Kejriwal On Modi Government: 'सड़क पर आ गया आम आदमी', केजरीवाल ने मोदी सरकार पर लगाया बड़ा आरोप
Arvind Kejriwal On Modi Government: आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने मध्य पूर्व संकट को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि सरकार की दूरदर्शिता की कमी और खराब योजना के कारण आज भारत आर्थिक मंदी की कगार पर खड़ा है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जब दुनिया को पता था कि युद्ध होने वाला है, तो केंद्र सरकार ने बैकअप प्लान क्यों नहीं बनाया?
आज शेयर बाजार के गिरने से लेकर रसोई गैस की किल्लत तक, हर समस्या का बोझ सीधा आम आदमी की जेब और उनकी थाली पर पड़ रहा है।

तैयारी में कमी और सरकार की विफलता
केजरीवाल ने सवाल उठाया कि जब युद्ध के बादल हफ्तों से मंडरा रहे थे, तो मोदी सरकार हाथ पर हाथ धरकर क्यों बैठी थी? उन्होंने कहा कि सरकार ने समय रहते ईंधन और अन्य जरूरी चीजों की वैकल्पिक सप्लाई का इंतजाम नहीं किया। इस लापरवाही की वजह से आज पूरे देश में अफरा-तफरी का माहौल है। सरकार की इसी "बिना तैयारी" वाली नीति ने देश को एक गहरे आर्थिक संकट में धकेल दिया है, जिससे उबरना अब मुश्किल हो रहा है।
शेयर बाजार और रुपये की बदहाली
आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए केजरीवाल ने कहा कि शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया है, जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए हैं। साथ ही, भारतीय रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। रुपये की इस कमजोरी से आयात महंगा हो रहा है और महंगाई आसमान छू रही है। केजरीवाल के अनुसार, यह गिरता हुआ रुपया और डूबता बाजार मोदी सरकार की नाकाम आर्थिक नीतियों का जीता-जागता सबूत है।
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एलपीजी की किल्लत और जनता की मुश्किलें
आम आदमी की परेशानियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज लोग भीषण गर्मी में गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइनों में खड़े होने को मजबूर हैं। एलपीजी की भारी कमी के कारण छोटे कारोबार और होटल बंद हो रहे हैं। गैस न मिलने से आम लोगों के घरों का बजट बिगड़ गया है। केजरीवाल ने पूछा कि एक विकासशील देश में बुनियादी सुविधाओं के लिए जनता को इस तरह लाइनों में क्यों तड़पाया जा रहा है?
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रोजगार संकट और मजदूरों का पलायन
युद्ध के असर से पैदा हुए इस आर्थिक संकट ने सबसे ज्यादा चोट गरीब और प्रवासी मजदूरों पर की है। केजरीवाल के मुताबिक, व्यापार ठप होने से हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं और मजदूरों के सामने एक बार फिर आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कड़े शब्दों में पूछा कि सरकार की इन कूटनीतिक और प्रशासनिक गलतियों की सजा हमेशा एक आम आदमी या दिहाड़ी मजदूर को ही क्यों भुगतनी पड़ती है?












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