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Justice Yashwant Varma Cash Controversy: जस्टिस यशवंत वर्मा को SC से नहीं मिली राहत, महाभियोग का रास्ता साफ

Justice Yashwant Varma Cash Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 16 जनवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस वर्मा ने लोकसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ महाभियोग (हटाने) की प्रक्रिया को मंजूरी दी गई थी और जांच समिति बनाई गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई आगे बढ़ सकेगी। विस्तार से जानिए कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा...

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Supreme Court Verdict: कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने साफ कहा कि जस्टिस यशवंत वर्मा को इस मामले में कोई राहत नहीं दी जा सकती।फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा-इस याचिका में याचिकाकर्ता को किसी भी तरह की राहत नहीं मिल सकती। कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की सभी दलीलों को खारिज कर दिया। पीठ ने जस्टिस वर्मा की उन दलीलों को खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने कहा था कि जजेज़ (इन्क्वायरी) एक्ट, 1968 (Judges Inquiry Act 1968 ) के तहत संयुक्त जांच समिति (जॉइंट कमेटी) का गठन अनिवार्य है और राज्यसभा के उपसभापति को हटाने के प्रस्ताव को खारिज करने का अधिकार नहीं था।

जस्टिस वर्मा की दलीलें क्यों नहीं मानी गईं?

जस्टिस वर्मा का कहना था कि जजेज़ (इन्क्वायरी) एक्ट, 1968 के तहत संयुक्त जांच समिति बननी चाहिए थी। राज्यसभा के उपसभापति को हटाने के प्रस्ताव को खारिज करने का अधिकार नहीं था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों दलीलों को गलत माना। जस्टिस वर्मा का कहना था कि ऐसा न करना पूरी प्रक्रिया को अवैध बनाता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि राज्यसभा के उपसभापति को प्रस्ताव को खारिज करने का अधिकार नहीं था, क्योंकि यह अधिकार केवल सभापति के पास होता है।

Justice Yashwant Varma Cash Controversy: पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ?

यह मामला मार्च 2025 का है। दिल्ली में जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने की घटना हुई थी। इसके बाद उनके घर से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की खबरें आईं। उस समय वे दिल्ली हाईकोर्ट में जज थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की एक आंतरिक जांच समिति ने उनका जवाब संतोषजनक नहीं माना। तब तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को कार्रवाई की सिफारिश की।

संसद में कैसे पहुंचा मामला?

यह पूरा मामला मार्च 2025 का है, जब दिल्ली में जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास में आग लगने की घटना के बाद कथित तौर पर बेहिसाब नकदी मिलने की खबरें सामने आई थीं। उस समय वे दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश थे। इसके बाद 21 जुलाई 2025 को जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों में प्रस्ताव पेश किए गए। लोकसभा अध्यक्ष ने 12 अगस्त 2025 को प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और तीन सदस्यीय जांच समिति बना दी।

वहीं राज्यसभा के उपसभापति ने प्रस्ताव को तकनीकी खामियों के चलते स्वीकार नहीं किया। उस समय राज्यसभा के सभापति का पद खाली था। वहीं, राज्यसभा के उपसभापति ने प्रस्ताव को प्रक्रियागत खामियों के आधार पर स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उस समय राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के कारण पद रिक्त था।

सरकार का क्या कहना था?

केंद्र सरकार और लोकसभा सचिवालय ने कोर्ट में कहा कि राज्यसभा में प्रस्ताव कभी स्वीकार ही नहीं हुआ, इसलिए उसका कोई कानूनी अस्तित्व नहीं बना। ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष को अलग से जांच समिति बनाने का पूरा अधिकार था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्यसभा में प्रस्ताव खारिज होने को न किसी सांसद ने चुनौती दी और न ही जस्टिस वर्मा ने।

कोर्ट ने कहा कि उसे एक तरफ न्यायाधीश के अधिकारों और दूसरी तरफ जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की इच्छा दोनों के बीच संतुलन बनाना होता है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर सिर्फ इसलिए जांच रोक दी जाए कि राज्यसभा में सभापति का पद खाली है, तो न्यायाधीशों के खिलाफ कार्रवाई की पूरी व्यवस्था ठप हो सकती है।

राज्यसभा में प्रस्ताव क्यों खारिज हुआ?

राज्यसभा के सचिव जनरल पी.सी. मोदी ने प्रस्ताव में कई कमियां बताईं-गलत कानूनी धाराओं का इस्तेमाल, जरूरी दस्तावेजों की कमी, तथ्यों में विरोधाभास इन्हीं वजहों से उपसभापति हरिवंश ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा बनाई गई तीन सदस्यीय जांच समिति में शामिल हैं- सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनींद्र मोहन श्रीवास्तव, वरिष्ठ वकील बी.वी. आचार्य

जस्टिस यशवंत वर्मा ने 12 जनवरी को जांच समिति को अपना जवाब दे दिया है। उन्होंने आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है और कहा है कि उनके घर से कोई नकदी नहीं मिली थी। अब वे 24 जनवरी को जांच समिति के सामने खुद पेश होंगे।

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