IGF का तीन दिवसीय सम्मेलन 26 से 29 नवम्बर तक दुबई में होगा, 120 वक्ता करेंगे तरक्की के अवसरों पर चर्चा
इंडिया ग्लोबल फोरम का मकसद भारत मध्य पूर्व और अफ्रीका की महत्वाकांक्षाओं को साकार करते हुए इन महाद्वीपों को आपस में जोड़ना है। इंडिया ग्लोबल फोरम मध्य पूर्व और अफ्रीका 2023 अनलिशिंग एंबिशंस 26 से 29 नवंबर तक तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित करेगा। यह आयोजन दुबई में होगा। इसमें 120 वक्ता शामिल होंगे। सम्मेलन के दौरान वैश्विक नीति निर्माता, व्यापार, नेताओं, संस्थापकों एवं निवेशकों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, प्रतिभा और निवेश के क्षेत्र में अवसरों पर चर्चा की जाएगी। संयुक्त अरब अमीरात और भारत के संबंधों में व्यापक राजनीतिक साझेदारी बढ़ाने के बाद से इन देशों के बीच संभावनाओं को साकार करने में उन्नति हुई है। इस दौरान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर ऐतिहासिक हस्ताक्षर हो या बहुपक्षीय मंचों पर एक साथ आना हो। पिछले दो सालों में संयुक्त अरब अमीरात में इंडिया ग्लोबल फोरम के प्रमुख कार्यक्रम ने भारत यूएई सहयोग की व्यापकता और ताकत का प्रदर्शन किया है। अब इंडिया ग्लोबल फोरम अपने तीसरे संस्करण में मध्य पूर्व और अफ्रीका के साथ संयुक्त अरब अमीरात में लौटने लिए तैयार है। हालांकि इसकी जड़े अरब अमीरात में है। लेकिन अब यह वैश्विक दृष्टिकोण को बढ़ाते हुए अफ्रीका को भी शामिल करेगा। इंडिया ग्लोबल फोरम का यह उद्देश्य बदलते हुए भू-राजनीतिक परिदृश्य को दिखाता है। जिसमें ग्लोबल साउथ आर्थिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।
भारत, मध्य पूर्व और अफ्रीका दुनिया में बदलाव ला रहे
भारत मध्य पूर्व और अफ्रीका दुनिया में बदलाव ला रहे हैं। भारत में मितव्ययी नवाचार का बीड़ा उठाया है। अफ्रीका के पास तेजी से बढ़ाने के लिए संसाधन जनसांख्यिकी और बाजार का आकार है। जबकि संयुक्त अरब अमीरात और मध्य पूर्व क्षेत्र बाजार के बीच व्यापार प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए पूंजी और रसद का प्रमुख स्रोत है। आईएफ इन क्षेत्रों के बीच व्यापार निवेश नवाचार प्रौद्योगिकी और स्थिरता के क्षेत्र में आगे सहयोग और विकास के अवसरों का पता लगाएगा। इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं एकजुट होकर कैसे कम कर सकती है। समावेशी वित्त पोषण शक्ति को अफ्रीका में नई सीमाओं तक कैसे पहुंचा जा सकता है। इसके लिए आइजीएफ द्वारा पैनल चर्चा और मुख्य भाषणों के लिए भारत, संयुक्त अरब अमीरात और अफ्रीका के व्यापारिक, नेताओं, नीति निर्माता और विचारों को बुलाएगा। आईएफ के संस्थापक और अध्यक्ष मनोज लाडवा का कहना है कि आइजीएफ यूएई 2022 में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बिल्कुल सही कहा कि भारत यूएई संबंध महत्वाकांक्षी है। क्योंकि यह अपनी द्विपक्षीय संभावनाओं तक सीमित नहीं है। बल्कि आगे भी बढ़ेगा और वैश्विक स्तर पर अपना लोहा भी मनवाएंगे।

जलवायु परिवर्तन के लिहाज से अफ्रीका संवेदनशील महाद्वीप
आईएफ के संस्थापक लाडवा के मुताबिक आपसी सहयोग का जलवायु परिवर्तन शमन ही सबसे अच्छा तरीका है। सबसे कम कार्बन उत्सर्जन होने के बावजूद अफ्रीका जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे संवेदनशील महाद्वीप है। इससे इस देश की अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि और विकासात्मक लक्षण पर विनाशकारी प्रभाव पढ़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि भारत, संयुक्त अरब अमीरात और अफ्रीका द्वारा इसे संबोधित करने में जो सामूहिक नेतृत्व पेश किया जा सकता है। वह न केवल क्षेत्रीय समृद्धि बल्कि वैश्विक पर्यावरण प्रबंधन के प्रति प्रतिबद्धता को भी इंगित करेगा। दुबई में सीओपी 28 शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर रणनीतिक रूप से समयबद्ध, स्थाई आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए जलवायु नेतृत्व नीति रणनीतियों और हरित प्रौद्योगिकियों के बारे में जानकारी जुटाएगा।
आईजीएफ का यह है प्रमुख कार्यक्रम
इंडियन ग्लोबल फॉर्म का प्रमुख कार्यक्रम आईजीएफ स्टूडियो और आईएफ फोरम भी है। स्टूडियो एक गतिशील प्रसारण शैली का मंच है। जिसमे प्रसिद्ध न्यूज़ रूम पोस्ट को मॉडरेटर और लाइव दर्शन के रूप में पेश किया जाएगा। यह संयुक्त अरब अमीरात एवं भारत की साझेदारी के बीच प्रमुख क्षेत्र और मध्य पूर्व और अफ्रीका के लिए व्यापक चर्चा को बढ़ावा देगा। इसके जरिए आईजीएफ फोरम इस बात की भी जांच करेगा कि व्यवसाय और सरकारें सतत आर्थिक विकास को चलाने, क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ाने और आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अपने संसाधनों और विशेषज्ञता का लाभ कैसे उठा सकती है। लाडवा कहते हैं कि वैश्विक साझेदारी को मजबूत करके भारत मध्य पूर्व और अफ्रीका के बीच संभावित तालमेल की खोज करके हम एक उज्जवल अधिक समावेशी भविष्य के लिए मंच तैयार कर रहे हैं। जहां दुनिया के सभी कोणों से आवाज़ सुनी जाएगी।












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