मनीष सिसोदिया की रिहाई अरविंद केजरीवाल के लिए कहीं झटका तो नहीं है?

Delhi News: दिल्ली शराब घोटाले में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की 17 महीने बाद तिहाड़ जेल से रिहाई, आम आदमी पार्टी के आम कार्यकर्ताओं के लिए उत्साह से भर देने वाली घटना है। क्योंकि, सिसोदिया पार्टी में नंबर दो के स्थान पर रहे हैं और आप संयोजक मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस मामले में अभी भी जेल में ही बंद हैं।

जेल से निकलते ही मनीष सिसोदिया ने पार्टी की कमान अपने हाथों में थामनी शुरू कर दी है। रविवार को ही विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर उन्होंने दिल्ली में अपने आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की है। इसी बैठक में तय हुआ है कि 14 अगस्त से सिसोदिया पदयात्रा के साथ ही चुनाव अभियान का आगाज करेंगे।

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जेल से लौटते ही सिसोदिया ने थामी पार्टी की कमान!
जेल से लौटने के बाद मनीष सिसोदिया ने पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल की मौजूदगी में पार्टी विधायकों के साथ भी बैठक की है। मनीष सिसोदिया जब जेल गए थे तो डिप्टी सीएम होने के अलावा वे सबसे ज्यादा विभागों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।

जेल जाने के बाद केजरीवाल ने सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी आतिशी को सौंपी
शराब घोटाले में गिरफ्तारी के बाद जब उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा दिया और उसके बाद आतिशी मंत्री बनीं तो सबसे अधिक विभागों वाली मंत्री होने सेहरा उनके सिर बंध गया। मतलब, अभी दिल्ली सरकार में सबसे प्रभावशाली मंत्री आतिशी हैं।

हाल ही में आम आदमी पार्टी की ओर से दावा किया गया था कि मुख्यमंत्री केजरीवाल ने उपराज्यपाल को चिट्ठी लिखकर उनकी जगह आतिशी को ही 15 अगस्त को झंडा फहराने देने की सिफारिश की है।

केजरीवाल के जेल जाने के बाद 'आप' का प्रमुख चेहरा बनीं सुनीता केजरीवाल
इसके ठीक उलट जहां तक आम आदमी पार्टी संगठन की बात है तो जब से केजरीवाल जेल गए हैं, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल को पार्टी ने सबसे ज्यादा प्रमुखता दी है। लोकसभा चुनावों के दौरान विपक्षी इंडिया अलायंस में सुनीता केजरीवाल ही पार्टी का प्रमुख चेहरा रहीं। वह पूरी तरह से पार्टी की राजनीति में सक्रिय हो चुकी हैं। विपक्षी दलों के बड़े नेताओं के साथ बैठक में वो ही पार्टी का प्रतिनिधित्व करती हैं।

पार्टी में अब सुनीता केजरीवाल की क्या भूमिका होगी?
इन परिस्थितियों में जब पार्टी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी 90 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है और अगले साल की शुरुआत में दिल्ली विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं, मनीष सिसोदिया ने अगर पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरे के तौर पर अपनी पहचान स्थापित कर ली तो सुनीता को आगे बढ़ाने का केजरीवाल के इरादे का क्या होगा?

आम आदमी पार्टी में केजरीवाल के सबसे बड़े राजदार हैं मनीष सिसोदिया
तथ्य यह है की दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी में अरविंद केजरीवाल के बाद मनीष सिसोदिया से बड़ा चेहरा कोई नहीं है। वह लगातार तीन बार पटपड़गंज सीट से विधायक हैं। वह अन्ना आंदोलन के समय से केजरीवाल के साथ जुड़े हुए हैं। पार्टी कैसे बनी, किस तरह से चली, इसमें केजरीवाल का सिसोदिया से बड़ा राजदार कोई नहीं है।

ऐसे में खासकर दिल्ली विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर जिस तरह से मनीष सिसोदिया ने पदयात्रा निकालने की सोची है, उसके बारे में सुनकर अरविंद केजरीवाल कितने खुश हो रहे होंगे? जबतक वे खुद जेल से छूटकर नहीं आते तबतक तो यही लग रहा है कि आम आदमी पार्टी मनीष सिसोदिया के कहने पर ही चलेगी।

ऐसे में जब आम आदमी पार्टी का आधार दिल्ली की राजनीति पर ही टिका हुआ है, इसमें अगर सिसोदिया को बढ़त मिल गई तो यह पार्टी की राजनीति को नई दिशा दे सकती है, जिसमें फिलहाल केजरीवाल का परिवार पीछे छूटता हुआ नजर आ रहा है।

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