'अगर शरणार्थी...तो क्या महिलाएं सुरक्षित महसूस करेंगी?' केजरीवाल ने CAA को लेकर अब अमित शाह पर साधा निशाना
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार द्वारा सीएए लागू कर दिया गया है। जिसको लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) को लेकर केंद्र पर एक बार फिर घेरा है। उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल पूछा है कि क्या शरणार्थी उनके घरों के पास बस जाएंगे तो क्या महिलाएं सुरक्षित महसूस करेंगी।

बता दें दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल की ये प्रतिक्रिया उस बात का जवाब है जो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा था। अमित शाह ने कहा था केजरीवाल रोहिंग्याओं का नहीं बल्कि हिंदू शरणार्थियों का विरोध करके 'वोट बैंक की राजनीति' कर रहे हैं।
अमित शाह के इस इंटरव्यू के चंद घंटे बाद सीएम केजरीवाल ने प्रेस वार्ता की और दोहराया कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से शरणार्थियों को अनुमति देना देश के लिए बहुत खतरनाक होगा, और वास्तविक भारतीय नागरिकों के लिए नौकरी के अवसर छीन लेगा।
हालांकि प्रेस कान्फ्रेंस में सीएम केजरीवाल ने कहा मैंने अपना बयान में गृह मंत्री अमित शाह ने मेरे द्वारा बुधवार को उठाए गए किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया है। उन्होंने सिर्फ मुझे गालियां दी हैं और मुझे भ्रष्ट कहा है।
सीएम केजरीवाल ने कहा देश की सभी राज्य सरकारें हमारे युवाओं को नौकरी देने में असमर्थ हैं, आप पाकिस्तान और बांग्लादेश से बड़ी संख्या में आने वाले प्रवासियों को नौकरी और घर कैसे देंगे जिन्हें आप देश में आने की अनुमति देना चाहते हैं? उन्होंने एक बार फिर अपनी बात दोहराई कि सबसे पहले आप हमारे देश के युवाओं को नौकरी दें। उनके लिए घर और अन्य संसाधन कहां से आएंगे?
सीएम केजरीवाल ने कहा हम पहले से ही नौकरियों और आवास के संकट का सामना कर रहे हैं। अगर पाकिस्तान से आए प्रवासियों को आपके घर के पास झुग्गियों में बसाया जाए तो क्या आप स्वीकार करेंगे? क्या आपके परिवार में महिलाएं सुरक्षित महसूस करेंगी? क्या आप उनके बीच सुरक्षित महसूस करेंगे?
बता दें केंद्र सरकार ने संसद द्वारा 2019 में विवादास्पद कानून पारित करने के चार साल बाद अब ठीक लोकसभा चुनाव से ठीक पहले नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के कार्यान्वयन के लिए नियमों को अधिसूचित किया है। याद रहे सीएए के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आए बिना दस्तावेज वाले गैर-मुस्लिम प्रवासी (हिंदू, पारसी, ईसाई) को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रवाधान करता है।
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने एएनआई को दिए इंटरव्यू में केजरीवा द्वारा सीएए के संबंध में की टिप्पणी को लेकर उनकी आलोचना की और कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री का गुस्सा भ्रष्टाचार के मामलों में उनकी पार्टी के कथित प्रदर्शन से उपजा है और दावा किया कि यह 'वोट बैंक की राजनीति' के कारण है कि केजरीवाल रोहिंग्याओं के खिलाफ विरोध नहीं करते हैं।
बता दें केजरीवाल ने बुधवार को कहा था कि सीएए के तहत प्रवासन विभाजन के दौरान 1947 की तुलना में बड़ा होगा। इसके साथ ही केजरीवाल ने सवाल उठाया था कि "रोहिंग्या 2014 के बाद भारत आए, वे कैसे आए? क्या वे आपकी (केंद्र सरकार) की असफलता के कारण आए या आपकी किसी मिलीभगत के कारण आए? इसके साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा था कि प्रवासियों के लिए दरवाजे खोलना देश के लिए बहुत खतरनाक है और हम भारत आने वाले प्रवासियों की संख्या की कल्पना नहीं कर सकते। "












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