JNU Violence: आधी रात को क्यों सुलग उठा जेएनयू? VC के बयान से ABVP-लेफ्ट झड़प तक, जानें हिंसा की इनसाइड स्टोरी
JNU Violence News: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर तब देश भर में चर्चा में आ गया जब रविवार, 22 फरवरी 2026 की आधी रात को जेएनयू कैंपस उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच भीषण झड़प हो गई।
लाठी-डंडों और पथराव के बीच कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिससे पूरे कैंपस में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा है। इस हिंसा में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना ने एक बार फिर कैंपस की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की आजादी और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल, यह पूरा मामला विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित (Shantishree Dhulipuri Pandit) के एक विवादित इंटरव्यू और छात्र संघ पदाधिकारियों के निष्कासन के बाद सामने आ गए। देखते ही देखते साबरमती टी-पॉइंट से लेकर लाइब्रेरी तक का इलाका लेफ्ट बनाम राइट के जंग का मैदान बन गया। विस्तार से जानिए जेएनयू मामले में अब तक क्या-क्या हुआ...
JNU Campus Protest: कुलपति के बयान से कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
इस पूरे टकराव की जड़ JNU की कुलपति (Vice Chancellor) शांतिश्री धुलीपुडी पंडित का एक हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू है। करीब 52 मिनट के इस इंटरव्यू में कुलपति ने UGC की नई इक्विटी (Equity) नियमावली पर टिप्पणी करते हुए दलितों और अश्वेत समुदाय (Blacks) को लेकर ऐसे बयान दिए, जिन्हें छात्रों ने जातिवादी और अपमानजनक बताया।
कुलपति ने अपने पॉडकास्ट में कहा था- आप हमेशा पीड़ित बनकर आगे नहीं बढ़ सकते। यह अश्वेतों के लिए किया गया, वही चीज यहां दलितों के लिए लाई गई। छात्र संगठनों का आरोप है कि यह बयान न केवल असंवेदनशील है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत वर्चस्व को भी दर्शाता है।
यह पूरा मामला यहीं नहीं रुका। हाल ही में JNUSU के पांच निर्वाचित पदाधिकारियों को कथित रूप से CCTV कैमरों में तोड़फोड़ के आरोप में दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित (Rusticate) कर दिया गया और उन पर ₹20,000 का जुर्माना लगाया गया। वामपंथी छात्र संगठनों और JNUSU का कहना है कि यह कार्रवाई छात्र राजनीति को दबाने और असहमति की आवाज को कुचलने की कोशिश है।
JNU Midnight Violence: 'समता जुलूस' से हिंसा तक- आधी रात को कैंपस में क्या हुआ ?
रविवार रात करीब 12:30 बजे JNUSU और लेफ्ट संगठनों ने VC के इस्तीफे और निष्कासन आदेश वापस लेने की मांग को लेकर 'समता मशाल जुलूस' निकालने का ऐलान किया। मार्च साबरमती टी-पॉइंट से शुरू हुआ और ईस्ट गेट की ओर बढ़ा, जो कुलपति आवास के पास है। छात्रों का दावा है कि यह हाल के महीनों का सबसे बड़ा छात्र मार्च था इसी दौरान हालात बिगड़ गए और आधी रात को हिंसक झड़प, पत्थरबाजी और लाठीचार्ज होने लगा। रात करीब 1 से 1:30 बजे के बीच माहौल अचानक हिंसक हो गया।
वामपंथी संगठनों का आरोप है कि ABVP कार्यकर्ताओं ने मार्च कर रहे छात्रों पर हमला किया वहीं ABVP का दावा है कि लेफ्ट से जुड़े छात्रों ने लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्रों को निशाना बनाया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पत्थरबाजी, भगदड़ और लाठियों के इस्तेमाल के दृश्य दिख रहे हैं। कई छात्रों को सिर, हाथ और पीठ में गंभीर चोटें आईं।
JNU ABVP Left Clash: दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप
लेफ्ट और JNUSU का आरोप है कि प्रशासन ने छात्रों से संवाद करने के बजाय ABVP को भिड़ने की छूट दी जिससे निहत्थे छात्रों पर टारगेटेड हमला किया गया। यह हिंसा पूर्व नियोजित थी। ABVP का दावा है कि लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्रों पर हमला हुआ जो राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि कायरतापूर्ण हिंसा है।
JNU प्रशासन का बयान: छात्रों को धमकाया गया, लाइब्रेरी में जबरन घसीटा गया
JNU प्रशासन ने कहा है कि उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने कई अकादमिक इमारतों को जबरन बंद कर दिया। सेंट्रल लाइब्रेरी में घुसकर पढ़ाई कर रहे छात्रों को धमकाया गया और छात्रों को जबरन प्रदर्शन में शामिल होने के लिए डराया और दबाव डाला गया।
प्रशासन के मुताबिक,इसी के चलते 22 फरवरी की रात कैंपस में दो छात्र समूहों के बीच झड़प हुई, जिसे प्रशासन बेहद गंभीरता से ले रहा है। प्रशासन ने साफ कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कैंपस के समावेशी माहौल को तोड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विश्वविद्यालय की कुलपति की सफाई: मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया
विवाद बढ़ने के बाद VC शांतिश्री धुलीपुडी पंडित ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया। वे स्वयं OBC पृष्ठभूमि से आती हैं। उनकी टिप्पणी किसी समुदाय पर नहीं बल्कि वोकिज्म और इतिहास की गलत व्याख्या पर थी। निष्कासन पर उन्होंने कहा कि प्रशासन ने संयम बरता वरना सख्त कार्रवाई हो सकती थी।
JNUSU ने अब इस मुद्दे पर राष्ट्रीय विरोध दिवस मनाने का ऐलान किया है। छात्र संगठनों ने कहा है कि जब तक VC इस्तीफा नहीं देतीं और निष्कासन आदेश वापस नहीं होता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन को आगे बढ़ाते हुए छात्रों ने स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज, लैंग्वेज, इंटरनेशनल स्टडीज, आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स और लॉ सेंटर में लॉकडाउन की भी चेतावनी दी है।
कैंपस में तनाव बरकरार, प्रशासन खामोश
JNU में वैचारिक मतभेद अक्सर हिंसा का रूप ले लेते हैं लेकिन इस बार मामला कुलपति के सीधे बयानों से जुड़ा है। घटना के बाद से JNU कैंपस में भारी तनाव है। कई छात्र डरे हुए हैं और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सवाल जो अब भी बाकी हैं क्या छात्रों पर कार्रवाई राजनीति से प्रेरित थी?
कैंपस में बार-बार हिंसा क्यों भड़कती है? छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं, लेकिन इतना तय है कि JNU एक बार फिर देश की सियासत और बहस के केंद्र में आ गया है।












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