, जिसमें कहा गया कि यह मामला किसी दूसरी बेंच को ट्रांसफर किया जाना चाहिए।
आज के फैसले का क्या होगा असर?
अगर याचिका मंजूर हुई: तो इस मामले की सुनवाई पूरी तरह से नई बेंच के सामने शुरू होगी, जिससे फैसले में और देरी हो सकती है। अगर याचिका खारिज हुई: तो मौजूदा जज ही इस मामले की सुनवाई जारी रखेंगे और केजरीवाल की गिरफ्तारी की वैधता पर जल्द फैसला आने की उम्मीद बढ़ जाएगी।
दिल्ली की राजनीति और कानूनी गलियारों की निगाहें आज हाई कोर्ट के आदेश पर टिकी हैं। क्या कोर्ट केजरीवाल के 'प्रत्युत्तर' को स्वीकार करेगा और क्या जज इस मामले से अलग होंगे? इन सवालों के जवाब आज दोपहर तक स्पष्ट होने की संभावना है।












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